सोनिया की बैठक में पार्टी जनाधार में गिरावट के मसले पर 'उलझे' नेता, चुप्‍पी साधे रहे मनमोहन सिंह: सूत्र

पार्टी के इन युवा नेताओं ने कथित तौर पर कहा कि जो लोग पिछली यूपीए सरकार का हिस्सा थे, उन्हें कांग्रेस के जनाधार में तेजी से आई गिरावट की जिम्‍मेदारी लेनी चाहिए.

सोनिया की बैठक में पार्टी जनाधार में गिरावट के मसले पर 'उलझे' नेता, चुप्‍पी साधे रहे मनमोहन सिंह: सूत्र

युवा नेताओं ने राहुल गांधी को फिर पार्टी अध्‍यक्ष बनाने की मांग की

खास बातें

  • लोकप्रियता में गिरावट के लिए कांग्रेस की आखिरी सरकार को माना दोषी
  • राहुल गांधी को फिर से कांग्रेस अध्‍यक्ष बनाने की मांग उठी
  • नरेंद्र मोदी सरकार को 'घेरने' में नाकामी पर भी हुई चर्चा
नई दिल्ली:

कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) की ओर से पार्टी सांसदों (Congress MP) की गुरुवार को बुलाई गई बैठक में युवा नेताओं की ओर से काफी तर्क-वितर्क और आलोचना देखने को मिली. इन युवा नेताओं ने लोकप्रियता में आई गिरावट के लिए कांग्रेस की आखिरी सरकार (Party's last government) को दोषी माना. मनमोहन सिंह सरकार का हिस्सा रहे इन पूर्व केंद्रीय मंत्रियों की पहचान 'राहुल गांधी टीम' के अहम सदस्‍यों के रूप में पहचान है. बैठक में इनके मुखर होने से एक बार फिर कांग्रेस के भीतर की दरार उजागर हो गई है. कांग्रेस पार्टी ने 2014 में भाजपा की सत्ता खो दी थी, बाद में 2019 के आम चुनाव में भी उसे करारी हार का सामना करना पड़ा. 

पार्टी के इन युवा नेताओं ने कथित तौर पर कहा कि जो लोग पिछली यूपीए सरकार का हिस्सा थे, उन्हें कांग्रेस के जनाधार में तेजी से आई गिरावट की जिम्‍मेदारी लेनी चाहिए. इनमें से कुछ ने कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में राहुल गांधी की फिर से वापसी की मांग भी उठाई और कहा कि पार्टी प्रमुख पद पर किसी और उम्मीदवार पर सहमति नहीं थी. सूत्रों के मुताबिक, दो बार के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस दौरान खामोश रहे और उन्‍होंने एक शब्द भी नहीं कहा. पीएम के तौर पर मनमोहन सिंह के दूसरा कार्यकाल भ्रष्टाचार और पॉलिसी पेरालिसिस (नीतिगत जड़ता) के आरोपों के बीच खत्‍म हुआ था. पिछले साल पार्टी के लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस के शीर्ष पद को छोड़ दिया था और उनकी मां सोनिया गांधी ने अंतरिम अध्‍यक्ष के रूप में पद संभाला. उन्‍होंने नए अध्‍यक्ष की नियुक्ति तक यह पद संभाला था लेकिन एक साल गुजरने के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है.

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कथित तौर पर इस 'खींचतान' की शुरुआत कांग्रेस के कुछ वरिष्‍ठ राज्यसभा सदस्‍यों ने की और आर्थिक मंदी, कोरोना वायरस पर नियंत्रण के लिए उपायों और चीन के साथ विवाद जैसे मुद्दों पर नरेंद्र मोदी की सरकार को घेरने में पार्टी की नाकामी पर निराशा जताई. वरिष्ठ नेताओं ने पीएम मोदी के समर्थन/जनाधार को लेकर कांग्रेस के आकलन को बहुत कमजोर और अव्यवस्थित बताया. उन्होंने आत्‍मवलोकन और विचार-विमर्श की प्रक्रिया को बढ़ाने पर जोर दिया.45 वर्षीय राजीव सातव ने कथित तौर पर कहा कि कांग्रेस की 2014 की हार के बाद "पूर्ण आत्मनिरीक्षण" की आवश्यकता है.सूत्रों के अनुसार,  पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा, "हमें पूर्ण आत्मनिरीक्षण की जरूरत है. हां..बीजेपी सरकार ने बुरा प्रदर्शन किया है और उस पर हमला करने की जरूरत है, लेकिन हमें खुद को देखना होगा और हमने कैसा प्रदर्शन किया है, इस पर कोई बहस नहीं हुई है.पार्टी के भीतर और हमें विश्लेषण करने की जरूरत है कि नेतृत्व क्यों विफल रहा है.”

पार्टी के वरिष्ठ सदस्‍यों ने चर्चा और विचार-विमर्श की कमी पर सवाल उठाए. राजीव सातव ने टिप्पणी की कि यह वरिष्‍ठ और युवा नेताओं के बीच 'वार' जैसा मामला नहीं है.उन्होंने कहा, "हमें इस बात की विश्लेषण करने की जरूरत है कि कांग्रेस ने यूपीए के दौर में कैसा प्रदर्शन किया, मंत्री आखिर पार्टी कार्यकर्ताओं से क्यों नहीं मिले और वास्तविकता से अनजान क्‍यों रहेण्‍ महाराष्ट्र और दिल्ली में पार्टी विफल क्यों रही है." सातव ने उस समय राहुल की वापसी का आह्वान किया जब कुछ युवा नेता पार्टी से दूरी बना रहे हैं.

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