NDTV Khabar

लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की करारी हार पर पार्टी में मंथन जारी

मुलायम ने चुनाव से पहले ही मायावती के साथ गठबंधन के अखिलेश के फैसले पर नाराजगी जाहिर की थी. उन्होंने मायावती को 38 सीटें देने पर कहा था कि आधी सीटें तो पहले ही हार गए. लेकिन अखिलेश ने खुले तौर पर कहा था कि यदि उन्हें दो कदम पीछे भी हटना पड़ेगा तो भी वह गठबंधन करेंगे, क्योंकि गोरखुपर, फूलपुर और कैराना सीटों के लिए हुए उपचुनाव में उन्होंने गठबंधन का मीठा स्वाद चख लिया था.

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की करारी हार पर पार्टी में मंथन जारी

लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को 5 सीटें मिली हैं. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) को महज पांच सीटें मिली हैं. पिछले चुनाव में भी सपा को पांच सीटें मिली थीं. पिछले चुनाव में सपा अकेले चुनाव लड़ी थी. इस बार उसका दो दलों -बहुजन समाज पार्टी (बसपा), राष्ट्रीय लोकदल (रालोद)- के साथ गठबंधन था. इस गठबंधन को अपराजेय माना जा रहा था. लेकिन ढाक के वही तीन पात. गठबंधन में बसपा को भले ही लाभ हुआ. उसने 10 सीटें जीत लीं, लेकिन बाकी दो दल जहां के तहां रह गए. मुलायम परिवार के तीन सदस्य चुनाव हार गए. रालोद अपने हिस्से की तीनों सीटें हार गया. इस चुनाव में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव क्रमश: आजमगढ़ और मैनपुरी से चुनाव जीतने में कामयाब रहे. मगर उनके परिवार के तीन अन्य सदस्यों को हार का सामना करना पड़ा. अखिलेश की पत्नी डिम्पल यादव को कन्नौज सीट पर भाजपा प्रत्याशी सुब्रत पाठक के हाथों 12,353 मतों से परास्त होना पड़ा. इसके अलावा फिरोजाबाद सीट से अखिलेश के चचेरे भाई अक्षय यादव और बदायूं सीट से एक अन्य चचेरे भाई धर्मेन्द्र यादव को अपनी-अपनी सीट गंवानी पड़ी. मैनपुरी में मुलायम सिंह यादव की जीत का अंतर 2014 के मुकाबले केवल एक-चौथाई रह गया.

NDA के पास अगले साल तक राज्यसभा में हो जाएगा बहुमत, तीन तलाक, NRC पर मोदी सरकार की राह होगी आसान


मुलायम सिंह यादव ने चुनाव से पहले ही मायावती के साथ गठबंधन के अखिलेश के फैसले पर नाराजगी जाहिर की थी. उन्होंने मायावती को 38 सीटें देने पर कहा था कि आधी सीटें तो पहले ही हार गए. लेकिन अखिलेश ने खुले तौर पर कहा था कि यदि उन्हें दो कदम पीछे भी हटना पड़ेगा तो भी वह गठबंधन करेंगे, क्योंकि गोरखुपर, फूलपुर और कैराना सीटों के लिए हुए उपचुनाव में उन्होंने गठबंधन का मीठा स्वाद चख लिया था.

नरेंद्र मोदी के आगे महागठबंधन और राहुल-प्रियंका की जोड़ी फेल!

हालांकि इसका एक पहलू यह भी है कि यदि गठबंधन न हुआ होता तो इस बार सपा को शायद पांच सीटें भी नहीं मिल पातीं. ज्यादा संभव था कि मुलायम और अखिलेश भी चुनाव हार जाते. इस लिहाज से अखिलेश के निर्णय को सही माना जा सकता है. लेकिन यहां तो सवाल इस बात का है कि बसपा इस चुनाव में शून्य से 10 सीटों पर पहुंच गई, मगर सपा को गठबंधन का वह लाभ क्यों नहीं मिला, जो बसपा को मिला. इस सवाल के दो जवाब हैं. एक तो सपा का पारिवारिक कलह इसका एक कारण है. 

टिप्पणियां

पार्टी के ऊपर पुत्र हित को रखा- राहुल गांधी​

इनपुट : आईएनएस



NDTV.in पर विधानसभा चुनाव 2019 (Assembly Elections 2019) के तहत हरियाणा (Haryana) एवं महाराष्ट्र (Maharashtra) में होने जा रहे चुनाव से जुड़ी ताज़ातरीन ख़बरें (Election News in Hindi), LIVE TV कवरेज, वीडियो, फोटो गैलरी तथा अन्य हिन्दी अपडेट (Hindi News) हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


Advertisement