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महाराष्ट्र में बिना मुख्यमंत्री के ही विधायकों ने ली शपथ, जानें क्या है इसके पीछे वजह

राज्य विधान भवन के प्रभारी सचिव राजेंद्र भागवत ने बताया कि बीते कई दशकों से यह परंपरा चली आ रही है कि सबसे पहले शपथ मुख्यमंत्री लेते हैं और उनके बाद अन्य सदस्यों को शपथ दिलवायी जाती है.

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महाराष्ट्र में बिना मुख्यमंत्री के ही विधायकों ने ली शपथ, जानें क्या है इसके पीछे वजह

महाराष्ट्र में बिना मुख्यमंत्री के विधायकों ने ली शपथ

मुंबई:

महाराष्ट्र की 14वीं विधानसभा के सदस्यों का बुधवार को शुरू हुआ शपथ गहण समारोह कुछ मायने में भिन्न था. यह महाराष्ट्र में पहली बार हुआ जब सदन का विशेष सत्र आरंभ हुआ तब तक न तो सरकार का गठन हुआ था और न ही मुख्यमंत्री नियुक्त हुए थे. राज्य विधान भवन के प्रभारी सचिव राजेंद्र भागवत ने बताया कि बीते कई दशकों से यह परंपरा चली आ रही है कि सबसे पहले शपथ मुख्यमंत्री लेते हैं और उनके बाद अन्य सदस्यों को शपथ दिलवायी जाती है.
उन्होंने कहा, ‘‘इसके तुरंत बाद या फिर उसके बाद के सत्र में शक्ति परीक्षण करवाया जाता है. इस मामले में मुख्यमंत्री ने तो शपथ ली ही नहीं लेकिन सदन के सदस्यों को शपथ ग्रहण करवाई गई.''

महाराष्ट्र विधानसभा के विशेष सत्र में प्रोटेम स्पीकर ने विधायकों को दिलवाई शपथ


राजेंद्र भागवत ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय के अंतरिम आदेश के चलते शपथ ग्रहण समारोह करवाना हमारे लिए अनिवार्य हो गया था. सभी सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद विधानसभा बिना प्रमुख और बिना मंत्रिमंडल के ही आरंभ हो जाएगी.'' राजेंद्र भागवत ने कहा कि मुख्यमंत्री को शपथ लेने के बाद मंत्रिमंडल का गठन करना होगा.
उन्होंने बताया, ‘‘अगले पूर्ण सत्र का कार्यक्रम मंत्रिमंडल की पहली बैठक में तय होगा. शक्ति परीक्षण उसी सत्र में होगा.''
महाराष्ट्र में 288 विधायकों को शपथ दिलाने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुधवार सुबह आरंभ हो गया.

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प्रोटेम स्पीकर कालीदास कोलांबकर ने विधायकों को शपथ दिलाया सदन के वरिष्ठ विधायकों अजित पवार, छगन भुजबल, अशोक चव्हाण और पृथ्वीराज चव्हाण ने पहले शपथ लिया. गौरतलब है कि  राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कोलांबकर को मंगलवार शाम को विधानसभा का प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया था. नव निर्वाचित सदस्य राज्य में चल रहे नाटकीय घटनाक्रमों के कारण विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के एक महीने बाद भी शपथ नहीं ले पाए थे.

किसी भी राजनीतिक दल के सरकार न बना पाने के कारण राज्य में 12 नवंबर से 23 नवंबर तक राष्ट्रपति शासन लागू रहा.
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को राज्यपाल कोश्यारी से कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त करने और यह सुनिश्चित करने को कहा था कि सदन के सभी निर्वाचित सदस्यों को बुधवार शाम पांच बजे तक शपथ दिला दी जाए. NCP नेता अजित पवार के समर्थन से 23 नवंबर को बनी भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार मंगलवार दोपहर को तब गिर गयी थी जब पवार ने उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और बाद में देवेंद्र फडणवीस को भी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

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शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के ‘महाविकास अघाड़ी' ने सोमवार को 162 विधायकों का समर्थन होने का दावा करते हुए राज्यपाल को एक पत्र सौंपा था. NCP ने घोषणा की थी कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री होंगे. वह 28 नवबंर की देर शाम दादर में स्थित शिवाजी पार्क में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. 

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(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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