महाराष्‍ट्र में औसतन 6 किसान रोज कर रहे आत्‍महत्‍या, विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

महाराष्‍ट्र में इस साल जनवरी से जून के बीच 1074 किसानों की आत्महत्या रिकॉर्ड की गई है यानी रोज़ाना औसतन 6 किसानों ने जान दी है.

महाराष्‍ट्र में औसतन 6 किसान रोज कर रहे आत्‍महत्‍या, विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

महाराष्‍ट्र मंं इस साल जनवरी से जून के बीच 1074 किसानों की आत्महत्या की है (प्रतीकात्‍मक फोटो)

मुंंबई:

महाराष्ट्र (Maharashtra) में किसानों की परेशानियां बरकरार है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस साल जनवरी से जून महीने के बीच महाराष्ट्र में हर रोज़ औसतन 6 किसानों ने आत्महत्या (Farmers suicide) की है. जिसके बाद अब सरकार के कदमों पर सवाल उठाए जा रहे हैं. नासिक के दिंडोरी में रहने वाले दत्तात्रय लमड़े अंगूर की खेती करते थे. उन पर 9 लाख रुपये का कर्ज था. उम्मीद थी कि इस बार फसल अच्छी होने पर कर्ज़े की कुछ रकम को वापस लौटा देंगे लेकिन फसल खराब होने और बाद में लॉकडाउन में काम का कोई दूसरा विकल्प नहीं होने से तंग आकर दत्तात्रय ने खुदकुशी कर ली.. परिवारवाले अब सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं..  

दत्तात्रय के बेटे ने बताया, 'खेत में फसल नहीं उग पाई, उसी समय लॉकडाउन शुरू हो गया.हम मजदूरी कर किसी तरह काम कर रहे थे लेकिन बैंक की ओर से बार-बार नोटिस दिया जा रहा था जिससे परेशान होकर मेरे पिता ने आत्महत्या ली. उम्मीद है सरकार हमारी कुछ सहायता करेगी. महाराष्‍ट्र में हाल के समय में किसानों की आत्‍महत्‍या के कई मामलों में से यह एक है. राज्‍य में इस साल जनवरी से जून के बीच 1074 किसानों की आत्महत्या रिकॉर्ड की गई है यानी रोज़ाना औसतन 6 किसानों ने जान दी है. किसान नेताओं के अनुसार आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं तो वहीँ इस मामले में विपक्ष भी सरकार को घेरता नज़र आ रहा है.

किसान नेता किशोर तिवारी कहते हैं, 'कोरोना का असर कृषि और ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था पर प्रभाव पड़ रहा है. जैसे ही खर्च बढ़ेंगे, किसानों की आत्महत्या और बढ़ने की आशंका है. ज़रूरत इस बात की है कि सरकार किसानों की पूरी कर्जमाफी कर दे.' बीजेपी नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, राज्य सरकार इस मामले को लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं है. कोरोना के दौरान सरकार की ओर से आर्थिक मदद नहीं मिलने से किसान आत्महत्या कर रहे हैं.ज़रूरत है कि किसान तत्काल 50 हज़ार करोड़ की आर्थिक पैकेज दे.'

महाराष्ट्र चुनाव के समय और उसके बाद सभी पार्टी के नेता किसानों के मुद्दों को उठाते नज़र आए थे लेकिन देश के 'अन्‍नदाताओं' की परेशानी अब भी बरकरार है. हालांकि सरकार ने कहा है कि हालात सुधारने के लिए जो भी ज़रूरी होगा किया जाएगा.' राहत और पुनर्वास मंत्री विजय वडेटटीवार बताते हैं, 'पिछले 6 महीने में हमने बैंकों से किसी भी किसान के दरवाजे पर कर्ज की रकम नहीं को कहा है.फिर भी इस साल में किसानों की आत्महत्या जारी है.इस साल फसल के दाम भी अच्छे दिए गए हैं, इसके बावजूद मामले बढ़ रहे हैं इस पर जल्द ही कैबिनेट में चर्चा की जाएगी.'

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(आत्‍महत्‍या किसी समस्‍या का समाधान नहीं है. अगर आपको सहारे की जरूरत है या आप किसी ऐसे शख्‍स को जानते हैं जिसे मदद की दरकार है तो कृपया अपने नजदीकी मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ के पास जाएं.)

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