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महाराष्ट्र के शिक्षामंत्री को इस्तीफा देना ही होगा : आदित्य ठाकरे

शिवसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ने दावा किया है कि महाराष्ट्र में शिक्षा के क्षेत्र में मौजूद यह संकट अभूतपूर्व है.

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महाराष्ट्र के शिक्षामंत्री को इस्तीफा देना ही होगा : आदित्य ठाकरे

आदित्य ठाकरे ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठाया सवाल

मुंबई: महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ गठबंधन में BJP की सहयोगी शिवसेना की युवा शाखा युवा सेना के अध्यक्ष आदित्य ठाकरे ने मुंबई यूनिवर्सिटी के परीक्षा परिणाम अब तक घोषित नहीं हो पाने को लेकर राज्य के शिक्षामंत्री विनोद तावड़े तथा यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर डॉ संजय देशमुख के इस्तीफे की मांग की है.

NDTV.com के लिए लिखे ब्लॉग में आदित्य ठाकरे लिखते हैं, "विनोद तावड़े और डॉ संजय देशमुख अपनी नौकरियों की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त हैं, जबकि परीक्षा के परिणाम 115 दिन बीत जाने के बाद भी घोषित नहीं हुए हैं... कानून के मुताबिक इन्हें परीक्षा खत्म होने के 45 दिन के भीतर घोषित कर दिया जाना चाहिए..."

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शिवसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ने दावा किया है कि महाराष्ट्र में शिक्षा के क्षेत्र में मौजूद यह संकट अभूतपूर्व है. उन्होंने कहा कि समस्या सिर्फ यही नहीं है कि विद्यार्थी और शिक्षक दिक्कतों का सामना कर रहे हैं, बल्कि उससे भी बड़ा संकट यह है कि सरकार इस बात से कतई निर्लिप्त दिखाई देती है कि विद्यार्थियों की परेशानी सुनी ही नहीं जा रही है, या सुनी जाने के बावजूद उसकी अनदेखी की जा रही है. आदित्य ठाकरे का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि ये विद्यार्थी कभी भी एकजुट वोटबैंक नहीं बनेंगे, और कभी विद्रोह नहीं करेंगे.

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आदित्य ने कहा कि परीक्षाएं 23 अप्रैल को खत्म हुई थीं, और अब अगस्त आ चुका है, और परिणाम का अब तक कुछ अता-पता नहीं है. माननीय राज्यपाल ने स्वतःसंज्ञान लेते हुए 31 जुलाई की डेडलाइन तय की थी, जिसका पालन करने का वादा यूनिवर्सिटी ने किया था. हर विद्यार्थी, अभिभावक ने सब्र के साथ इंतज़ार किया, और राजनैतिक दलों की छात्र शाखाओं ने भी किसी तरह का कोई विरोध प्रदर्शन नहीं किया, लेकिन आज भी स्थिति यह है कि लगता है परिणाम पूरी तरह स्वतंत्रता दिवस तक भी घोषित नहीं किए जाएंगे, जबकि मार्कशीट तो उसके बी बाद ही मिल पाएंगी.

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युवा सेना प्रमुख ने ब्लॉग में सवाल किया है कि जिन विद्यार्थियों ने विदेशों में पढ़ने के लिए आवेदन किया हुआ है, या जो भारत में ही स्नातकोत्तर कोर्सों में दाखिला लेना चाहते हैं, उनका क्या होगा. आदित्य का कहना है, साफ-सी बात है कि इन सब विद्यार्थियों का एक साल खराब होगा, सिर्फ इसलिए, क्योंकि मंत्री तथा वाइस-चांसलर अगले साल मिलते-जुलते हंगामे तक के लिए अपनी नौकरी सुरक्षित रखने में जुटे रहेंगे.


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