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मध्यप्रदेश : किसानों को पता नहीं और उनके नाम पर हजम कर ली लाखों रुपये की सब्सिडी

मध्यप्रदेश में उद्यानिकी विभाग के अफसरों ने निजी कंपनियों से सांठगांठ करके शासन से किसानों को मिलने वाली सब्सिडी हड़पी

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मध्यप्रदेश : किसानों को पता नहीं और उनके नाम पर हजम कर ली लाखों रुपये की सब्सिडी

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. किसान को पता नहीं लगा और उसके नाम पर तीन-तीन बार भुगतान हुआ
  2. एक ट्यूब तक मिली नहीं और दस लाख की सब्सिडी के लाभार्थी बने रामसिंह
  3. आवेदन करने पर दो किसानों को सामान नहीं मिला, खाते में दर्ज हो गया
भोपाल: मध्यप्रदेश सरकार किसानों के नाम पर बड़े-बड़े ऐलान कर रही है, मुख्यमंत्री को विपक्षी दल घोषणावीर की संज्ञा दे चुके हैं. आरोप लगा रहे हैं कि पिछले कुछ सालों में उनकी एक दो नहीं 22000 घोषणाएं अधूरी हैं लेकिन जो पूरी हो रही हैं, उसमें भी भ्रष्टाचार का बोलबाला है. ताज़ा मामला उद्यानिकी विभाग का है जहां अधिकारी कथित तौर पर निजी कंपनियों से सांठगांठ कर शासन से किसानों को मिलने वाली सब्सिडी को हजम कर गए. कहीं राशि का भुगतान हो गया, किसान को पता नहीं लगा, तो कहीं एक नाम पर तीन-तीन बार भुगतान हो गया.
          
बामनियाखेड़ी के रामसिंह को पता ही नहीं लेकिन सरकारी फाइलो में उद्यानिकी विभाग की ड्रिप इरीगेशन योजना में उनके नाम पर एक नहीं तीन बार अनुदान मिल गया. रकम लगभग 10 लाख. रामसिंह कहते हैं कि उन्होंने कभी योजना के लिए आवेदन नहीं किया. कागज़ पर मेरे नाम पर पैसे निकाल लिए, 10 लाख रुपये. जांच वाले ने मुझे बताया. शिकायत कलेक्टर साहब से की है. दोषी को सज़ा देना चाहिए जिसने गलत काम किया. साहब ने बताया 10 लाख की ड्रिप है मेरे नाम से, जबकि एक नली नहीं है मेरे यहां.

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जोरावर बाई बूंद-बूंद पानी से घर-खेत का काम चलाती हैं, उन्हें भी पता नहीं कि कब कैसे उनके नाम पर दो दफे ड्रिप इरीगेशन का अनुदान निकल गया. जोरावर बाई ने बताया कि तूफान सिंह ने एक बार रजिस्ट्रेशन कराया. एक बार सामान मिला. लेकिन लिस्ट में दो-दो जगह नाम आ गया. मम्मी-पापा के नाम से पंजीयन करवाया था, दस छड़ व दस बंडल मिले थे. लेकिन जांच करने वाले आए तो उन्होंने बताया कि आपके 2-2 जगह ड्रिप निकल चुकी है.
       
गोपाल और शिवलाल जैसे किसानों को आवेदन के बाद सामान लेने बुलाया गया. आरोप है कि जब वे गए तो पहले कुछ बहाना बनाकर सामान नहीं मिला. बाद में पता लगा कि उनके नाम से स्वीकृत हुआ सामान कोई और ले गया. शिकायत की लेकिन कार्रवाई नहीं हुई. गोपाल शर्मा ने कहा कंटालिया नर्सरी पर गए, तीन बार आवेदन दिया. फिर ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर बुलाया गया. जब गए तो कहा कि किसी की मौत हो गई आज नहीं देंगे. बाद में फुसलाते रहे, कहा सूचना दे देंगे. आज तक सूचना नहीं दी. जब जानकारी ली तो पता लगा पैसा भी निकल गया, ड्रिप भी नहीं मिली. वहीं शिवलाल का कहना था कि हमने आगर में शिकायत की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.
          
अकेले सुसनेर में उद्यानिकी विभाग ने कहा कि उसने 2230 किसानों को योजना का फायदा दिया लेकिन प्रशासन ने जब सुसनेर जनपद पंचायत के तहत 55 पंचायतों में भौतिक सत्यापन करवाया तो पता लगा 800 हितग्राहियों को सामान मिला. 1430 किसानों ने बताया कि उन्हें कुछ नहीं मिला, 200 तो ऐसे थे जो उन गांवों में रहते ही नहीं.
          
इस पूरे मामले में प्रशासन ने शिकायत मिलने के बाद एक निजी वेयरहाऊस से ड्रिप इरिगेशन से जुड़ा सामान ज़ब्त किया. कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई. आगर कलेक्टर अजय गुप्ता ने कहा 4 कंपनियों ने क्लेम किया उनके खिलाफ एफआईआर हुई है. चार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है. कृषकों का अंश कंपनी ने भरा लेकिन जो सिस्टम लगाना था वो नहीं लगाया. वहीं एसपी मनोज कुमार सिंह ने बताया 420, 467, 468 में मामला दर्ज किया है, अभी तक आगर में दो प्रकरण दर्ज किए हैं.
       
मंत्रीजी कार्रवाई पर खुश हैं, किसान परेशान. मंत्रीजी की सलाह है वे फिर से आवेदन करें. विपक्ष कह रहा है प्रदेश में घोटाले पर घोटाले हो रहे हैं. उद्यानिकी विभाग के मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा ने कहा हम लगातार सख्त कार्रवाई कर रहे हैं, न केवल अधिकारियों को सस्पेंड किया बल्कि कंपनियों को ब्लैक लिस्ट किया. जब हमने पूछा जो किसान बग़ैर ग़लती के ब्लैक लिस्ट हो गए हैं उनका क्या? तो मीणा ने कहा फिर से ऑनलाइन आवेदन करें उनको करेंगे.
       
वहीं नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा योजना बहुत अच्छी है लेकिन क्रियान्वन सही ना हो, लाभ किसी और को मिले तो घटिया प्रशासन है. राज्य में स्कैम पर स्कैम हो रहे हैं दुर्भाग्य है.

VIDEO : सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार का बोलबाला   
         
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार खेती को लाभ का धंधा बनाने की बात कहते हैं, लेकिन ये हकीकत भूल कर कि उनके राज्य में अब तक ये जुमला 15,283 किसानों के काम नहीं आया और वो आत्महत्या कर चुके हैं. 2018 में मध्यप्रदेश सरकार ने खेती के लिए 37,498 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, लेकिन एक के बाद एक हमारी पड़ताल जिस तरह के खेती के घोटाले सामने रख रही है, सरकार को इसी बजट से एक निगरानी कमेटी भी बना देना चाहिए ताकि पता लगे कि करोड़ों के बजट में किसानों को कितना मिला, और भ्रष्ट सिस्टम कितना डकार गया.


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