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मायावती ने नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर कहा, ये फैसला इतिहास का एक काला अध्‍याय

बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार निशाना साधा है.  उन्‍होंने कहा कि पीएम मोदी सरकार ने नोटबंदी का फैसला जल्दबाजी में और काफी अपरिपक्व तरीके लिया.

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मायावती ने नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर कहा, ये फैसला इतिहास का एक काला अध्‍याय

मायावती (फाइल फोटो )

खास बातें

  1. मोदी सरकार ने नोटबंदी का फैसला लेने में की जल्दबाजी: मायावती
  2. नोटबंदी से मुट्ठीभर नेताओं और उद्योगपतियों को हुुुुआ फायदा: मायावती
  3. 9 नवंबर को 'नोटबन्दी माफी दिवस' के रूप में मनाए बीजेपी
लखनऊ: बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार निशाना साधा है.  उन्‍होंने कहा कि पीएम मोदी सरकार ने नोटबंदी का फैसला जल्दबाजी में और काफी अपरिपक्व तरीके लिया. उनके इस फैसले से मुट्ठीभर नेताओं और उद्योगपतियों को छोड़कर देश के सवा सौ करोड़ लोगों को तंगी और बेरोजगारी जैसे कई समस्‍याओं का सामना करना पड़ा. इतना ही नहीं केन्‍द्र सरकार का ये फैसला भारत के इतिहास का एक काला अध्याय है.

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मायावती ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्‍नासेठों की ही सरकार है और उनके हित व फायदे के लिये सबकुछ करने को तैयार रहती है, जिसका एक और उदाहरण तब उजागर हुआ जब अभी हाल ही में सरकारी बैंकों को 2.11 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी मुहैया कराई गई है जबकि इन्ही धन्नासेठों को अनुचित लाभ पहुंचाने की नीति के कारण ही सरकारी बैंक कंगाल बन गये हैं तथा देश की आमजनता की गाढ़ी कमाई का धन बैंकों में डूबता जा रहा है. 

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उन्‍होंने कहा कि 'जनता-केन्द्रित विकास नीति' अपनाने के बजाय अपने देश की बीजेपी  और नरेन्द्र मोदी सरकार  'जन-विरोधी विकास नीति' अपनाती जा रही है जिसका ही दुष्परिणाम है कि विकास का थोड़ा भी लाभ देश के करोड़ों गरीबों, किसानों, युवाओं, बेरोजगारों व अन्य जरुरतमन्द जनता को नहीं मिल पा रहा है और ना ही रोजगार के अवसर ही पैदा हो पा रहे हैं, जिससे धीरे-धीरे देश का काफी नुकसान होता चला जा रहा है.

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मायावती ने लाए ये आरोप
(1) मायावती ने बीजेपी को सलाह दी है कि नौ नवंबर को 'एन्टी ब्लैक मनी डे' मनाने के स्थान पर, केवल इसको 'नोटबन्दी माफी दिवस' के रूप में ही मनाना चाहिए, तो यह ज्यादा बेहतर होगा.
(2) मोदी सरकार की मनमानी, अड़ियल व निरंकुश रवैये के कारण ही देश एक प्रकार से आपातकाल के संकटकालीन दौर से गुजर रहा, जिससे मुक्ति प्राप्त करने के लिये लोगों को इनके द्वारा फैलाई गई भावनाओं के मकड़जाल से मुक्त होना जरूरी है.
(3) नोटबन्दी का फैसला दिखावटी तौर पर देशभर में व्याप्त व्यापक भ्रष्टाचार को समाप्त करने हेतु लिया गया था परन्तु लोगों को अधिकांशः दण्डित व प्रताड़ित करने वाला सरकारी भ्रष्टाचार हर स्तर पर कम होने के बजाय काफी बढ़ा है.
(4) बीजेपी एण्ड कम्पनी के करीबी व खास बड़े लोगों के भ्रष्टाचार, गैर-कानूनी व अनुचित कार्यों का एक-के बाद-एक पर्दाफाश होने से अब इस नरेन्द्र मोदी सरकार का भ्रष्टाचार का भाण्डा भी लगातार फूटता जा रहा है. 'पैराडाइज पेपर भाण्डाफोड़' आदि इस बात का ताज़ा प्रमाण है. 
(5) नोटबन्दी से अनेकों प्रकार के नये भ्रष्टाचार के श्रोतों का जन्म हुआ है जिसका भी लाभ बीजेपी एण्ड कम्पनी के करीबी व चहेतों ने ही उठाया है. 

 


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