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कूलभूषण जाधव आज की तारीख़ में कहां है, भारत को इसकी कोई जानकारी नहीं है

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कूलभूषण जाधव आज की तारीख़ में कहां है, भारत को इसकी कोई जानकारी नहीं है

कुलभूषण जाधव पर पाकिस्तान ने जासूसी का आरोप लगाया है

खास बातें

  1. भारत सरकार ने कहा है कि उन्हें जाधव के ठिकाने की जानकारी नहीं है
  2. कुलभूषण जाधव पर पाकिस्तान ने जासूसी का आरोप लगाया है
  3. जाधव एक भारतीय नागरिक हैं और नौसेना के रिटायर्ड अधिकारी हैं
नई दिल्ली: भारतीय नागरिक कुलभूषण सुधीर जाधव को पाकिस्‍तान ने रॉ का एजेंट होने के आरोप में फांसी की सजा सुनाई है. भारत सरकार ने कहा है कि उन्हें कुलभूषण के ठिकाने या उनकी हालत के बारे में कोई भी जानकारी नहीं है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा है कि 'हमें नहीं पता कि कुलभूषण जाधव कहां हैं और वह किस हालत में है. न ही पाकिस्तान ने इस बारे में हमसे जानकारी साझा की है.' बागले ने पाकिस्तान सैन्य अदालत के इस फैसले को बेबुनियाद, हास्यास्पद और कानून और न्याय का उल्लंघन करने वाला बताया है.

मंत्रालय ने उन खबरों को भी खारिज किया है जिसमें एक पाकिस्तानी सेना अधिकारी के गिरफ्तार किए जाने की बात कही जा रही थी. बागले ने कहा 'इस बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है इसलिए अदला-बदली जैसी किसी बात का तो सवाल ही नहीं उठता.'

केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा की भारत सरकार हर तरह की कोशिश करने में लगी हुई है ताकि कुलभूषण को वापस लाया जा सके. उन्होंने कहा कि भारत सरकार हर वो क़दम उठाएगी जिससे कुलभूषण को न्याय मिलेगा.

लेकिन भारत सरकार बार-बार इस बात पर ज़ोर दे रही है कि सरकार पिछले एक साल में 13 बार कॉन्सलर ऐक्सेस की दरखास्त पाकिस्तान को दे चुकी है, लेकिन एक बार भी उसे कुलभूषण से मिलने की मंज़ूरी नहीं मिली. उधर, पाकिस्तान सरकार तर्क दे रही है कि उसने कंडीशनल ऐक्सेस की बात भारत के सामने रखी थी लेकिन भारत सरकार ने उसे ठुकरा दिया था.

पाकिस्तान में भारत उच्चायोग से मिली जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान ने कभी भी भारत को कुलभूषण के बारे में जानकारी नहीं दी. कंडिशनल ऐक्सेस का कोई मतलब नहीं होता. विदेश मंत्रालय लगातार कुलभूषण  के परिवार के सम्पर्क में है. सरकार सेना कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है लेकिन इसके अलग-अलग पहलुओं पर विचार जारी है.

प्रधानमंत्री कार्यालय के अफ़सर ने एनडीटीवी को बताया कि भारत और पाकिस्तान के सप्रीम कोर्ट एक ही तरह से चलते हैं. वहां भारत अपील दायर नहीं कर सकता क्योंकि, भारत इस केस में पार्टी नहीं है. चूंकि भारत सरकार खुद कोर्ट नहीं जा सकती इसलिए अर्ज़ी उसके परिवार के लोगों द्वारा दायर की जाएगी. पाकिस्तान के मानवाधिकार संगठनों को भी मामले से जोड़ा जा रहा है, क्योंकि सप्रीम कोर्ट में बहस सिर्फ़ क़ानूनी पहलुओं को लेकर होगी ना कि सबूतों पर.

भारत  को यक़ीन है कि उसका पलड़ा सभी मामलों में भारी है और अगर पाकिस्तान का सप्रीम कोर्ट चाहेगा तो मामला एक दिन में ख़त्म हो जाएगा.

एनडीटीवी को मिली जानकारी के मुताबिक, दोनों देश अब इस बात पर सहमत हो गए है कि तनाव का स्तर बहुत ज़्यादा बढ़ गया है और इसे कम करने की ज़रूरत है. ऐसी भी ख़बर है कि दोनो देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सम्पर्क में हैं और जल्द हो दोनो के बीच आधिकारिक बात भी होगी.

माना जा रहा है कि भारत कुलभूषण का मुद्दा उठाएगा तो पाकिस्तान मोहम्मद हबीब का. हालांकि भारत का विदेश मंत्रालय हबीब के बारे में किसी भी तरह की जानकारी होने से इंकार कर रहा है.

उधर, कुलभूषण जाधव के साथ पाकिस्तान के सलूक को लेकर भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी उसे अलग-थलग करने की रणनीति बना रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि भारत ने इरान सरकार को भी सभी पहलुओं से अवगत करवाया है, क्योंकि कूलभूशन जब ग़ायब हुआ तब क़ानूनी रूप से वह इरान में काम कर रहा था.

भारत ने इस बात को भी फिर दोहराया है कि अगर कुलभूषण जाधव को फांसी दी गई तो यह एक पूर्व नियोजित हत्या होगी.



 


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