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जल बचाने के लिए जनांदोलन की जरूरत, पढ़ें पीएम मोदी के मन की बात की 15 बड़ी बातें

प्रधानमंत्री ने अपनी मन की बात में बताया कि उन्हें काफी चिट्ठियां आती हैं, टेलीफोन कॉल आते हैं, सन्देश मिलते हैं, लेकिन उनमें शिकायत का तत्व बहुत कम होता है और किसी ने कुछ अपने लिए मांगा हो, ऐसी बात, गत पांच वर्ष में उनके ध्यान में नहीं आती है.

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जल बचाने के लिए जनांदोलन की जरूरत, पढ़ें पीएम मोदी के मन की बात की 15 बड़ी बातें

पीएम मोदी ने दूसरी बार कुर्सी बार संभालने के बाद पहली बार 'मन की बात' की है

नई दिल्ली: पीएम मोदी ने दूसरा कार्यकाल संभालने के बाद रेडियो पर प्रसारित होने वाले 'मन की बात' कार्यक्रम को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि वह जब की मन की बात करता हूं तो आवाज मेरी, शब्द मेरे हैं, लेकिन कथा आपकी है, पुरुषार्थ आपका है, पराक्रम आपका है. इसके कारण में इस कार्यक्रम को नहीं आपको मिस कर रहा था,एक खालीपन महसूस कर रहा था. प्रधानमंत्री ने बताया कि कई सन्देश पिछले कुछ महीनों में आये हैं जिसमें लोगों ने कहा कि वो मन की बात को मिस कर रहे हैं. ‘जब मैं पढ़ता हूं, सुनता हूं मुझे अच्छा लगता है. मैं अपनापन महसूस करता हूँ. कभी-कभी मुझे ये लगता है कि ये मेरी स्व से समष्टि की यात्रा है. पीएम ने कहा कि 'मन की बात के इस अल्पविराम के कारण जो खालीपन था, केदार की घाटी में, उस एकांत गुफा में, कुछ भरने का अवसर जरूर दिया, जैसे केदार के विषय में लोगों ने जानने की इच्छा व्यक्त की, वैसे एक सकारात्मक चीजों को बल देने का आपका प्रयास, आपकी बातों में लगातार मैं महसूस करता हूं. उन्होंने कहा कि मन की बात के लिए जो चिट्ठियां आती हैं, एक प्रकार से वह भी मेरे लिये प्रेरणा और ऊर्जा का कारण बन जाती है. कभी-कभी तो मेरी विचार प्रक्रिया को धार देने का काम आपके कुछ शब्द कर देते हैं. प्रधानमंत्री ने अपनी मन की बात में बताया कि उन्हें काफी चिट्ठियां आती हैं, टेलीफोन कॉल आते हैं, सन्देश मिलते हैं, लेकिन उनमें शिकायत का तत्व बहुत कम होता है और किसी ने कुछ अपने लिए मांगा हो, ऐसी बात, गत पांच वर्ष में उनके ध्यान में नहीं आती है.
15 बड़ी बातें
  1. जब देश में आपातकाल लगाया गया तब उसका विरोध सिर्फ राजनीतिक दायरे तक सीमित नहीं रहा था, राजनेताओं एवं जेल की सलाखों तक सीमित नहीं रहा था, जन-जन के दिल में एक आक्रोश था " "खोये हुए लोकतंत्र की एक तड़प थी. दिन-रात जब समय पर खाना खाते हैं तब भूख क्या होती है इसका पता नहीं होता है वैसे ही सामान्य जीवन में लोकतंत्र के अधिकारों का क्या मज़ा है वो तो तब पता चलता है जब कोई लोकतांत्रिक अधिकारों को छीन लेता है" 
