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कश्मीर : दामाल हांजीपोरा में थाने में ही रहने लगे हैं पुलिस कर्मी, भीड़ ने कई सरकारी इमारतें जला डालीं

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कश्मीर : दामाल हांजीपोरा में थाने में ही रहने लगे हैं पुलिस कर्मी, भीड़ ने कई सरकारी इमारतें जला डालीं

दामाल हांजीपोरा के अस्पताल भवन में चल रहा पुलिस थाना.

खास बातें

  1. बुरहान की मौत के बाद भीड़ ने जला दिया दामाल हांजीपोरा थाना
  2. पुलिस कर्मियों को बंधक बनाकर सभी हथियार लूट लिए
  3. बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित हैं पुलिस कर्मी
कुलगाम:

दक्षिण कश्मीर में अलगावादियों के उकसावे में आकर निरंकुश भीड़ ने भारी तबाही मचाई है. पुलिस थाने सहित कई सरकारी इमारतें जला डाली हैं. हालात इतने खराब हैं कि पुलिस कर्मी खाकी वर्दी पहनने से डरते हैं और थानों में ही रहते हैं. एनडीटीवी ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया तो मुश्किल हालात और चुनौतियों का सामना करता हुआ पुलिस का वह चेहरा सामने आया जो देश के बाकी हिस्सों की पुलिस से जुदा है.        

कश्मीर में पिछले कुछ समय से जारी अलगाववादी प्रदर्शनों के दौरान हिंसक भीड़ ने कई सरकारी भवनों को जला डाला है. बुरहान वानी की मौत के बाद दामाल हांजीपोरा के थाने को भीड़ ने फूंक डाला. पुलिस की मानें तो इस मामले में भीड़ में आतंकवादी भी शामिल थे. अब यह थाना एक अस्पताल की इमारत में चल रहा है.

 
दामाल हांजीपोरा का जला दिया गया पुलिस थाना.
 
खंडहर बना पुलिस स्टेशन दामाल हांजीपोर
दक्षिण कश्मीर में दमाल हांजीपोरा थाने के भवन को जला दिया गया है. बुरहान वानी के मारे जाने के बाद सबसे पहले इसी पर हमला हुआ था. दस हजार लोगों की भीड़ ने थाने पर हमला किया था. पुलिस की मानें तो इस भीड़ में आतंकवादी भी शामिल थे. इस थाने में पदस्थ एक  पुलिस कॉन्सटेबल ने एनडीटीवी इंडिया को बताया कि "हम सब लोग अंदर थे जब हजारों की संख्या में लोग आए. उन्होंने हम सबको बंधक बना लिया. पुलिस ने भी कर्रवाई की, लेकिन भीड़ में आतंकवादी भी थे. उन सबने हथियार गृह से सभी हथियार लूट लिए." इस थाने में तैनात 40 में से 22 पुलिस कर्मी इस हमले में घायल हो गए थे.
 

NDTV पहला चैनल जो दामाल हांजीपोरा पहुंचा
दामाल हांजीपोरा में हमले की घटना के बाद एनडीटीवी ही वह पहला चैनल है जो यहां पहुंचा. जब हम तस्वीरें ले रहे थे तो आसपास लोग भी इकट्ठे होने लगे. पुलिस ने हमें जल्दी-जल्दी काम करने को कहा. वैसे जब एनडीटीवी की टीम दामाल हांजीपोरा पहुंची तभी इलाके के एसएसपी श्रीधर पाटिल भी वहां पहुंचे थे. एसएसपी साहब अभी हाल में इस इलाके में नियुक्त हुए हैं. यहां से पिछले एसएसपी का ही नहीं बल्कि पूरे थाने का ही तबादला किया गया है. एसएसपी पाटिल जब मुआयना कर रहे थे तब पुराने पुलिस कर्मी उन्हें बता रहे थे कि 9 जुलाई को यहां क्या हालात थे.

