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मोदी सरकार ने 30 PSLV और 10 GSLV एमके III लॉन्‍च के लिए 10,000 करोड़ की मंजूरी दी, कैबिनेट ने लिए ये 6 फैसले

केन्‍द्र की पीएम मोदी सरकार ने पोलर उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) और भू - समकालिक (जिओसिंक्रोनस) उपग्रह प्रक्षेपण वाहन मार्क -3 कार्यक्रमों को जारी रखने को मंजूरी दे दी है.

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मोदी सरकार ने 30 PSLV और 10 GSLV एमके III लॉन्‍च के लिए 10,000 करोड़ की मंजूरी दी, कैबिनेट ने लिए ये 6 फैसले

पीएम मोदी (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. उपग्रह प्रक्षेपण वाहन मार्क -3 कार्यक्रमों को जारी रखने को मंजूरी मिली
  2. इसरो को हल्के और भारी वजन के उपग्रहों के प्रक्षेपण में मदद मिलेगी
  3. भारत-रूस संयुक्‍त डाक टिकट जारी करने को भी मिली मंजूरी
नई दिल्ली: केन्‍द्र की पीएम मोदी सरकार ने पोलर उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) और भू - समकालिक (जिओसिंक्रोनस) उपग्रह प्रक्षेपण वाहन मार्क -3 कार्यक्रमों को जारी रखने को मंजूरी दे दी है. इस पर संयुक्त रूप से 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी. इस कदम से इसरो को हल्के और भारी वजन के उपग्रहों के प्रक्षेपण में मदद मिलेगी. पीएसएलवी के परिचालन से देश पृथ्‍वी अवलोकन, आपदा प्रबंधन, दिशा सूचक और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए उपग्रह प्रक्षेपण क्षमता में आत्‍मनिर्भर बना है. 

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1-  PSLV और GSLV के लिए 10 हजार करोड़ रुपये की मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पीएसएलवी जारी रखने के कार्यक्रम (छठें चरण) के साथ 30 पीएसएलवी परिचालन प्रक्षेपण को वित्‍तीय सहायता प्रदान करने की भी मंजूरी दी है. यह कार्यक्रम पृथ्‍वी अवलोकन, दिशा सूचक और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए सेटेलाइट के प्रक्षेपण की आवश्‍यकता को भी पूरा करेगा. यह भारतीय उद्योग में उत्‍पादन जारी रखना सुनिश्चत करेगा. आधिकारिक बयान के अनुसार इसके लिये कुल 6,131 करोड़ रुपये के कोष की आवश्‍यकता है और इसमें 30 पीएसएलवी यान, आवश्‍यक सुविधा बढ़ाने, कार्यक्रम प्रबंधन और प्रक्षेपण अभियान की लागत शामिल है. पीएसएलवी कार्यक्रम जारी रखने के छठे चरण के दौरान भारतीय उद्योग की भागीदारी से प्रतिवर्ष आठ प्रक्षेपण करने की सेटेलाइट प्रक्षेपण की मांग पूरी होगी. 2019-2024 की अवधि के दौरान सभी परिचालन अभियान संपन्‍न हो जाएंगे. पीएसएलवी जारी रखने का कार्यक्रम 2008 में शुरू किया गया था और इसके चार चरण पूरे हो चुके हैं. 2019-20 के पहले छह माह तक पांचवें चरण के संपन्‍न होने की आशा है. छठे चरण की मंजूरी से 2019-20 से 2023-24 के पहले तीन माह के दौरान सेटेलाइट प्रक्षेपण अभियान में मदद मिलेगी. हाल ही में 12 अप्रैल 2018 को पीएसएलवी - सी 41 के सफल प्रक्षेपण के साथ ही पीएसएलवी ने तीन विकास और 43 परिचालन प्रक्षेपण संपन्‍न किए हैं तथा पिछले 41 प्रक्षेपण भी सफल रहे हैं. इसके साथ मंत्रिमंडल ने भू - समकालिक (जिओसिंक्रोनस) उपग्रह प्रक्षेपण वाहन मार्क -III के लिए निरंतरता कार्यक्रम को मंजूरी दी. इसमें दस जीएसएलवी (एमके -III) उड़ानें शामिल हैं तथा जिसकी कुल अनुमानित लागत 4338.20 करोड़ रुपये है. जीएसएलवी एमके -III निरंतरता कार्यक्रम - चरण 1 परिचालन उड़ानों का पहला चरण है जो देश की उपग्रह संचार आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु चार टन वर्ग के संचार उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में सक्षमता प्रदान करेगा। इससे देश के अंतरिक्ष के बुनियादी ढांचे को बनाए रखने एवं मजबूत करने तथा विदेशी प्रक्षेपण पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. 

