मध्यप्रदेश उपचुनाव: ग्वालियर चंबल क्षेत्र में बीजेपी की एक म्यान में दो तलवार

MP Bypolls 2020: ग्वालियर चंबल क्षेत्र की राजमाता विजयाराजे सिंधिया की राजनीतिक विरासत का उत्तराधिकारी अब कौन? बेटी यशोधरा राजे या पोते ज्योतिरादित्य?

मध्यप्रदेश उपचुनाव: ग्वालियर चंबल क्षेत्र में बीजेपी की एक म्यान में दो तलवार

ज्योतिरादित्य सिंधिया (फाइल फोटो).

शिवपुरी:

MP Bypolls 2020: मध्यप्रदेश में वोटिंग तीन नवम्बर को होना है और यह साधारण उपचुनाव नहीं है.  इससे भाजपा के भी नए समीकरण मध्यप्रदेश में तय होंगे. ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) की भाजपा (BJP) में एंट्री के बाद नेताओं ने तो फिलहाल एक मंच अपना लिया है लेकिन जमीन पर भाजपा और कांग्रेस (Congress) से आए भाजपा में क्या समीकरण है? या फिर सिंधिया के नाम पर ही चुनाव हो रहा है? सवाल यह भी है कि ग्वालियर चंबल क्षेत्र की राजमाता विजयाराजे सिंधिया की राजनीतिक विरासत का उत्तराधिकारी अब कौन है? उनकी बेटी यशोधरा राजे (Yashodhara Raje) या उनके पोते ज्योतिरादित्य सिंधिया?    

यशोधरा राजे सिंधिया, सिंधिया परिवार की बेटी हैं. राजमाता विजयराजे सिंधिया की राजनीतिक विरासत ग्वालियर चम्बल क्षेत्र अब तक उनके हाथों में था. लेकिन अब कांग्रेस छोड़कर सिंधिया परिवार के ज्योतिरादित्य सिंधिया भी भाजपा में आ गए हैं. यशोधरा राजे अपने भतीजे के लिए चुनाव प्रचार कर रही हैं लेकिन बदलते राजनीतिक समीकरणों में तालमेल बिठाना इतना आसान नहीं है. 

मध्यप्रदेश सरकार की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने कहा कि "बड़ी चुनौती थी पहले, लेकिन टारगेट एक ही है. कांग्रेस को पता चल गया है, हमारा कैसा डिसिप्लिन है. पहले अटपटा लगा था लेकिन सरकार भी तो इन्हीं की वजह से बनी है."

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दोनों अपने आप में कद्दावर नेता हैं और दोनों का राजनीतिक क्षेत्र भी एक ही है. बुआ-भतीजा तो भाजपा के लिए प्रचार कर रहे हैं लेकिन ज़मीन पर कार्यकर्ता भी एकजुट हो पाए हैं या नहीं? एक म्यान में दो तलवारों को रखना इतना आसान नहीं है. ज्योतिरादित्य सिंधिया से पूछे गए सवाल कि पहले एक-दूसरे के सामने चुनाव लड़ते थे. अब एक म्यान में दो तलवार? उन्होंने कहा ''एक म्यान में एक ही तलवार है, भाजपा एक है."

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इस क्षेत्र में अब भी सिंधिया नाम का बोलबाला है. माधवराव सिंधिया और राजमाता विजयराजे सिंधिया की राजनीतिक विरासत अब भी यहां मायने रखती है. बीजेपी के उम्मीदवार सुरेश राटखेला ने कहा कि "2018 में में कांग्रेस में था. हम महाराज के साथ हैं. अपने घर में विलय हुआ है." लेकिन ये राजनीतिक समीकरण चुनाव के बाद भी क़ायम रहेंगे? असली परीक्षा तब होगी.