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डोकलाम मुद्दे पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं और इसलिये कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकता’

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लद्दाख में भारत और चीन की सेना के बीच तनाव पैदा हो गया था.

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डोकलाम मुद्दे पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं और इसलिये कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकता’

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लद्दाख में भारत-चीन सेना के बीच तनाव पैदा हो गया था (प्रतीकात्मक चित्र)

नई दिल्ली: भारत ने कहा कि वह डोकलाम गतिरोध पर परस्पर स्वीकार्य समाधान निकालने के लिए चीन के साथ काम करता रहेगा, लेकिन तीन दिन पहले लद्दाख में घटी घटना जैसे वाकये किसी भी पक्ष के हित में नहीं हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि वे इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि 15 अगस्त को पांगोंग त्सो में एक घटना घटी थी. इस पर दोनों पक्षों के स्थानीय सैन्य कमांडरों ने बाद में चर्चा की थी. ये घटनाएं किसी भी पक्ष के हित में नहीं हैं. हमें अमन चैन बनाकर रखना चाहिए. हालांकि उन्होंने इस बात की पुष्टि नहीं की कि घटना में पथराव या सलाखों का इस्तेमाल शामिल था. 

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उन्होंने कहा, ‘मैंने केवल इतना कहा कि घटना घटी थी.’ उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि घटना को अन्य किसी क्षेत्र के घटनाक्रम से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. उन्होंने इस बात की भी पुष्टि नहीं की कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने चीन जाएंगे या नहीं जाएंगे.

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रवीश कुमार ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. डोकलाम गतिरोध की ताजा स्थिति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह एक संवेदनशील मुद्दा है. हम परस्पर स्वीकार्य समाधान खोजने के लिए चीन के साथ काम करते रहेंगे. द्विपक्षीय संबंधों के सुगम विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में अमन चैन महत्वपूर्ण जरूरत है. जब पूछा गया कि डोकलाम गतिरोध का हल कब तक निकल जाएगा तो उन्होंने कहा, ‘मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं और इसलिये कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकता.’ लद्दाख की घटना के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सीमा पर तैनात भारत और चीन के जवानों के बीच हाल ही में दो बैठकें हो चुकी हैं.

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उन्होंने कहा कि एक बीपीएम चूशूल में 16 अगस्त को और इससे एक सप्ताह पहले एक बैठक नाथू ला में हुई थी. असम में बाढ़ की पृष्ठभूमि में चीन की ओर से जल संबंधी आंकड़े जारी किये जाने के बारे में पूछे जाने पर प्रवक्ता ने कहा कि 2006 में स्थापित एक विशेषज्ञ स्तर की प्रणाली है और दो एमओयू भी हैं जिनके तहत चीन से 15 मई से 15 जून के दौरान बाढ़ के मौसम में भारत के साथ सतलज और ब्रह्मपुत्र नदियों पर जलीय आंकड़े साझा करने की अपेक्षा है.

प्रवक्ता ने कहा कि इस साल के लिए हमें चीनी पक्ष से कोई जलीय डाटा नहीं मिला है. हालांकि उन्होंने कहा कि इसे असम में बाढ़ से जोड़ना जल्दबाजी होगी और चीन द्वारा आंकड़े साझा नहीं करने के पीछे तकनीकी कारण हो सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में बाढ़ के मद्देनजर भारत केंद्र और राज्यस्तर पर नेपाल के साथ करीब से तालमेल रख रहा है. डोकलाम गतिरोध पर जापान के राजदूत के बयान के बारे में आई खबरों पर प्रवक्ता ने कहा कि यह बहुत संतुलित प्रतिक्रिया है.

जापानी राजदूत के हवाले से मीडिया में खबरें आई थीं कि किसी देश को डोकलाम की स्थिति में बदलाव करने के लिए एकपक्षीय तरीके से बलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. कुमार ने डोकलाम के मुद्दे पर भारत के साथ अन्य देशों की बातचीत का ब्योरा साझा करने से भी मना कर दिया. भारतीयों को बहुत बुरी स्थिति में दिखाने वाले चीन के सरकारी मीडिया द्वारा डाले गये एक वीडियो के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि वह कोई जवाब देकर इसका महत्व नहीं बढ़ाना चाहते.

(इनपुट भाषा से)


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