RTI कार्यकर्ताओं की हत्या में महाराष्ट्र टॉप पर, गुजरात का नंबर दूसरा

RTI कार्यकर्ताओं की हत्या में महाराष्ट्र टॉप पर, गुजरात का नंबर दूसरा

महाराष्ट्र के लातूर में RTI कार्यकर्ता पर हमला करते शिवसैनिक (फाइल फोटो)

लखनऊ:

देश में हाल के 10 वर्षों में सूचना के अधिकार (RTI) पर काम करने वाले 39 कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है और 275 कार्यकर्ताओं पर हमले हुए या उन्हें दूसरे तरीकों से प्रताड़ित किया गया। इस बीच महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 10 आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है। इसके बाद 6-6 हत्याओं के साथ गुजरात और उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर हैं। 4-4 हत्याओं के साथ कर्नाटक और बिहार तीसरे स्थान पर हैं।

लखनऊ की आरटीआई कार्यकर्ता उर्वशी शर्मा के मुताबिक, आरटीआई कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमलों के मामले में 60 हमलों के साथ महाराष्ट्र राज्य प्रथम स्थान पर है, गुजरात 36 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है, उत्तर प्रदेश ऐसे 25 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर और 23 मामलों के साथ दिल्ली चौथे स्थान पर है।

उर्वशी शर्मा ने महाराष्ट्र के मल्लिकार्जुन कट्टी व अन्य आरटीआई कार्यकर्ताओं पर हुए हमलों की भर्त्सना करने के लिए शनिवार को यहां के हजरतगंज जीपीओ स्थित महात्मा गांधी पार्क में येश्वर्याज सेवा संस्थान के तत्वावधान में विरोध प्रदर्शन किया। इस मौके पर सभी समाजसेवी काले कपड़े पहने हुए थे।

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उर्वशी ने कहा कि महाराष्ट्र आरटीआई कार्यकर्ताओं के लिए देश का सर्वाधिक असुरक्षित प्रदेश है। इसकी वजह यह है कि सत्ता कभी जनता के सामने पारदर्शी नहीं होना चाहती। आरटीआई कार्यकर्ता जब सत्ता को मजबूर करते हैं, तब असलियत तो उजागर हो जाती है, मगर ऐसे कार्यकर्ता की जान खतरे में पड़ जाती है। उन्होंने कहा, 'हमने आरटीआई कानून जनांदोलनों के जरिये हासिल किया है। जनता के पास सिर्फ सूचना का अधिकार ही ऐसा औजार है, जो उसे सशक्त होने का अहसास कराता है। इसे धारदार बनाए रखने के लिए जहां भी जरूरी हो, प्रभावी हस्तक्षेप करना हमारा ही फर्ज है।'

विरोध प्रदर्शन में आए समाजसेवियों ने इस प्रकार के हमलों को अभिव्यक्ति की आजादी के संवैधानिक अधिकार का हनन बताते हुए ऐसे कृत्यों को अलोकतांत्रिक और कायरतापूर्ण बताया। उन्होंने इन कृत्यों की भर्त्सना की और सूबे के राज्यपाल व स्थानीय प्रशासन के माध्यम से देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और महाराष्ट्र के राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रेषित कर देशभर के आरटीआई कार्यकर्ताओं, लेखकों व पत्रकारों यानी 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पैरोकारों' की सुरक्षा की मांग बुलंद की।