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मंगलौर : सरकारी मंदिर की आयोजन समिति में मुस्लिम कलेक्टर पर हिन्दू संगठनों को आपत्ति

मंगलौर : सरकारी मंदिर की आयोजन समिति में मुस्लिम कलेक्टर पर हिन्दू संगठनों को आपत्ति

प्रतीकात्मक फोटो

बेंगलुरु:

दक्षिण कर्नाटक के मंगलौर से 60 किलोमीटर दूर पुत्तूर के श्री महालिंगेश्वर मंदिर के वार्षिक आयोजन समारोह में कार्यक्रम के आयोजन समिति के चेयरमैन के तौर पर जिला कलेक्टर एबी इब्राहिम के नाम पर वीएचपी और बजरंग दल को ऐतराज़ है। यह दोनों संगठन चाहते हैं कि उनका नाम आमंत्रण कार्ड से हटाया जाए। इस आमंत्रण पत्र में उनकी तरफ से ही लोगों को मंदिर के वार्षिकोत्सव में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।

कार्यक्रम के आमंत्रण पत्र पर कलेक्टर का नाम
सरकारी मंदिरों की समितियों का अध्यक्ष जिला कलेक्टर होता है, इसलिए नियमों के मुताबिक प्रशासन की तरफ से छपवाए गए आमंत्रण पत्र में कलेक्टर इब्राहिम का नाम आमंत्रण भेजने वाले की हैसियत से छपा है। इब्राहिम राज्य कोटे से प्रमोटेड आईएएस अधिकारी हैं और मंगलौर के रहने वाले हैं। हिन्दू संगठनों के इस विरोध से दक्षिण कन्नड़ा जिले यानी मंगलौर के कलेक्टर इब्राहिम काफी आहत हैं। मीडिया कर्मियों से उन्होंने कहा कि इस बेवजह विवाद से वे आहत हैं। उनका नाम उनकी पोस्ट की वजह से कार्ड पर छपा है, किसी दूसरी वजह से नहीं।

मंदिर प्रबंधन समिति में गैर हिन्दू कानून के तहत मान्य नहीं
उधर वीएचपी और बजरंग दल अपनी स्थानीय इकाई के विरोध को सही मान रहे हैं। कर्नाटक बीजेपी के प्रवक्ता एस प्रकाश ने हिन्दू रिलीजन एंडोमेंट एक्ट 1997 के हवाले से बताया कि इस कानून के तहत किसी भी मंदिर की व्यवस्थापक समिति का सदस्य ऐसा कोई व्यक्ति नहीं हो सकता जो इस धर्म का पालन नहीं करता हो। अगर हालात ऐसे पैदा होते हैं तो दूसरा मातहत अधिकारी गैर हिन्दू अधिकारी की जगह लेगा। यानी दक्षिण कन्नड़ा जिले के जिला मजिस्ट्रेट मुस्लिम या ईसाई या अन्य गैर हिन्दू धर्म के हैं तो सरकारी मंदिरों की समिति की अध्यक्षता उनकी जगह उनके मातहत हिन्दू अधिकारी करेंगे। बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता जी प्रकाश ने यह भी कहा कि अगर कुछ संगठन इस मुद्दे को उठा रहे हैं तो सरकार को चाहिए कि दोनों पक्षों से बातचीत करके मामले को निपटाए।

माहौल बिगाड़ने की कोशिश का आरोप
राज्य के गृहमंत्री जी परमेश्वर ने इसे माहौल बिगाड़ने की कोशिश कहा। उनके मुताबिक डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट एक बेहद जिम्मेदारी वाला पद है। इब्राहिम अपने पद का निर्वाह कर रहे हैं, ऐसे में इसे मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। कुछ हिन्दू संगठनों ने अगर कानून के प्रावधानों के मुताबिक बदलाव नहीं किए गए तो स्थानीय स्तर पर बंद का आह्वान करने की धमकी दी है।