  2. "लोकतंत्र की रक्षा के लिए भारत के संविधान ने कुछ व्यवस्थायें की हैं जिसके कारण लोकतंत्र पनपा है.समाज व्यवस्था को चलाने के लिए, संविधान की भी जरुरत होती है,कानून,नियमों की भी आवश्यकता होती है. लोकतंत्र हमारी संस्कृति है,लोकतंत्र हमारी विरासत है". इस विरासत को लेकर के हम पले-बड़े हैं और इसकी कमी आपातकाल में हमने महसूस की थी. एक पूरा चुनाव अपने हित के लिए नहीं, लोकतंत्र की रक्षा के लिए ,अपने बाकी हक,अधिकारों और आवश्यकताओं की, परवाह ना करते हुए सिर्फ लोकतंत्र के लिए इस देश ने सतत्तर में देखा था"
  3. "हाल ही में लोकतंत्र का महापर्व, बहुत बड़ा चुनाव अभियान, हमारे देश में संपन्न हुआ. अमीर से लेकर ग़रीब, सभी लोग इस पर्व में खुशी से हमारे देश के भविष्य का फैसला करने के लिए तत्पर थे. हमें जो लोकतंत्र मिला है वह बहुमूल्य एवं महान है और इस लोकतंत्र को हमारी रगों में सदियों की साधना, पीढ़ी-दर-पीढ़ी के संस्कार और विशाल व्यापक मन की अवस्था से जगह मिली है''.
  4. 2019 का लोकसभा चुनाव अब तक इतिहास में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव था. इस प्रकार के चुनाव संपन्न कराने में बड़े स्तर पर संसाधनों और मानवशक्ति की आवश्यकता पड़ती है. लाखों शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की दिन-रात मेहनत से चुनाव संभव हो पाया.
  5. 'लोकतंत्र के इस महायज्ञ को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए जहां अर्द्धसैनिक बलों के करीब 3 लाख सुरक्षाकर्मियों ने अपना दायित्व निभाया, वहीं अलग-अलग राज्यों के 20 लाख पुलिसकर्मियों ने भी, परिश्रम की पराकाष्ठा की, कड़ी मेहनत के फलस्वरूप इस बार पिछली बार से अधिक मतदान हुआ'. मतदान के लिए पूरे देश में करीब 10 लाख पोलिंग स्टेशन, 40 लाख से ज्यादा ईवीएम, 17 लाख से ज्यादा वीवीपैट मशीनों का इंतेज़ाम किया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके, कि कोई मतदाता अपने मताधिकार से वंचित ना हो.
  6. आज संसद में 78 महिलाएं हैं जो कि रिकॉर्ड है. मैं चुनाव आयोग और हर उस शख्स को बधाई देता हूं जो चुनाव की प्रक्रिया से जुड़े और भारत के वोटरों को भी सलाम करता हूं. 
  7. हम स्वागत सत्कार में फूलों के बजाय किताबें दें.  मुझे हाल ही में किसी ने ‘प्रेमचंद की लोकप्रिय कहानियाँ' नाम की पुस्तक दी. प्रवास के दौरान मुझे उनकी कुछ कहानियां फिर से पढ़ने का मौका मिल गया. प्रेमचंद ने अपनी कहानियों में समाज का जो यथार्थ चित्रण किया है, पढ़ते समय उसकी छवि आपके मन में बनने लगती है.
  8. प्रेमचंद की लिखी एक-एक बात जीवंत हो उठती है. नशा, ईदगाह और पूस की रात ने मन की छू लिया. "नशा नाम की कहानी पढ़ते समय मेरा मन अपने-आप ही समाज में व्याप्त आर्थिक विषमताओं पर चला गया. मुझे अपनी युवावस्था के दिन याद आ गए कि कैसे इस विषय पर रात-रात भर बहस होती थी.
  9. "वहीँ दूसरी ओर ‘ईदगाह', एक बालक की संवेदनशीलता, उसका अपनी दादी के लिए विशुद्ध प्रेम, छोटी उम्र में इतना परिपक्व भाव, ये सब दर्शाती है. 4-5 साल का हामिद जब मेले से चिमटा लेकर अपनी दादी के पास पहुँचता है तो सच मायने में, मानवीय संवेदना अपने चरम पर पहुँच जाती है" 
