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लोकपाल समिति की बैठक में नहीं गए कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, पीएम मोदी को लिखा खत

इस बैठक में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, पीएम नरेंद्र मोदी और सीजेआई दीपक मिश्रा भी हिस्सा ले रहे हैं.

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लोकपाल समिति की बैठक में नहीं गए कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, पीएम मोदी को लिखा खत

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे.

खास बातें

  1. लोकपाल की नियुक्ति को लेकर उच्चस्तरीय बैठक
  2. खड़गे ने किया जाने से इनकार
  3. पीएम मोदी को लिखा खत
नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर लोकपाल नियुक्ति पर चयन समिति की बैठक में शामिल होने से इनकार किया है. दरअसल, लोकपाल चयन समिति की बैठक बुलाई गई है, जिसमें मल्लिकार्जुन खड़गे को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है. इस बैठक में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, पीएम नरेंद्र मोदी और सीजेआई दीपक मिश्रा भी हिस्सा ले रहे हैं.

लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सूचना दी है कि वह लोकपाल नियुक्ति पर होने वाली चयन समिति की बैठक में आमंत्रित व्यक्ति के रूप में हिस्सा नहीं लेंगे. सरकार ने उन्हें चयन समिति की बैठक में आज विशिष्ट अतिथि के रूप में बैठक में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए एक पत्र में खड़गे ने कहा है कि ‘विशेष निमंत्रण’ लोकपाल चयन के मामले में विपक्ष की आवाज को अलग करने का एक ‘सम्मिलित प्रयास’ है. लोकपाल अधिनियम के अनुसार लोकसभा में विपक्ष का नेता ही चयन समिति का सदस्य होता है और खड़गे विपक्ष के नेता नहीं है. वह समिति का हिस्सा नहीं हैं.

खड़गे ने मोदी को लिखे अपने पत्र में कहा है, ‘‘विशेष तौर पर भेजा गया आमंत्रण सबसे जरूरी भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी समूह की चयन प्रक्रिया से विपक्ष की आवाज को बाहर करने का एक सम्मिलित प्रयास है.’’  उन्होंने कहा, ‘‘ हिस्सा लेने के अधिकार के बिना विशेष आमंत्रित व्यक्ति के तौर पर मेरी उपस्थिति, मेरे विचार दर्ज करना और मतदान करना प्रकट रूप से ढकोसला होगा जिसका लक्ष्य यह दिखाना है कि चयन प्रक्रिया में विपक्ष ने हिस्सा लिया था.’’ 

खड़गे ने पत्र में लिखा, ‘‘ इन परिस्थितियों में लोकपाल अधिनियिम 2013 की पवित्रता को बनाए रखने के लिए मुझे विशेष आमंत्रित व्यक्ति के निमंत्रण को जरूर अस्वीकार करना चाहिए क्योंकि मौजूदा प्रक्रिया ने एक प्रवित्र कार्यपद्धति को राजनीतिक उपस्थिति मात्र तक सीमित कर दिया है.’’

इससे पहले लोकपाल नियुक्ति पर चयन समिति की बैठक को लेकर कांग्रेस के सूत्रों का कहना था कि मल्लिकार्जुन खड़गे गुरुवार को दिल्ली पहुंचे, लेकिन उनके शामिल होने को लेकर पहले पार्टी कानूनी सुझाव लेगी तभी इसपर कोई फैसला ले पाएगी. इसकी वजह यह बताई जा रही है कि इस बैठक में खड़गे की भूमिका स्पष्ट नहीं है.

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बता दें कि लोकपाल को देश के शीर्ष अधिकारियों समेत प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिमंडल के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने का अधिकार होगा. गौरतलब है कि लोकपाल और लोकायुक्त कानून साल 2013 में दोनों सदनों (लोकसभा व राज्यसभा) की सहमति से पास हुआ था. 

बता दें कि पिछले चार साल से लोकपाल कानून सरकारी अधिकारियों की फाइलों में अटक कर रह गया है. इस बिल में साफ-साफ लिखा गया है कि भ्रष्टाचार से जुड़े हम मामले की जांच लोकपाल के जरिए होगी. चाहे उसमें देश के प्रधानमंत्री से जुड़ा क्यों ने हो.


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