अगर BJP,पीडीपी से हाथ मिला सकती है तो शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के साथ क्यों नहीं : संजय राउत

शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है कि बीजेपी के मुख्यमंत्री पद साझा ना करने के अहंकार के कारण मौजूदा स्थिति उत्पन्न हुई.

अगर BJP,पीडीपी  से हाथ मिला सकती है तो शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के साथ क्यों नहीं : संजय राउत

खास बातें

  • संजय राउत का बीजेपी पर निशाना
  • शिवसेना को सरकार बनाने का न्यौता
  • कांग्रेस और एनसीपी दे सकती है समर्थन
नई दिल्ली:

शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है कि बीजेपी के मुख्यमंत्री पद साझा ना करने के अहंकार के कारण मौजूदा स्थिति उत्पन्न हुई. उन्होंने कहा कि यह बीजेपी का अहंकार ही है कि वह समझौते की बात न मानकर विपक्ष में बैठने को तैयार है लेकिन सरकार बनाने के लिए राजी नहीं है. वहीं एनडीए में रहने के सवाल पर उन्होंने साफ किया कि अगर बीजेपी अपना वादा पूरा नहीं करना चाहती तो गठबंधन में रहने का कोई मतलब नहीं है. उन्होंने कहा कि बीजेपी को सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए 72 घंटे मिले, हमें 24 घंटे दिए गए. वहीं कांग्रेस-एनसीपी के साथ सरकार बनाने के सवाल पर संजय राउत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ हाथ मिला सकती है तो शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के साथ क्यों नहीं.  राउत ने कहा कि कांग्रेस, एनसीपी को मतभेद भूल कर महाराष्ट्र के हित में एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम के साथ आना चाहिए.

आपको बता दें कि मोदी सरकार में शिवसेना के एकमात्र मंत्री अरविंद सावंत ने भी इस्तीफे का ऐलान कर दिया है और इसके साथ ही बीजेपी-शिवसेना की 30 साल पुरानी दोस्ती टूट गई है. वहीं सरकार बनाने की कवायद के बीच महाराष्ट्र में एनसीपी की तो दिल्ली में कांग्रेस की बैठक है. शरद पवार ने कहा है कि शिवसेना के साथ सरकार बनाने का फैसला कांग्रेस से विचार करने के बाद किया जाएगा. वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि पार्टी की बैठक में आलाकमान जो निर्देश देगा उसके हिसाब से फैसला लिया जाएगा.

आपको बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव मे बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली हैं. बीजेपी और शिवसेना ने मिलकर बहुमत का 145 का आंकड़ा पार कर लिया था. लेकिन शिवसेना ने 50-50 फॉर्मूले की मांग रख दी जिसके मुताबिक ढाई-ढाई साल सरकार चलाने का मॉडल था. शिवसेना का कहना है कि बीजेपी के साथ समझौता इसी फॉर्मूले पर हुआ था लेकिन बीजेपी का दावा है कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ. इसी लेकर मतभेद इतना बढ़ा कि दोनों पार्टियों की 30 साल पुरानी दोस्ती टूट गई.

शिवसेना NDA से बाहर, बीजेपी से 30 साल की दोस्ती भी टूटी​
 

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