  10. "ऐसी ही एक बड़ी मार्मिक कहानी है ‘पूस की रात'. इस कहानी में एक ग़रीब किसान के जीवन की विडंबना का सजीव चित्रण देखने को मिला.अपनी फसल नष्ट होने के बाद भी हल्दू किसान इसलिए खुश होता है क्योंकि अब उसे कड़ाके की ठंड में खेत में नहीं सोना पड़ेगा."
  11. केरल के इडुक्की के घने जंगलों के बीच बसे एक गांव में अक्षरा लाइब्रेरी है. यहां के प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक पी.के. मुरलीधरन और चाय की दुकान चलाने वाले पी.वी.चिन्नाथम्पी ने लाइब्रेरी के लिए अथक परिश्रम किया. एक समय ऐसा भी रहा, जब गट्ठर में भरकर और पीठ पर लादकर यहां पुस्तकें लाई गई. आज ये लाइब्ररी, आदिवासी बच्चों के साथ हर किसी को एक नई राह दिखा रही है.
  12. गुजरात में वांचे गुजरात अभियान जिसमें लाखों की संख्या में हर आयु वर्ग के व्यक्ति ने पुस्तकें पढ़ने में हिस्सा लिया था एक सफल प्रयोग रहा. प्रधानमंत्री ने सभी से अपने जीवन में किताबों को स्थान देने का आग्रह किया और कहा "किताब को भी अपने रूटीन में जरुर स्थान दें,आप बहुत एन्ज्वाए करेंगे. 
  13. पानी का हमारी संस्कृति में बहुत बड़ा महत्व है. ऋग्वेद के आपः सुक्तम् में पानी के बारे में कहा गया है. 'वर्षा से जो पानी मिलता है, उसका सिर्फ आठ फीसदी बचाया जाता है. समय आ गया है कि इस समस्या का हल निकाला जाए. मुझे उम्मीद है कि जन भागीदारी से जल संकट का समाधान कर लेंगे. मैंने ग्राम प्रधानों को पत्र लिखा है कि वो पानी बचाने के लिए ग्राम सभा की बैठक करें और पानी पर विचार विमर्श करें. 22 जून को करोड़ों लोगों ने समर्थन किया.'
  14. बिरसा मुंडा की धरती, जहाँ प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर रहना संस्कृति का हिस्सा है वहाँ के लोग, एक बार फिर जल संरक्षण के लिए अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं. सभी ग्राम प्रधानों एवं सरपंचों को उनकी इस सक्रियता के लिए उन्हें शुभकामनायें. देशभर में ऐसे कई सरपंच हैं, जिन्होंने जल संरक्षण का बीड़ा उठा लिया है.ऐसा लग रहा है कि गांव के लोग, अब अपने गांव में, जैसे जल मंदिर बनाने के स्पर्धा में जुट गए हैं. सामूहिक प्रयास से बड़े सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं. 
  15. पूरे देश में जल संकट से निपटने का कोई एक फ़ॉर्मूला नहीं हो सकता है. इसके लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में, अलग-अलग तरीके से, प्रयास किये जा रहे हैं.लेकिन सबका लक्ष्य एक ही है, और वह है पानी बचाना,जल संरक्षण. पंजाब में जलनिकासी काम किया जा रहा है. इस प्रयास से  जलभराव की समस्या से छुटकारा मिलेगा. तेलंगाना के थिमाईपल्ली में टैंक के निर्माण से गांवों के लोगों की जिंदगी बदल रही है.राजस्थान के कबीरधाम में, खेतों में बनाए गए छोटे तालाबों से एक बड़ा बदलाव आया है. 



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