प्रवासी मजदूर पलायन: गुड़गांव से भागलपुर के लिए परिवार संग रिक्शे पर निकले, पता नहीं कब घर पहुंचेंगे?

कोरोना वायरस से बचाव के लिए लगाए गए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन का असर अब दर्दनाक तस्वीरों के जरिए सामने आ रहा है. बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों का पलायन जारी है.

इटावा :

कोरोना वायरस से बचाव के लिए लगाए गए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन का असर अब दर्दनाक तस्वीरों के जरिए सामने आ रहा है. बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों का पलायन जारी है. सरकार के तमाम दावों के उलट लोग पैदल, साइकिल और रिक्शों से सैकड़ों मीलों का सफर पैदल पूरा करने निकले हुए हैं. इसी कड़ी में गुड़गांव से बिहार का सफर पूरा करने निकले अजीत भी नजर आए. जोकि पैडल वाले रिक्शा से हजारों किलोमीटर का सफर परिवार के साथ पूरा करने निकले हैं. उन्होंने NDTV को बताया कि वो गुड़गांव से बिहार के भागलपुर जा रहे हैं. सरकार द्वारा चलाई जा रही ट्रेनों के लिए रजिस्ट्रेशन भी करवाए थे लेकिन जब पुलिस के पास गए तो उन्हें भगा दिया गया लिहाजा उन्होंने तय किया कि  वह अपने रिक्शे से इस सफऱ को पूरा करेंगे. गुड़गांव से चले अजीत को नहीं पता कि वह कब तक भागलपुर पहुंचेंगे. 

ऐसा ही कुछ हाल आगरा लखनऊ हाईवे पर सलाम का भी नजर आया. वो दिल्ली से रिक्शे पर पटना के लिए निकले हैं, अभी इटावा पहुंचे हैं. उन्होंने बताया कि पिछले 1.5 महीने से दिल्ली में थे. खाने-पीने की बहुत परेशानी थी. घर से बाहर निकलो तो पुलिस मारती थी. आखिर में हमने तय किया कि पटना जाएंगे. 

आजादी के बाद शायद महानगरों से गांव की ओर का अब तक सबसे बड़ा पलायन है. रिक्शे वाले, पेंटर, राजमिस्त्री से लेकर महानगरों को चमकदार बनाने वाले इन श्रमिकों को आज करोना की बीमारी से ज्यादा सरकारों की बेरुखी ज्यादा सता रही है. गांव में भी इनकी जिंदगी आसान नहीं है, लेकिन ट्रकों में सामान भरकर जाना, मानव स्वभाव नहीं, बल्कि एक बड़ी बेबसी का सबब जरुर दिख रही है. 
 

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