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2- भारत-रूस संयुक्‍त डाक टिकट जारी करने को मंजूरी 
सरकार ने भारत और रूस के बीच संयुक्‍त डाक टिकट जारी करने को मंजूरी दी है. मंत्रिमंडल की बैठक में भारतीय डाक विभाग और रशिया पोस्‍ट (रूसी संघ की संयुक्‍त साझेदारी वाली कंपनी ‘मार्क’ के बीच संयुक्‍त डाक टिकट जारी करने के संबंध में हुए समझौते से अवगत कराया गया. इसका उद्देश्‍य डाक टिकट जारी करने के क्षेत्र में पारस्‍परिक लाभ के लिए परिचालन उत्‍कृष्‍टता हासिल करना और डाक सेवा में सहयोग स्‍थापित करना है.

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3- यूपी के गन्‍ना किसनों को 8,500 करोड़ का एक सहायाता पैकेज
यूपी के गन्ना उत्पादक क्षेत्र में उपचुनावों में भाजपा की हार के कुछ ही दिन के अंदर केंद्र सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए चीनी का बफर स्टॉक बनाने, चीनी मिलों की एथेनॉल उत्पादन क्षमता में विस्तार के लिए प्रोत्साहन और चीनी मिलों के नुकसान में कटौती के लिए चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य तय करने के उपायों के साथ 8,500 करोड़ रुपये का एक सहायाता पैकेज घोषित किया. मंत्रिमंडल की बैठक में गन्न की खपत बढ़ाने के लिए मिलों की एथेनॉल उत्पादन क्षमता के विस्तार के लिए 4,440 करोड़ रुपये के सस्ते कर्ज और 30 लाख टन चीनी का बफर स्टॉक बनाने की मंजूरी दी. इसके साथ ही सरकार ने पहली बार चीनी के लिए 29 रुपये प्रति किग्रा का न्यूनतम मूल्य तय किया है मिलों को इससे कम मूल्य पर चीनी बेचने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा. इन निर्णयों का उद्देश्य चीनी मिलों की मदद करना है ताकि उन्हें गन्ना किसानों के बकाए के भुगतान में कुछ सहूलियत हो सके. किसानों का मिलों पर 22,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया हो चुका है्. सितंबर में समाप्त होने वाले चीनी सत्र 2017-18 में 3.15 करोड़ टन के रिकॉर्ड उत्पादन के कारण चीनी कीमतें उत्पादन लागत से कम हो गई हैं जबकि चीनी की घरेलू वार्षिक मांग करीब 2.5 करोड़ टन की ही है. इस स्थिति के कारण चीनी मिलों को घाटे की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है.

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4- ग्रामीण डाक सेवकों के वेतन-भत्‍ता में 56 फीसदी का इजाफा
ग्रामीण डाक सेवकों के मूल वेतन को तीन गुना बढ़ाकर 14,500 रुपये प्रति माह तक करने की आज मंजूरी दे दी है। यह वृद्धि एक जनवरी 2016 से प्रभावी होगी. इन ग्रामीण डाक सेवकों के बकाया वेतन का भुगतान एक जनवरी 2016 से लेकर कार्यान्वयन तक एक ही किस्त में किया जाएगा. दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा,‘ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस) जिन्हें 2,295 रुपये प्रति माह वेतन मिल रहा था उन्हें 10000 रुपये वेतन मिलेगा. जिनका वेतन 2,745 रुपये था वह 12,000 रुपये हो जाएगा.’ इसी तरह जिन ग्रामीण सेवकों को 4,115 रुपये मिल रहे थे उन्हें 14,500 रुपये प्रति माह वेतन मिलेगा. बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की. सिन्हा ने कहा कि जीडीएस का वेतन प्रभावी रूप से उनके खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं था और वेतन में वृद्धि के इस फैसले से उनके जीवन में बदलाव आएगा. वेतन भत्‍तों में इस बदलाव के लिए वर्ष 2018-19 के दौरान 1257.75 करोड़ रुपये का बोझ आएगा. इसमें 860.95 करोड़ रुपये के गैर-आवर्ती खर्च तथा 396.80 करोड़ रुपये के आवर्ती खर्च का अनुमान है.

