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गृह मंत्रालय में आठ साल से अटका एलओसी के लिए फुल बॉडी स्कैनर खरीदने का मामला

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गृह मंत्रालय में आठ साल से अटका एलओसी के लिए फुल बॉडी स्कैनर खरीदने का मामला

नियंत्रण रेखा पर स्कैनर लगाने की योजना पर सरकारी दफ्तरों की लालफीताशाही के कारण अमल नहीं हो पा रहा है.

नई दिल्ली: लालफीताशाही का सही उदाहरण देश की सुरक्षा से जुड़े मंत्रालय में देखने को मिल रहा है. पिछले आठ सालों से केंद्रीय गृह मंत्रालय में फुल बॉडी स्कैनर खरीदने की प्रक्रिया चल रही है. दफ्तरों की लापरवाहीपूर्ण कार्यशैली के कारण यह मामला सरकारी कागजों में  दबा हुआ है.

दरअसल साल 2009 से मंत्रालय ने फुल बॉडी स्कैनर खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी. यह स्कैनर जम्मू-कश्मीर के उन चेक पोस्टों पर लगाए जाएंगे जहां से नियंत्रण रेखा के आर-पार व्यापार होता है, यानी चकांदाबाद और सलमाबाद. एक वरिष्ठ अधिकारी ने एनडीटीवी इंडिया को बताया कि  "इनके जरिए जो भी ट्रक पाकिस्तान की ओर से भारत आ रहे हैं, उन्हें स्कैन किया जा सकेगा ताकि उनमें कोई गैरकानूनी सामान भारत स्मगल न किया जा सके."  

अधिकारी के मुताबिक यह प्रस्ताव तब आया था जब पी चिदंबरम गृह मंत्री थे, लेकिन लालफीताशाही के चलते इस पर अभी तक अमल नहीं हुआ है.  उन्होंने कहा कि "यह स्कैनर लगाना आसान नहीं. अगर आज भी मंत्रालय खरीद लेता है तो जगह पर फिक्स करने के लिए एक साल लग जाएगा, क्योंकि यह पार्ट्स में आता है."

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मंत्रालय फिलहाल दो बॉडी स्कैनर खरीदने जा रहा है. इनकी कीमत कई करोड़ रुपये है. अच्छी बात यह है कि इन्हें भारत की कम्पनी बना रही है, लेकिन मामला किसी न किसी फाइल में अटका हुआ है.

गौरतलब है कि बुधवार को चकोटी से आए एक ट्रक में काफी असला-बारूद मिला था. इस मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ट्रक के ड्राइवर इरशाद को गिरफ्तार किया है. पुलिस की मानें तो ट्रक में खास तरह की कैविटी बनाई गई थी जिसमें यह हथियार छुपाए गए थे. पुलिस के पास हैंड हेल्ड स्कैनर तो है, लेकिन फुल बॉडी स्कैनर अगर इन दो पोस्टों पर लग जाते हैं तो सुरक्षा के लिहाज से यह एक अच्छा कदम होगा.


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