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कठुआ मामला: आरोपी किशोर की मुसीबतें बढ़ा सकता है 14 साल पहले दिया गया आवेदन

याचिका के मुताबिक पिता द्वारा जम्मू प्रांत के हीरानगर के तहसीलदार कार्यालय में 15 अप्रैल 2004 को दाखिल कराए गए आवेदन में काल्पनिक प्रविष्टियां हैं.

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कठुआ मामला: आरोपी किशोर की मुसीबतें बढ़ा सकता है 14 साल पहले दिया गया आवेदन

प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली: जम्मू - कश्मीर के कठुआ में आठ वर्षीय बच्ची से बलात्कार और हत्या के मामले में आरोपी बनाए गए किशोर पर वयस्क के रूप में मुकदमा चलाने के लिए जम्मू - कश्मीर पुलिस ने उसके पिता द्वारा 14 साल पहले लिखे गए एक आवेदन को आधार बनाया है. आरोपी के पिता ने अपने तीन बच्चों के जन्म का पंजीकरण कराने के लिए यह आवेदन दिया था.अधिकारियों ने बताया कि जम्मू - कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा ने निचली अदालत के उस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में आवेदन दायर किया है जिसमें किशोर  को नाबालिग मानने को कहा है.

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राज्य पुलिस ने अपनी याचिका के साथ इस आवेदन को भी संलग्न किया है. उन्होंने बताया कि इस आवेदन में बहुत सारी गलतियां हैं जो इसकी सत्यता को संदेह के घेरे में रखती हैं. विशेषज्ञों के चिकित्सा बोर्ड की एक रिपोर्ट में किशोर की उम्र कम से कम 19 साल और 23 साल से अधिक नहीं बतायी गयी है. इस याचिका के साथ उस रिपोर्ट को भी संलग्न किया गया है. अदालत इस मामले पर छह जून को सुनवाई करेगी.

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याचिका के मुताबिक पिता द्वारा जम्मू प्रांत के हीरानगर के तहसीलदार कार्यालय में 15 अप्रैल 2004 को दाखिल कराए गए आवेदन में काल्पनिक प्रविष्टियां हैं. पिता ने इसमें अपने तीन बच्चों के लिए जन्म प्रमाणपत्र की मांग की है जिसमें बड़े बेटे की जन्मतिथि 23 नवंबर 1997, बेटी की जन्मतिथि 21 फरवरी , 1998 और सबसे छोटे बेटे जो कठुआ मामले का आरोपी है की जन्मतिथि 23 अक्तूबर 2002 बताई गई है. याचिका में कहा गया है कि दोनों बड़े बच्चों के जन्म में दो महीने 28 दिन का अंतर दिखाया गया है जो किसी भी चिकित्सकीय मानक के लिहाज से संभव नहीं है.

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वहीं आरोपी के जन्म का स्थान हीरानगर का एक अस्पताल बताया गया है. लेकिन बाद में की गई जांच में पता चलता है कि इसमें कोई सच्चाई नहीं है. प्रखंड के चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि 23 अक्तूबर , 2002 को अस्पताल में आरोपी की मां के नाम पर कोई प्रसव दर्ज नहीं है.

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VIDEO: कठुआ मामले की पठानकोट में होगी सुनवाई.

पुलिस के हलफनामे में कहा गया है कि मामले में शामिल आरोपी की उम्र निर्धारित करने में लापरवाह रवैया अपनाने से इसमें न्याय नहीं हो पाएगा. (इनपुट भाषा से) 


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