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5-खस्ताहाल सार्वजनिक उपक्रमों की जमीन पर सस्ती आवास योजनाओं को मिलेगी प्राथमिकता
सरकार ने नहीं चल पा रहे केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (PSUS) को बंद कर उनकी चल एवं अचल सम्पत्तियों का समय- बद्ध तरीके से निस्तारण करने के लिए संशोधित दिशा निर्देशों को आज मंजूरी दी. नए नियमों के अनुसार ऐेसे उपक्रमों की जमीन का आगे इस्तेमाल करने में सस्ते मकानों की योजनाओं को पहली प्राथमिकता दी जाएगी. सरकार की इस पहल से घाटे में चल रहे इन उपक्रमों को बंद करने की योजना के क्रियान्वयन में हो रही देरी को कम किया जा सकेगा. नये दिशानिर्देशों में परिसमापन प्रक्रिया में दिये गये केन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रमों की भूमि को आवास एवे शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत सस्ती आवास परियोजनाओं के लिये उपलब्ध कराने को पहली प्राथमिकता दी जायेगी. नये नियमों के मुताबिक ऐसे उपक्रमों के हर स्तर के कर्मचारी को सरकार द्वारा तय समान नीति के तहत 2007 के राष्ट्रीय वेतन मानकों के अनुरूप स्वैच्छिक सेवानिवृति (वीआरएस) पैकेज दिया जाएगा. 

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6- इलाहाबाद में गंगा नदी पर 6-लेन पुल के निर्माण को सरकार की मंजूरी
उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में गंगा नदी पर 10 किलोमीटर लंबा पुल बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. नए पुल के निर्माण में 1,948 करोड़ रुपये की लागत आएगी.  सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बयान में कहा, "सीसीईए ने ... इलाहाबाद के फाफामऊ में राष्ट्रीय राजमार्ग -96 पर गंगा नदी के ऊपर 9.9 किलोमीटर लंबा 6- लेन पुल बनाने की परियोजना को मंजूरी दे दी है , इस पर 1,948.25 करोड़ रुपये का खर्च आएगा." इस परियोजना के दिसंबर 2021 तक पूरा होने की उम्मीद है. नए पुल से मौजूदा 2- लेन फाफामऊ पुल पर भीड़भाड की समस्या दूर होगी. यह कुंभ , अर्ध कुंभ और ' संगम ' में होने अन्य अनुष्ठानों के दौरान भीड़भाड़ आर जाम को कम करने में मदद करेगा और इससे इलाहाबाद के तीर्थ पर्यटन एवं घरेलू अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा. नया पुल मध्य प्रदेश से राष्ट्रीय राजमार्ग -27 के रास्ते और नैनी पुल के रास्ते एनएच 76 से लखनऊ - फैजाबाद ज ने वाले वाहनों के लिए भी सुविधाजनक होगा. मंत्रालय ने बयान में कहा कि इस परियोजना के निर्माण के दौरान लगभग 9.20 लाख कार्यदिवस के बराबर रोजगार पैदा होंगे. सरकार ने कहा कि मई 2014 से पहले इलाहाबाद से फरक्का के बीच गंगा पर केवल 13 पुल थे लेकिन 2014 के बाद 20 नए पुल बनाने की योजना बनाई गई थी, जिनमें से पांच को खोल दिया गया और सात पुलों पर काम चल रहा है.

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VIDEO: ग्रामीण डाकसेवकों के वेतन-भत्ते बढ़ाने का फैसला


 


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