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CPM के दफ्तर पर आधी रात में मारा छापा तो IPS के खिलाफ CM ने बैठाई जांच, मिली क्लीनचिट

आईपीएस जॉन ने 24 जनवरी की मध्य रात्रि को एक मामले में कुछ आरोपियों की तलाश में माकपा के जिला कार्यालय पर छापा मारा था.

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CPM के दफ्तर पर आधी रात में मारा छापा तो IPS के खिलाफ CM ने बैठाई जांच, मिली क्लीनचिट

आईपीएस अधिकारी चित्रा टेरेसा जॉन.

खास बातें

  1. CPM के दफ्तर पर आधी रात मारा था छापा
  2. सीएम ने भी की थी आलोचना
  3. जांच में मिली क्लीनचिट
तिरुवनंतपुरम:

केरल (Kerala) की राजधानी तिरुवनंतपुरम में सत्तारूढ़ पार्टी सीपीएम (CPM)के दफ्तर पर छापा मारने पर एक महिला पुलिस अधिकारी को जांच का सामना करना पड़ा. छापेमारी को लेकर केरल के मुख्यमंत्रीपिनराई विजयन (Pinarayi Vijayan) ने भी अधिकारी चित्रा टेरेसा जॉन (Chaitra Teresa John) की आलोचना की थी. सीएम ने कहा था कि कुछ निहित स्वार्थों की राजनीति में शामिल लोगों की 'छवि को बिगाड़ने' की प्रवृत्ति रहती है. इसके बाद राज्य सरकार ने युवा अधिकारी चित्रा टेरेसा जॉन के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किए थे. लेकिन विभागीय जांच में उन्हें क्लीनचिट मिल गई है.

एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांच में ऐसा कुछ भी नहीं मिला कि उन्होंने कुछ गलती की है. जांच में पाया गया कि पुलिस अधिकारी ने कानूनी ढांचे और मौजूदा नियमों के तहत कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाए थे.


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आईपीएस जॉन ने 24 जनवरी की मध्य रात्रि को एक मामले में कुछ आरोपियों की तलाश में माकपा के जिला कार्यालय पर छापा मारा था. जॉन के नेतृत्व में पुलिस दल माकपा की युवा इकाई डीवाईएफआई के कुछ नेताओं की तलाश में वहां पहुंचा था जो कथित तौर पर शहर के एक पुलिस थाने पर पथराव की घटना में शामिल थे. इसके बाद पार्टी की जिला इकाई के नेताओं की शिकायत पर जॉन के खिलाफ जांच के आदेश दिये गए. 

राज्य विधानसभा में इस मुद्दे पर एक प्रतिवेदन का जवाब देते हुए विजयन ने कहा कि आम तौर पर राज्य में पार्टी कार्यालयों के दफ्तरों पर ऐसी छापेमारी नहीं की जाती. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में यह जरूरी है कि पार्टी कार्यालयों के सुचारू कामकाज के लिये अनुकूल माहौल बनाया जाए और ऐसे संस्थानों की सुरक्षा को सामान्य रूप से पुलिस के कर्तव्य के तौर पर देखा जाता है. 

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विजयन ने कहा था, कुछ निहित स्वार्थों का राजनीति में शामिल लोगों की छवि खराब करने की तरफ झुकाव होता है और ऐसे मौके आए हैं जब कुछ लोग इन प्रवृत्तियों का शिकार हुए हैं. एक लोकतांत्रिक समाज ऐसे नजरिये को दुरुस्त करके ही आगे बढ़ सकता है.'

(इनपुट- पीटीआई से भी)

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(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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