NDTV Khabar

जानें मोदी सरकार के मंत्री ने क्यों कहा- मैं मोटी चमड़ी का इंसान हूं

अल्फोंस ने कहा, चाहे मेरा कितना ही उपहास उड़ाया जाए, मुझे शौचालय बनाने की जरूरत के बारे में बोलने से नहीं रोका जा सकता, क्योंकि देश की 67 प्रतिशत आबादी के पास शौचालय नहीं है.

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
जानें मोदी सरकार के मंत्री ने क्यों कहा- मैं मोटी चमड़ी का इंसान हूं

केंद्रीय मंत्री केजे अल्फोंस की फाइल फोटो

खास बातें

  1. चाहे मेरा कितना ही उपहास उड़ाया जाए मैं बोलता रहूंगा
  2. देश की 67 फीसदी आबादी के पास टॉयलेट नहीं
  3. मैं लोगों को हंसाने में सक्षम हूं तो ठीक
तिरुवनंतपुरम: केंद्रीय मंत्री बनने के बाद 'टॉयलेट' पर दिए अपने बयान पर भारी आलोचना झेल रहे केजे अल्फोंस ने कहा कि वह 'टॉयलेट' के बारे में लगातार बोलते रहेंगे. अल्फोंस ने कहा, चाहे मेरा कितना ही उपहास उड़ाया जाए, मुझे शौचालय बनाने की जरूरत के बारे में बोलने से नहीं रोका जा सकता, क्योंकि देश की 67 प्रतिशत आबादी के पास शौचालय नहीं है. मेरे प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) का सपना है कि लोगों को भोजन, घर और एक शौचालय मिले और यह हमारे लिए एक बड़ा मुद्दा है. अगर इस मुद्दे पर मेरा उपहास भी उड़ाया जाता है तो मुझे मलाल नहीं है.

केंद्रीय मंत्री अल्फोंस के बयान पर शिवसेना ने कहा, यह गरीबों के चेहरे पर थूकने जैसी बात

अल्फोंस एक पूर्व नौकरशाह और वामपंथी विधायक (2006-11) रह चुके हैं, 2011 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हुए और तीन हफ्ते पहले केंद्रीय मंत्री के रूप में पदोन्नत किए गए. उन्होंने सोमवार को राज्य की राजधानी में मीडिया के साथ बातचीत में अपनी बात रखी.

इंडिया गेट पर सफाई करने पहुंचे केंद्रीय मंत्री अल्फोंस को नहीं मिला कचरा, वॉलिंटियर्स ने किया इंतजाम

केंद्रीय पर्यटन, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने संवाददाताओं से कहा, मैं व्हाट्सएप नहीं देखता हूं और अगर मैं लोगों को हंसाने में सक्षम हूं, तो यह ठीक है, मैं एक मोटी चमड़ी वाला व्यक्ति हूं. ओडिशा में मजाक बनाने के एक बुरे अनुभव के बाद, अब मुझे मजाक उड़ाने में डर लगता है.

टिप्पणियां
पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा की राय पर अल्फोंस ने कहा कि सभी जानते हैं कि उन्हें वित्त मंत्री अरुण जेटली पसंद नहीं हैं. अल्फोंस ने कहा, सिन्हा कुछ काम ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं, जैसा कि वह अब 80 साल के हो चुके हैं. उनके पास कुछ निजी एजेंडे हैं और इसलिए वे ऐसे वक्तव्य दे रहे हैं. चीजों को अपनी जगह बनाने के लिए समय की आवश्यकता है। चाहे वह विमुद्रीकरण हो या जीएसटी.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement