केरल 'लव जेहाद' मामला : हादिया के हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कोर्ट ये नहीं कह सकता कि शादी सही है या गलत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर सरकार के पास ये जानकारी है कि किसी को तस्करी के जरिए विदेश भेजा जा रहा है तो सरकार के पास ये शक्ति है कि उसे विदेश जाने से रोका जा सके. लेकिन, दो बालिग व्यक्तियों द्वारा मर्जी से शादी का मामला कहां से आ गया?

केरल 'लव जेहाद' मामला : हादिया के हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कोर्ट ये नहीं कह सकता कि शादी सही है या गलत

हादिया (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

केरल में 'लव जिहाद' मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. हादिया उर्फ अखिला अशोकन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि वह मुसलमान है और मुसलमान के तौर पर ही अपनी जिंदगी जीना चाहती है. हादिया ने अपने हलफनामे में कहा है कि वह शाफीन जहां की पत्नी है, जिससे शादी करने के लिए उसने इस्लाम धर्म अपनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोर्ट ये नहीं कह सकता कि शादी सही है या गलत.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर सरकार के पास ये जानकारी है कि किसी को तस्करी के जरिए विदेश भेजा जा रहा है तो सरकार के पास ये शक्ति है कि उसे विदेश जाने से रोका जा सके. लेकिन, दो बालिग व्यक्तियों द्वारा मर्जी से शादी का मामला कहां से आ गया? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हदिया के हलफनामे में उन तथ्यों को नजरअंदाज किया जा सकता है जो शादी से संबंधित नहीं हैं लेकिन सवाल ये है कि आखिर हाईकोर्ट ने शादी को शून्य कैसे करार दिया? सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई 8 मार्च को करेगा. कोर्ट ने कहा कि क्या सहमति से की गई शादी की चलती- फिरती जांच कराई जा सकती है?

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वहीं एनआईए ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हादिया ने जो अपना जवाब दाखिल किया है उस पर उन्हें आपत्ति है क्योंकि NIA की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने फिर सवाल उठाये कि दो बालिग़ अगर आपसी सहमति से शादी करते हैं तो क्या हाई कोर्ट शादी को रद्द कर सकता है. वही हादिया के पिता अशोकन की तरफ से कहा गया कि आर्टिकल 226के तहत हाई कोर्ट के पास अधिकार है कि शादी को रद्द कर सकता है. ऐसे सबूत भी मौजूद हैं जो इस मामले में आईएस की भूमिका की ओर इशारा करते हैं.

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दरसअल पिछले साल 27 नवंबर को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की बेंच के समक्ष हादिया ने कहा था कि वह आजादी के साथ अपनी जिंदगी जीना चाहती है. सुप्रीम कोर्ट ने हदिया को उसके अभिभावकों के संरक्षण से मुक्त करते हुए उसे कॉलेज में पढ़ाई जारी रखने का निर्देश दिया था. हालांकि हदिया ने अनुरोध किया था कि उसे उसके पति शफीन जहां के साथ जाने दिया जाए.