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राजनीति में सामाजिक सरोकार के झंडाबरदार थे एम करुणानिधि

पचास साल तक डीएमके की कमान संभाले रहे करुणानिधि पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे, द्रविड़ आंदोलन से राजनीति में पदार्पण किया था

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राजनीति में सामाजिक सरोकार के झंडाबरदार थे एम करुणानिधि

एम करुणानिधि (फाइल फोटो).

खास बातें

  1. हिंदी के विरोध में प्रदर्शन से करुणानिधि की राजनीति में मजबूत पकड़ बनी
  2. सन 1957 में कुलिथालाई विधानसभा क्षेत्र से पहली बार एमएलए चुने गए थे
  3. अपनी भागीदारी वाले हर चुनाव में अपनी सीट जीतने का रिकॉर्ड बनाया
नई दिल्ली: तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और राजनीतिक दल द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (डीएमके) के प्रमुख करुणानिधि का मंगलवार को निधन हो गया. उन्होंने तीन जून को अपना 94वां जन्मदिन मनाया था. इस नेता के बराबर राजनीतिक कैरियर वाले नेता देश में गिने-चुने ही हुए. उन्होंने 50 साल पहले डीएमके की कमान संभाली थी जो कि अंतिम सांस तक उनके हाथ में रही. द्रविड़ आंदोलन से राजनीति में आने वाले करुणानिधि समाजवादी विचारों के प्रणेता थे. उनके सामाजिक सरोकारों ने ही उन्हें तमिलनाडु में जन-जन का नेता बनाया था.  

डीएमके के संस्थापक सीएन अन्नादुरई थे. सन 1969 में उनकी मौत के बाद करुणानिधि इसके नेता बने. करुणानिधि पांच बार 1969 से 71, 1971 से 76, 1989 से 91, 1996 से 2001 और 2006 से 2011 तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे.

हिंदी के विरोध में प्रदर्शन से करुणानिधि की तमिल राजनीति में मजबूत पकड़ बनी थी. औद्योगिक नगर कल्लाकुडी में विरोध प्रदर्शन के दौरान करुणानिधि और उनके साथियों ने रेलवे स्टेशन पर लिखा उसका हिंदी नाम मिटा दिया था और पटरियों पर लेटकर ट्रेनें रोकी थीं. इस विरोध प्रदर्शन में दो लोगों की मौत हो गई थी और करुणानिधि को गिरफ्तार कर लिया गया था. इस विरोध प्रदर्शन से उन्हें काफी प्रसिद्धि हासिल हुई थी.

एम करुणानिधि सन 1957 में तमिलनाडु विधानसभा के लिए तिरुचिरापल्ली जिले के कुलिथालाई विधानसभा क्षेत्र से पहली बार चुने गए थे. वे सन 1961 में डीएमके के कोषाध्यक्ष बनाए गए. वे साल 1962 में विधानसभा में विपक्ष के उपनेता बन गए. सन 1967 में डीएमके सत्ता में आई तो उन्हें सार्वजनिक कार्य मंत्री बनाया गया. सन 1969 में अन्नादुरई का निधन होने पर करुणानिधि को मुख्यमंत्री चुना गया था.

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ईसाई वेल्लालर समुदाय के करुणानिधि ने अपने दीर्घ राजनीतिक करियर में अपनी भागीदारी वाले हर चुनाव में अपनी सीट जीतने का रिकॉर्ड बनाया. साल  2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने तमिलनाडु और पुदुचेरी में डीएमके के नेतृत्व वाले डीपीए गठबंधन (यूपीए और वामपंथी दल) का नेतृत्व किया था और लोकसभा की सभी 40 सीटें जीत ली थीं. उन्होंने मई 2006 में हुए विधानसभा चुनाव में अपनी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी जे जयललिता को हराया था और मुख्यमंत्री बने थे. साल 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने डीएमके की सीटों की संख्या बढ़ा ली थी और उसे 16 से 18 कर लिया था. तमिलनाडु और पुदुचेरी में यूपीए का नेतृत्व कर बहुत छोटे गठबंधन के बावजूद 28 सीटें हासिल की थीं. पांच बार मुख्यमंत्री और 12 दफा विधानसभा सदस्य रहे करुणानिधि राज्य में अब समाप्त हो चुकी विधान परिषद के सदस्य भी रहे थे.

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करुणानिधि ने द्रविड़ आंदोलन के माध्यम से राजनीति की सीढ़ियां चढ़ना शुरू किया था. वे समाजवादी और बौद्धिक आदर्शों को प्रोत्साहित करने वाली ऐतिहासिक व सुधारवादी कथाएं लिखने वाले रचनाकार के रूप में मशहूर हुए. पटकथा लेखक के रूप में तमिल सिनेमा जगत की वे जानीमानी हस्ती रहे थे. समाज सुधार करुणानिधि के लेखन में होता था जो उनकी फिल्मों में भी प्रतिबिंबित होता था. उनकी रचनाओं में विधवा पुनर्विवाह, अस्पृश्यता का विरोध, जमींदारी प्रथा का विरोध और धार्मिक पाखंडों का विरोध दिखाई देता है.

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एम करुणानिधि यानी कि मुत्तुवेल करुणानिधि का जन्म 3 जून 1924 को हुआ था. तिरुवरूर के तिरुकुवालाई में जन्मे करुणानिधि के पिता मुथूवेल तथा माता अंजुगम थीं. ईसाई वेलार समुदाय के करुणानिधि के पूर्वज तिरुवरूर के निवासी थे. करुणानिधि ने तीन विवाह किए थे. उनकी पत्नियों में से पद्मावती का देहांत हो चुका है. अन्य दो पत्नियां दयालु और रजती हैं. उनके चार बेटे और दो बेटियां हैं. बेटों में एमके मुथू को पद्मावती ने जन्म दिया और दयालु  की संतानें एमके अलागिरी, एमके स्टालिन, एमके तमिलरासू और बेटी सेल्वी हैं. उनकी दूसरी बेटी कनिमोई रजति की संतान हैं.

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VIDEO : अन्नादुरई के बाद संभाली विरासत

करुणानिधि रोज योगाभ्यास करते थे. उन्होंने अपना मकान दान कर दिया था. उनकी इच्छा के मुताबिक उनकी मौत के बाद उनके घर को गरीबों के लिए अस्पताल में तब्दील कर दिया जाएगा.


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