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CAA पर मुसलमानों में 'गलतफहमी और डर' दूर करने के लिए संगोष्ठियां आयोजित करेगा अल्पसंख्यक आयोग

रिजवी ने कहा, ''राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग उत्तर प्रदेश में छह जगहों पर सीएए के समर्थन में संगोष्ठियों का आयोजन करने जा रहा है. पहली संगोष्ठी लखनऊ में 10 जनवरी को होगी''.

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CAA पर मुसलमानों में 'गलतफहमी और डर' दूर करने के लिए संगोष्ठियां आयोजित करेगा अल्पसंख्यक आयोग

रिजवी ने कहा, इन संगोष्ठियों में बुद्धिजीवियों को न्यौता दिया जाएगा और उनसे CAA पर संवाद होगा.

खास बातें

  1. मुसलमानों की CAA को लेकर गलतफहमी दूर करेगा अल्पसंख्यक आयोग
  2. पहली संगोष्ठी लखनऊ में 10 जनवरी को होगी
  3. इन संगोष्ठियों में सिर्फ सीएए पर बात की जाएगी.
नई दिल्ली:

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (National Minorities Commission) संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर मुस्लिम समुदाय में 'गलतफहमी और डर' को दूर करने के लिए शुक्रवार से उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) एवं देश के कई अन्य हिस्सों में संगोष्ठियों का आयोजन करने जा रहा है. आयोग के अध्यक्ष सैयद गैयूरुल हसन रिजवी के अनुसार उत्तर प्रदेश के छह शहरों और पश्चिम बंगाल, हैदराबाद तथा मैंगलोर में प्रस्तावित इन संगोष्ठियों में इमामों, उलेमा तथा मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवियों को मुख्य रूप से न्योता दिया जाएगा तथा उनके सीएए पर संवाद होगा.

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दूसरी तरफ, देश के कुछ प्रमुख मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों ने आयोग की इस पहल पर मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है. कुछ का कहना है कि अगर 'सकारात्मक संवाद' होता तो वह बिल्कुल सही है जबकि 'ऑल इंडिया मुसलिम मजलिस - ए - मुशावरत' ने इसे 'निरर्थक पहल' करार दिया है. रिजवी ने बताया, ''राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग उत्तर प्रदेश में छह जगहों पर सीएए के समर्थन में संगोष्ठियों का आयोजन करने जा रहा है. पहली संगोष्ठी लखनऊ में 10 जनवरी को होगी. इसके बाद दूसरी 12 जनवरी को कानपुर, तीसरी 12 जनवरी को ही जौनपुर, चौथी 13 जनवरी को गोरखपुर, पांचवीं 14 जनवरी को मेरठ और छठी 15 जनवरी को मेरठ में होगी.''


उन्होंने कहा, ''उत्तर प्रदेश को छह क्षेत्र में बांटा गया है. हर क्षेत्र में एक एक संगोष्ठी करेंगे. हमारी कोशिश होगी इनमें राज्य के सभी जिले से लोग शामिल हों''. उन्होंने कहा, ''पश्चिम बंगाल, हैदराबाद, मंगलोर में भी इसी महीने कार्यक्रम होना है. लेकिन अभी तारीख तय नहीं हुई है.'' रिजवी ने कहा, ''मुसलमानों को समझाने की कोशिश की जाएगी कि सीएए किसी की नागरिकता लेता नहीं, बल्कि नागरिकता देता है. मुसलमानों में नागरिकता जाने का भ्रम फैल गया है और कुछ लोगों ने डर भी पैदा किया है. हमारी कोशिश है कि गलतफहमी और डर दूर हो.''

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एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ''उत्तर प्रदेश में बहुत मुस्लिम आबादी बहुत ज्यादा है. वहां गलतफहमी के कारण ज्यादा हिंसा हो गई. एक कारण यह भी है कि हम वहां ज्यादा संगोष्ठियां कर रहे हैं.'' उन्होंने यह भी कहा, ''इन संगोष्ठियों में सिर्फ सीएए पर बात होगी. एनआरसी और एनपीआर पर कोई बात नहीं होगी.'' आयोग की इस पहल के बारे में पूछे जाने पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कमाल फारूकी ने कहा, ''अगर कोई सकारात्मक संवाद होता है तो सही है. संवाद होना चाहिए. अगर वो हमें बुलाते हैं तो हम जाएंगे और अपनी बात मजबूती से रखेंगे.''

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दूसरी तरफ, मुशावरत के अध्यक्ष नवेद हामिद ने कहा, ''मुझे यह निरर्थक लगती है. सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान कई लोगों की जाने गईं और उस पर आयोग ने खामोशी पर मुझे सख्त ऐतराज है. अगर हमें आमंत्रित किया जाता है तो हम बैठक के एजेंडा के मुताबिक उसमें जाने या नहीं जाने का निर्णय करेंगे.''

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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