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ग्वालियर में गोडसे का मंदिर बनाए जाने को बीजेपी ने अभिव्यक्ति की आजादी कहा

कांग्रेस ने राजधानी भोपाल सहित मध्यप्रदेश में कई स्थानों पर महात्मा गांधी की मूर्तियों को धोया, फूल माला पहनाई

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ग्वालियर में गोडसे का मंदिर बनाए जाने को बीजेपी ने अभिव्यक्ति की आजादी कहा

नाथूराम गोडसे (फाइल फोटो).

खास बातें

  1. ग्वालियर में हिन्दूसभा भवन में लगाई गई नाथूराम गोडसे की मूर्ति
  2. महासभा के दफ्तर में गोडसे ने 1947 में सात दिन बिताए थे
  3. कांग्रेस की चेतावनी- मूर्ति नहीं हटी तो सड़क पर संघर्ष करेगी पार्टी
भोपाल:

ग्वालियर में हिंदू महासभा ने नाथूराम गोडसे का मंदिर बनवाया है. इसका कांग्रेस विरोध कर रही है लेकिन बीजेपी का कहना है कि है यह भी अभिव्यक्ति की आजादी है. हालांकि सरकार की ओर से महासभा को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है. गांधी के हत्यारे गोडसे का मंदिर बनाने के खिलाफ कांग्रेस ने शुक्रवार को पूरे प्रदेश में मौन धारण कर विरोध जाहिर किया.
      
राजधानी भोपाल सहित मध्यप्रदेश में कई जगह महात्मा गांधी की मूर्ति को धोया गया, फूल माला पहनाई गई. विरोध के लिए कांग्रेस को उनकी याद आई. विरोध ग्वालियर में हिन्दूसभा भवन में लगाई गई नाथूराम गोडसे की मूर्ति से. शहर के दौलतगंज इलाके में 80 सालों से महासभा का दफ्तर है, जहां गोडसे ने 1947 में सात दिन बिताए थे. महासभा ने गोडसे के मंदिर के लिए जमीन और अनुमति मांगी थी लेकिन प्रशासन ने इनकार कर दिया. मंदिर बनने के बाद महासभा को कारण बताओ नोटिस जारी कर सवाल भी पूछे गए.

यह भी पढ़ें : महात्मा गांधी की हत्या में विदेशी हाथ! याचिका में दावा- गोडसे के साथी आप्टे की पहचान संदिग्ध


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लेकिन कांग्रेस को लगता है यह सिर्फ दिखावा भर है. कांग्रेस के कार्यकर्ता पूरे प्रदेश में बापू की मूर्ति के पास मौन बैठे रहे. कांग्रेस ने कहा है कि मूर्ति नहीं हटाई गई तो आंदोलन तेज होगा. कांग्रेस के प्रवक्ता रवि सक्सेना ने कहा कि सरकार गांधीजी का महिमामंडन करने की बात करती है लेकिन मुरैना में उनकी मूर्ति जलाई गई, उनका अपमान हो रहा है और वह मौन है. अगर गोडसे की मूर्ति नहीं हटाई गई तो कांग्रेस संघर्ष करते हुए सड़क पर उतरेगी.  

VIDEO : गोडसे की मूर्तियां लगाई जाएंगी
  
उधर बीजेपी को लगता है यह भी अभिव्यक्ति की आजादी है. पार्टी प्रवक्ता डॉ हितेष वाजपेयी ने कहा कांग्रेस न गांधी को मानती है, न गांधी की बात मानती है. रहा सवाल मूर्ति विवाद का तो इस देश में रावण की मूर्ति है, डकैतों की भी मूर्ति है. जब सार्वजनिक रूप से इस प्रकार की अभिव्यक्ति होती है तब आप नियम लागू कर सकते हो, लेकिन जब निजी रूप से होती है, संस्थाएं अपना निर्णय लेती हैं, तो उनको अपने विवेक पर छोड़ देना चाहिए.



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