थाने से लूटे गए हथियार
हमलावरों ने थाने में जितने हथियार थे सभी लूट लिए. इन हथियारों में एके-56, एके-47, इंसास और .303 आदि शामिल थे. भीड़ में शामिल आतंकवादियों ने थाने में ग्रेनेड ब्लास्ट भी किए थे. उन्होंने मुंशी रूम से लेकर लॉक अप तक सब में आग लगा दी थी.


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भीड़ ने पुलिस को बनाया बंधक
हमला कई घंटे तक चला लेकिन इन पुलिस वालों को बचाने के लिए कोई नहीं आया. इसकी वजह थी कि जितनी सड़कें इस ओर आती हैं, सभी को ब्लॉक कर दिया गया था. बड़े-बड़े पत्थरों की दीवार खड़ी कर दी गई थी. सड़कों पर रेत बखेर दी गई थी ताकि कोई वाहन न चल सके. पेड़ काटकर गिरा दिए गए थे ताकि सेना भी यहां न पहुंच सके. कुलगाम की सड़कों पर यह सब सबूत आज भी बिखरे पड़े हैं.

दक्षिण कश्मीर के हाईवे पर ज्यादा कड़ी सुरक्षा
पुलिस ने ज़्यादा इंतज़ाम दक्षिण कश्मीर के हाईवे पर अमरनाथ यात्रियों के लिए कैम्प के आसपास ज्यादा तगड़ी सुरक्षा की थी. पंडित कालोनी, जोकि कुलगाम के पास ही है, के आसपास भी सुरक्षा पुख्ता थी. अंदेशा इन्हीं स्थानों पर हमले का था.

 

अलगाववादियों ने दो माह में कई सरकारी इमारतें खाक कर दी हैं. दामाल हांजीपोरा का थाना ही नहीं, पिछले दो माह में उग्र भीड़ ने पचास से ज्यादा सरकारी भवन जलाकर खाक कर डाले हैं.
 

अब अस्पताल भवन में चल रहा है थाना
एनडीटीवी को जानकारी मिली कि थाना जलने के बाद कई दिन तक यहां पुलिस मौजूद ही नहीं थी. पुलिस वालों का कहना है कि थाने के लिए उन्हें कोई जगह ही नहीं मिल रही थी. बहुत ढूंढने के बाद एक खली पड़ी अस्पताल की बिल्डिंग में थाना शुरू किया गया.  इस भवन में बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं. इस भवन की हालत देखने हम वहां पहुंचे तो देखा कि वहां न तो कंट्रोल रूम है न ही मुंशी रूम. एक पुलिस वाले ने कहा कि "हम लोग यहीं रहते हैं काम करते हैं और सोते हैं." दरअसल दक्षिण कश्मीर में हालात इतने खराब हैं कि पुलिस कर्मी अपनी वर्दी पहनने से भी डरते हैं. वे घर नहीं जाते हैं. एसएसपी कुलगाम श्रीधर पाटिल ने एनडीटीवी को बताया कि " यह एक अस्पताल की बिल्डिंग थी जो खाली पड़ी थी. अब शिफ्ट थाना यहां बनाया गया है. बहुत मुश्किलें हैं, लेकिन पुलिस वाले ट्रेंड होते हैं. मुश्किल झेलने के लिए."  
 

पुलिस के पास बुनियादी सुविधाएं भी नहीं
कहा जाता है कि पुलिसिंग को बेहतर बनाने के लिए संचार और तकनीक होना लाज़मी है लेकिन दामाल हांजीपोरा थाने में तो बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं और इन पुलिस वालों से उम्मीद की जाती है कि वे आतंकवादियों का मुकाबला करें. बहरहाल अगली बार जब आप खाकी वर्दी को गाली दें तो दामाल हांजीपोरा में काम करने वाले पुलिस वालों को जरूर याद कर लेना.


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