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जोधपुर कोर्ट का वह वकील जिसके आगे नहीं टिक पाए सुप्रीम कोर्ट के नामी वकील, सूझबूझ से आसाराम को मिली उम्रकैद

राजस्थान की जोधपुर कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले पीसी सोलंकी सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले तमाम नामी वकीलों के ऊपर भारी पड़े

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जोधपुर कोर्ट का वह वकील जिसके आगे नहीं टिक पाए सुप्रीम कोर्ट के नामी वकील, सूझबूझ से आसाराम को मिली उम्रकैद

पीसी सोलंकी

खास बातें

  1. जोधपुर कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं पीसी सोलंकी
  2. पीड़िता की तरफ से लड़ा मुकदमा
  3. सुप्रीम कोर्ट के दिग्गज वकीलों पर पड़े भारी
नई दिल्ली:

पीसी सोलंकी. ये वो नाम है, जिसकी मेहनत और सूझबूझ की बदौलत रेप केस में आसाराम को उम्रकैद की सजा मिली. राजस्थान की जोधपुर कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले पीसी सोलंकी सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले तमाम नामी वकीलों के ऊपर भारी पड़े. आसाराम की तरफ से जहां सुब्रमण्यम स्वामी, राम जेठमलानी ,राजू रामचंद्रन, केटीएस तुलसी, सिद्धार्थ लूथरा, सीवी नागेश  जैसे बड़े वकीलों ने केस लड़ा. तो वहीं पीड़िता की तरफ से पीसी सोलंकी ने मुकदमा लड़ा और कोर्ट में डटे रहे. आसाराम को उम्रकैद की सजा दिलाकर दम लिया. पीड़िता की तरफ से विशेष सरकारी वकील भी केस लड़ रहे थे. 

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नहीं समझा खुद को कमजोर, आखिर तक डटे रहे :
पीसी सोलंकी ने जनवरी 2014 में इस केस को अपने हाथ में लिया था. आसाराम जैसे रसूखदार व्यक्ति के खिलाफ केस होने की वजह से उनके ऊपर काफी दबाब था. अक्सर यह लगता था कि अगर केस हार जाएंगे तो पीड़िता को इन्साफ नहीं मिल पाएगा. इस बीच कोर्ट में उनके सामने सुप्रीम कोर्ट के दिग्गज वकील खड़े हुए, लेकिन सोलंकी न तो कभी दवाब में आए और न ही अपने आप को कमज़ोर समझा. वह केस की मेरिट पर आगे बढ़ते चले गए औऱ पूरी उम्मीद थी कि मेरिट पर ही उन्हें जीत मिलेगी.

एनडीटीवी से बातचीत में पीसी सोलंकी ने कहा कि मीडिया सिर्फ इस केस से जुड़े बड़े-बड़े वकीलों को कवर करता था. सुब्रमण्यम स्वामी जब जोधपुर केस लड़ने पहुंचे थे, तब उन्होंने बयान दिया था कि वह कभी केस नहीं हारे हैं और आसाराम बापू को जेल से बाहर निकाल लेंगे, लेकिन मुझे पूरा भरोसा था कि आसाराम को कोई भी वकील बचा नहीं सकता है. मैं केस को लेकर पूरी तरह डेडिकेटेड था. 

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प्रलोभन और दबाव के आगे भी नहीं डिगे : 
पीसी सोलंकी ने कहा कि उनके उपर बाहर से ज्यादा दबाव नहीं था, लेकिन कई बार उन्हें दूसरी तरफ से प्रलोभन देने की कोशिश की गई, लेकिन वह रास्ते से नहीं भटके. कभी भी दवाब के सामने नहीं झुका. वह कहते हैं कि जब भी मेरे उपर दबाव डालने की कोशिश की गई, तो मैं अपने प्रयास को दोगुना कर देता था. मेरे लिए यह केस एक मिशन था और इस केस को किसी भी हालत में जीतना चाहता था. आपको बता दें कि, पीसी सोलंकी के पिता इंडियन रेलवे में मैकेनिक थे. सोलंकी की स्कूलिंग केंद्रीय विद्यालय और एयरफोर्स स्कूल में हुई है. सोलंकी ने कॉमर्स में ग्रेजुएशन करने के बाद एलएलबी और एलएलएम किया है. 

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आसाराम के खिलाफ केस की वजह से कई दूसरे केस छोड़े : 
पीसी सोलंकी कहते हैं कि आसाराम के खिलाफ केस बहुत कठिन था और काफी समय देना पड़ता था. इस वजह से मैंने कई दूसरे केस छोड़ दिए. पूरा ध्यान इसी केस पर केंद्रित किया. अक्टूबर 1997 से लॉ की प्रैक्टिस कर रहे पीसी सोलंकी को लिखने का भी शौक है. वह कानून की किताबों के साथ साथ अखबारों में लेख भी लिखते हैं. वह कहते हैं कि हिंदुस्तान का कानून हल्का नहीं है, लेकिन इसे हल्के में लिया जाता है. किसी भी काम को अगर डेडिकेशन और इमानदारी के साथ किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है. हां...इसमें देरी जरूर हो सकती है, लेकिन हारने का चांस कम रहता है.

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