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गोरक्षा के नाम पर हत्या करना हिंदुत्व के खिलाफ है : शिवसेना

भाजपा शासित झारखंड, हरियाणा और उत्‍तर प्रदेश समेत कई राज्यों में गोरक्षा के नाम पर लोगों को पीट-पीट कर मार डालने की कई घटनाएं सामने आई हैं जिनके कारण विरोध प्रदर्शन हुए हैं.

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गोरक्षा के नाम पर हत्या करना हिंदुत्व के खिलाफ है : शिवसेना

फाइल फोटो

खास बातें

  1. मुखपत्र सामना में पार्टी ने रखे विचार
  2. सरकार से गो रक्षा संबंधी राष्‍ट्रीय नीति बनाने को कहा
  3. हाल में गोरक्षा के नाम पर लोगों को पीट-पीट कर मार डालने की घटनाएं हुई हैं
मुंबई:

शिवसेना ने गोरक्षा के नाम पर लोगों की जान लिए जाने को हिंदुत्व के खिलाफ बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मंगलवार को अपील करते हुए कहा कि वह गोमांस पर एक राष्ट्रीय नीति पेश करें. भाजपा शासित झारखंड, हरियाणा और उत्‍तर प्रदेश समेत कई राज्यों में गोरक्षा के नाम पर लोगों को पीट-पीट कर मार डालने की कई घटनाएं सामने आई हैं जिनके कारण विरोध प्रदर्शन हुए हैं. शिवसेना के मुखपत्र सामना में छपे एक संपादकीय में कहा गया, ''गोमांस का मामला खाने की आदतों, कारोबार एवं रोजगार से जुड़ा है, इसलिए इस मामले पर एक राष्ट्रीय नीति होनी चाहिए.'' पार्टी ने कहा, ''गोरक्षा करने वाले लोग कल तक हिंदू थे लेकिन वे आज हत्यारे बन गए हैं.''

मोदी ने गोरक्षा के नाम पर लोगों की हत्या करने वाले स्वयंभू गोरक्षकों को पिछले सप्ताह एक कड़ा संदेश दिया था कि गाय की रक्षा के नाम पर लोगों की हत्या करना स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने चेतावनी दी थी कि किसी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है. शिवसेना ने कहा, ''हम इस मामले पर प्रधानमंत्री के अपनाए रख का स्वागत करते हैं. किसी को भी गोरक्षा के नाम पर कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं. लोगों की हत्या करना हिंदुत्व के सिद्धांत के विपरीत है.''


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समाचार पत्र में कहा गया है, ''हम हिंदुत्व को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने के लिए उनका (मोदी) धन्यवाद करते हैं. उन्हें अब गोमांस पर एक राष्ट्रीय नीति पेश करनी चाहिए ताकि तनाव कम हो सके.'' गोहत्या या गोमांस खाने के संदिग्धों की लोगों की भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या करने के मामलों के कारण आलोचनाएं झेल रहे भाजपा प्रमुख अमित शाह ने हाल में इस प्रकार की घटनाओं को ''गंभीर'' करार दिया था लेकिन उन्होंने दावा किया था कि भीड़ द्वारा हत्या की घटनाएं राजग सरकार के तीन साल के कार्यकाल की तुलना में पहले की सरकारों में अधिक हुई थीं.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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