महाराष्ट्र में कोरोना से मृत लोगों में 46 फीसदी से अधिक हाइपरटेंशन के शिकार थे

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के कारण 50,000 से अधिक मौतें, मरने वालों में 69 प्रतिशत से अधिक पुरुष, 39.49 फीसदी को थी डायबिटीज़

महाराष्ट्र में कोरोना से मृत लोगों में 46 फीसदी से अधिक हाइपरटेंशन के शिकार थे

प्रतीकात्मक फोटो.

मुंबई:

Maharashtra Coronavirus: देश की 33 प्रतिशत कोरोना वायरस से मौतें महाराष्ट्र में हुई हैं, यानी हर तीसरी मौत. इनमें 71 फ़ीसदी मौतें ऐसे लोगों की हुईं जिन्हें दूसरी बीमारी भी थी. दूसरी बात ये कि 69 फ़ीसदी से ज़्यादा मौतें पुरुषों की हुई हैं. महिलाओं पर कोरोना की मार कम रही. महाराष्ट्र में कोविड (Covid) की वजह से 50,000 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है. इनमें से 26,724 लोगों की मौतों का विश्लेषण हुआ है. इससे पता चलता है कि 71.64 प्रतिशत मौतें को-मॉर्बिडिटी वाले, यानी पहले से अन्य बीमारी से ग्रस्त मरीज़ों की हुई हैं. मृत कोविड मरीज़ों में से 46.76% हायपरटेंशन के भी शिकार थे. वहीं 39.49% मृत कोविड मरीज़ों को डायबटीज़ थी. 11.13% हृदय रोग के मरीज़ों की कोविड से मौत हुई. तो 4.97% कोविड मरीज़ किडनी और 3.94% मरीज़ फेफड़े की तकलीफ़ से पहले से ही गुज़र रहे थे. मरने वालों में 69.8 फीसदी पुरुष थे और 30.2 फ़ीसदी महिलाएं.

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग के एपिडिमोलॉजी विभाग के हेड डॉ प्रदीप आवटे कहते हैं कि ‘'85% मौतें 50 साल के ऊपर के मरीज़ों की हुईं हैं. साठ साल के ऊपर में 65% के क़रीब मौतें हुईं हैं. पुरुषों की मौतों की संख्या क़रीब 70%  है. हायपरटेंशन-डायबिटीज़ और दूसरी बीमारी वाले मरीज़ों में 70% डेथ देखी गई हैं.  गर्भवती महिलाओं में मौतें काफ़ी कम हैं तो इस विश्लेषण से हमें पता चलता है कि यहां कौन से मरीज़ हाईरिस्क मरीज़ हैं.''

को-मोर्बिड मरीज़ों में भी अब मौतें नियंत्रण में हैं. महाराष्ट्र कोविड टास्क फ़ोर्स बीएमसी अस्पताल केईएम के डॉक्टर कहते हैं कि अगर मरीज़ जल्दी अस्पताल पहुंचते तो इतनी संख्या में मौतें नहीं होतीं. 
महाराष्ट्र कोविड टास्क फ़ोर्स के डॉ राहुल पंडित ने कहा कि ‘'महामारी की शुरुआत में लोग काफ़ी लेट आ रहे थे, क्योंकि लोगों को पता नहीं था, जब जागरूकता बढ़ी तब लोग जल्दी आने लगे, बीते 2-3 महीनों में इन मरीज़ों की तकलीफ़ें कम हुईं हैं, क्योंकि ऐसे मरीज़ जल्दी अस्पताल में आ रहे हैं''

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केईएम अस्पताल के कार्डिएक ऐनस्थीज़ा विभाग के डॉ असीम गार्गव ने कहा कि ‘'अभी मृत्यु दर में काफ़ी कमी आई है वो इसी का नतीजा है कि बीते 11 महीनों में हमने भी समझा है कि ये बीमारी आगे किसे प्राग्रेस करती है. दवाइयों का रेस्पॉन्स अलग-अलग दिखा है. हम गम्भीर मरीज़ों के ट्रीटमेंट में स्टेराइड भी इस्तेमाल कर रहे जिससे शुगर लेवल बढ़ने के चांसेस रहते हैं. इससे भी तकलीफ़ बढ़ी थी मरीज़ों की.''

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इस विश्लेषण से महाराष्ट्र सरकार कोविड के टीकाकरण के लिए हाईरिस्क मरीज़ों की पहचान तो कर रही है साथ ही कोविड के इलाज में इन मरीज़ों को बचाने के उपाय भी पुख़्ता कर रही है.