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केके मोहम्मद ने मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए किया सराहनीय काम, मिला पद्मश्री

नब्बे के दशक में जब केके मोहम्मद ने पुरातत्व विभाग के तमाम नाज नखरे सह कर बटेश्वरा के 200 मंदिरों के अवशेष के पास पहुंचे तब कोई नहीं कहता था कि गुप्त काल से लेकर गुर्जर प्रतिहार काल के 6 शताब्दी ये मंदिर फिर खड़े हो पाएंगे.

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केके मोहम्मद ने मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए किया सराहनीय काम, मिला पद्मश्री

के के मोहम्मद (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. केके मोहम्मद को पद्मश्री सम्मान का एलान
  2. बाबरी मस्जिद के नीचे मंदिर होने का किया था दावा
  3. खनन माफियाओं से लेकर निर्भय गुज्जर जैसे डाकूओं का किया सामना
नई दिल्ली:

शांत...सौम्य...धीमे बोलने वाले सांवले रंग और दरम्याने कद का एक ऐसा मुसलमान जिसने प्राचीन मंदिरों को सहेजने में अपनी पूरी उम्र लगा दी. पुरात्तव सर्वेंक्षण विभाग में उत्तर भारत के मुखिया के तौर पर 2012 में रिटायर हो चुके केके मोहम्मद का नाम जब जब आएगा तब तब बटेश्वेर के प्राचीन मंदिरों का जिक्र भी होगा. नब्बे के दशक में जब केके मोहम्मद ने पुरातत्व विभाग के तमाम नाज नखरे सह कर बटेश्वर के 200 मंदिरों के अवशेष के पास पहुंचे तब कोई नहीं कहता था कि गुप्त काल से लेकर गुर्जर प्रतिहार काल के 6 शताब्दी पुराने ये मंदिर फिर खड़े हो पाएंगे. लेकिन केके मोहम्मद ने पहले मुरैना के खनन माफियाओं से फिर निर्भय गुज्जर जैसे दुर्दांत डाकूओं से सामना करके बटेश्वर के 200 प्राचीन मंदिरों में से 60 मंदिर को उनके मूलरूप में खड़ा करके इतिहास को वर्तमान की दहलीज पर पहुंचा दिया. 

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अपने शानदार काम के लिए पद्मश्री से नवाजे गए केके मोहम्मद बताते हैं कि नब्बे के दशक में जब पहली बार वो बटेश्वर मंदिर पहुंचे तो मंदिर के बचे अवशेष पर लंबी मूंछ और हाथ में बंदूक लिए एक शख्श मिला. उसे जब पता चला कि वो इन मंदिरों का जीर्णोद्वार करने आए तो खुश हुआ. बाद में लोगों ने बताया कि ये दुर्दांत डाकू निर्भय गुज्जर था. डाकुओं और खनन माफियाओं के चलते मंदिर के जीर्णोद्वार का काम कोई करने को तैयार न था लेकिन केके मोहम्मद को अकेले काम करता देख लोगों का हौसला बढ़ा फिर इसका काम शुरु हुआ. 

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यही नहीं के के मुहम्मद ने छत्तीसगढ़ के जगदलपुर के पास दंतेवाड़ा जिले में बारसुअर और समलुर मंदिरों को भी संरक्षित किया. यह क्षेत्र इस क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों के गढ़ के रूप में जाना जाता है. साल 2003 में, के के मोहम्मद नक्सल कार्यकर्ताओं को समझने में सक्षम हुए और उनके सहयोग के साथ, मंदिरों को आज के वर्तमान राज्य में संरक्षित कर दिया. 

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तीन महीने पहले NDTV की ओर से बटेश्वर मंदिरों की प्राचीन श्रंखला पर जब खबर की तो एक नाम की सबसे ज्यादा चर्चा थी वो नाम था केके मोहम्मद. कई बार उनसे बात हुई लेकिन केरल में रहने की वजह से उनका इंटरव्यू नहीं कर सका.  केके मोहम्मद केरल के कॉलीकट के रहने वाले हैं वो पूर्व महानिदेशक पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग के बी बी लाल की टीम का अहम हिस्सा रहे हैं. केके मोहम्मद 1976 में बने उस टीम की हिस्सा भी रहे हैं जिसने राम जन्म भूमि संबंधी पुरातात्विक खुदाई भी की थी. हालांकि जब उन्होंने उस वक्त ये बयान दिया था कि अयोध्या में राम का आस्तित्व है. तो उन्हें विभागीय कार्रवाई का सामना भी करना पड़ा था. लेकिन केके मोहम्मद ने कहा कि झूठ बोलने के बजाए वो अपना फर्ज निभाते हुए मरना पसंद करेंगे. केके मोहम्मद को न तो लेफ्टिस्ट इतिहासकार पसंद करते हैं और न ही दक्षिणपंथी. 

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