यह ख़बर 06 जून, 2012 को प्रकाशित हुई थी

स्वर्ण मंदिर परिसर में गूंजे खालिस्तान के लिए नारे

स्वर्ण मंदिर परिसर में गूंजे खालिस्तान के लिए नारे

खास बातें

  • ऑपरेशन ब्लू स्टार की 28वीं वर्षगांठ पर बुधवार को हुए एक कार्यक्रम के दौरान स्वर्ण मंदिर परिसर में कुछ लोगों ने अकाल तख्त के प्रमुख की ओर से जारी निर्देशों का उल्लंघन करते हुए खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाए।
अमृतसर:

ऑपरेशन ब्लू स्टार की 28वीं वर्षगांठ पर बुधवार को हुए एक कार्यक्रम के दौरान स्वर्ण मंदिर परिसर में कुछ लोगों ने अकाल तख्त के प्रमुख की ओर से जारी निर्देशों का उल्लंघन करते हुए खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाए।

स्वर्ण मंदिर परिसर में हुए इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से जून, 1984 में आपरेशन ब्लू स्टार के दौरान मारे गए लोगों के सम्मान में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा अकाल तख्त के निकट एक स्मारक की स्थापना पर जोर दिया गया।

ज्ञात हो कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान सेना ने अतिवादी सिख नेता जरनैल सिंह भिंडरांवाले के नेतृत्व में हथियारों से लैस उग्रवादियों के हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) परिसर में छिपे होने की सूचना पर व्यापक अभियान चलाया था जिसमें भक्तों, उग्रवादियों व सुरक्षाकर्मियों सहित बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे और अकाल तख्त बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था जिसे बाद में फिर से बनाया गया।

कार्यक्रम में अकाल तख्त के जत्थेदार गुरबचन सिंह ने सिखों के लिए संदेश पढ़ा। उन्होंने कहा कि सिख अपने धर्म के इतिहास के इस काले अध्याय को कभी नहीं भूल सकते।

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इस अवसर पर बब्बर खालसा इंटरनेशन (बीकेआई) के उग्रवादी बलवंत सिंह राजोआना की बहन कमलदीप कौर को सम्मानित किया गया। राजोआना को पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 31 अगस्त, 1995 को हत्या करने के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई गई है।

एसजीपीसी के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने मीडिया से कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान मारे गए लोगों के सम्मान में स्मारक बनाना न्यायसंगत है। अतिवादी सिख संगठनों ने इस दिन को जातिसंहार दिवस के रूप में मनाया।