कश्मीर के हालात पर बात करते-करते अपने आंसू नहीं रोक पाईं मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती

कश्मीर के हालात पर बात करते-करते अपने आंसू नहीं रोक पाईं मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती

श्रीनगर:

जम्मू एवं कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती गुरुवार को उस समय अपने आंसू नहीं रोक पाईं, जब वह श्रीनगर में अन्य राजनैतिक दलों के साथ कश्मीर के हालात पर चर्चा कर रही थीं, और उनसे अनुरोध कर रही थीं कि वे सभी अपने-अपने 'अच्छे ताल्लुकात' का सहारा लें, और इस संकट को खत्म कराएं।

केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार का नेतृत्व कर रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ मिलकर जम्मू एवं कश्मीर में सरकार चलाने वाली पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा, "मैं आप सभी से अनुरोध करती हूं, अपने ताल्लुकात का इस्तेमाल करें... हमें इस संकट से निपटना ही होगा... हमें बात करनी चाहिए, रास्ते खोलने के बारे में, पाकिस्तान से बातचीत के बारे में... इसके अलावा भारत सरकार से अन्य मसलों के बारे में भी..."

विपक्षी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बैठक का बहिष्कार किया था। वरिष्ठ पार्टी नेता नासिर असलम ने कहा, "हमारे कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री से कहा था कि स्थिति को सामान्य करने के लिए कदम उठाएं... लेकिन उन्हें जवाब देने में और यह सर्वदलीय बैठक बुलाने में दो हफ्ते लग गए... अब बहुत देर हो चुकी है... बहुत-से लोग मारे जा चुके हैं, और घायल हो चुके हैं..."

पांच घंटे तक चली बैठक के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग का दौरा किया, जो इसी महीने की शुरुआत में हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच उमड़े संघर्ष का केंद्र रहा है। बीते दो हफ्तों में अब तक इन हिंसक संघर्षों में 45 लोगों की जान जा चुकी है, और 2,000 से भी ज़्यादा लोग ज़ख्मी हो चुके हैं।

प्रदर्शनों और संघर्षों की कई वारदात हो जाने के बाद पहली बार जनता के बीच पहुंचीं मुख्यमंत्री ने सुरक्षाबलों की गोलीबारी में मारे गए लोगों के परिवारों से मिलकर संवेदना जताई।

श्रीनगर में हुई बैठक में उन्होंने बहुत-से लोगों के बारे में बात की थी, और उस बातचीत में उन बच्चों का ज़िक्र भी शामिल था, जिनकी आंखों की रोशनी सुरक्षाबलों द्वारा भीड़ को काबू में रखने के लिए चलाई गई पेलेट की वजह से चली गई। वैसे, यह मुद्दा कश्मीर मुद्दे पर बहस के दौरान संसद में भी उठा था।

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मुख्यमंत्री ने बताया, "30 से भी ज़्यादा लोगों की एक आंख की रोशनी चली गई है, जबकि कम से कम तीन लोगों की दोनों आंखें खराब हो गई हैं..."

अपने अनंतनाग दौरे में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि 'कुछ लोग जवान बच्चों की लाशों पर सिर्फ राजनीति करना चाह रहे हैं, जबकि दर्द के साथ तो सारी उम्र उन जवान बच्चों के परिवारों को जीना है...'