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बाबरी केस पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लालकृष्ण आडवाणी ने मुरली मनोहर जोशी से मुलाकात की

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बाबरी केस पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लालकृष्ण आडवाणी ने मुरली मनोहर जोशी से मुलाकात की

वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी का फाइल फोटो...

खास बातें

  1. दोनों वरिष्‍ठ नेताओं की यह मुलाकात SC के आदेश के कुछ घंटों बाद हुई
  2. उमा भारती ने ऐलान किया था कि वह कल अयोध्‍या की यात्रा करेंगी
  3. उच्चतम न्यायालय ने मध्यकालीन युग के ढांचे को गिराने को अपराध करार दिया है
नई दिल्‍ली: वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी ने बुधवार शाम को मुलाकात की. दोनों वरिष्‍ठ नेताओं की यह मुलाकात सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के कुछ घंटों बाद हुई, जिसमें उसने कहा है कि 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद मस्जिद के विध्वंस में कथित भूमिका के लिए उन पर आपराधिक साजिश के तहत मुकदमा चलाया जाएगा. उनके साथ, केंद्रीय मंत्री उमा भारती और विनय कटियार जैसे पार्टी के अन्‍य वरिष्ठ नेताओं को भी अब गंभीर आरोपों का सामना करना होगा.

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने ऐलान किया था कि वह कल अयोध्‍या की यात्रा करेंगी, लेकिन शाम को भी भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह ने उनसे शाम को अपनी यात्रा रद्द करने को कह दिया. उनके इस कार्यक्रम में बदलाव की वजह एमसीडी चुनावों में उनका प्रचार करना बताया गया. लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि शीर्ष अदालत के आदेश के बाद, भाजपा नेता सतर्क और संयम में रहना चाहते हैं.

उमा भारती ने कहा है कि वह राम मंदिर के लिए जीवन का बलिदान करने को तैयार हैं. उन्‍हें अयोध्या आंदोलन का हिस्सा होने पर कोई अफसोस नहीं है.

केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने कहा है कि ''आज मैं श्री रामलला जी एवं हनुमानगढ़ी को मत्था टेकने एवं आभार व्यक्त करने जा रही थी. अयोध्या मेरे लिए राजनीति का नहीं बल्कि आस्था का विषय है. किन्तु मीडिया की हलचल से मुझे लगा कि मेरा अयोध्या जाना व्यक्तिगत न होकर पॉलिटिकल इवेंट हो सकता है. इसलिए मैं कल अयोध्या न जाकर कुछ समय बाद जाऊंगी. चूंकि आज एमसीडी चुनावों में मेरी कई जनसभाएं पूर्व घोषित हैं, उन्हें संबोधित करूंगी.''
 
बताया जाता है कि आज बीजेपी की कोर ग्रुप की बैठक हुई. प्रधानमंत्री मोदी के घर पर हुई इस बैठक के बाद उमा भारती ने अयोध्या न जाने का फैसला लिया.


उल्‍लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने मध्यकालीन युग के ढांचे को गिराने को 'अपराध' करार दिया और कहा कि इसने 'संविधान के धर्मनिरपेक्ष ढांचे' को हिला दिया. इसने वीवीआईपी आरोपियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र के आरोपों को बहाल करने की सीबीआई की याचिका को मंजूरी दे दी, जिसके राजनीतिक प्रभाव हो सकते हैं.. खासकर आडवाणी के खिलाफ जो राष्ट्रपति पद की दौड़ में सबसे आगे हैं.


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