यह ख़बर 03 फ़रवरी, 2013 को प्रकाशित हुई थी

खुशवंत सिंह ने 98वें जन्मदिन पर नई किताब पेश की

खुशवंत सिंह ने 98वें जन्मदिन पर नई किताब पेश की

खास बातें

  • लेखक खुशवंत सिंह अपने 98वें जन्मदिन पर एक नई किताब लेकर आए हैं, जिसमें उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन के दौरान मिले अनुभव, राजनीति, भारत के भविष्य और उनके लिए धर्म के मायने क्या हैं, इसके बारे में चर्चा की है।
नई दिल्ली:

लेखक खुशवंत सिंह अपने 98वें जन्मदिन पर एक नई किताब लेकर आए हैं, जिसमें उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन के दौरान मिले अनुभव, राजनीति, भारत के भविष्य और उनके लिए धर्म के मायने क्या हैं, इसके बारे में चर्चा की है।

अपने निवास पर शनिवार को जन्मदिन के मौके पर आयोजित एक निजी समारोह में खुशवंत ने अपनी नई किताब 'खुशवंतनामा: दी लेसंस ऑफ माई लाइफ' की पहली प्रति प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी एवं अपनी मित्र गुरशरण कौर को भेंट की।

इस किताब को पेंग्विन बुक्स इंडिया ने प्रकाशित किया है और यह अगले हफ्ते दुकानों में उपलब्ध होगी। खुशवंत ने इस किताब में विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे हैं। पेंग्विन इंडिया में विपणन एवं व्यवसायिक संचार के उपाध्यक्ष हेमाली सोढ़ी ने कहा, पेंग्विन बुक्स इंडिया का खुशवंत सिंह के साथ लंबा और अद्भुत संबंध रहा है।

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उन्होंने कई पीढ़ी के लेखकों को आनंदित किया है और हमें उनके 98वें जन्मदिन के मौके पर यह किताब पेश कर अपार गर्व है। खुशवंत का जन्म 2 फरवरी को हडाली (अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित) में हुआ। वह 'योजना' के संस्थापक संपादक होने के साथ ही 'इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया', 'नेशनल हेराल्ड' और 'हिन्दुस्तान टाइम्स' के संपादक रहे।

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उन्होंने 'पाकिस्तान मेल', 'दिल्ली' और 'ए हिस्ट्री ऑफ सिख' जैसी किताबें लिखीं। वह 1980 से 1986 तक संसद सदस्य रहे। 1974 में उन्हें पद्म भूषण मिला, लेकिन 1984 में स्वर्ण मंदिर में सेना की कार्रवाई के विरोध में उन्होंने यह सम्मान लौटा दिया। वर्ष 2007 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।