राहुल गांधी के संघ की तुलना ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से करने वाले बयान मोहन भागवत ने दिया यह जवाब

संघ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन मोहन भागवत ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उस बयान का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने संघ की तुलना मस्लिम ब्रदरहुड से की थी.

राहुल गांधी के संघ की तुलना ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से करने वाले बयान मोहन भागवत ने दिया यह जवाब

मोहन भागवत (फाइल फोटो)

खास बातें

  • मोहन भागवत ने राहुल गांधी के बयान पर जवाब दिया
  • मुस्लिम ब्रदरहुड वाले बयान पर दिया जवाब
  • बिना नाम लिए उन्होंने दियाा जवाब
नई दिल्ली:

संघ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन मोहन भागवत ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उस बयान का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने संघ की तुलना मस्लिम ब्रदरहुड से की थी. मोहन भागवत ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि संघ वैश्विक ब्रदरहुड की बात करता है. इस ब्रदरहुड का सिद्धांत है विविधता में एकता. यह हिंदुत्व की संस्कृति है. इसीलिए इसे हम हिंदू राष्ट्र कहते हैं. गौरतलब है कि राहुल गांधी ने बीते दिनों लंदन में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आफ स्ट्रेटजिक स्टडीज (आईआईएसएस) के एक कार्यक्रम में ये बातें कही थी. उन्होंने कहा था कि संघ की तुलना इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से करते हुए कहा था कि आरएसएस भारत के हर संस्थान पर कब्जा कर देश के स्वरूप को ही बदलना चाहता है.

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उन्होंने कहा था, "हम एक संगठन से संघर्ष कर रहे हैं, जिसका नाम आरएसएस है जो भारत के मूल स्वरूप (नेचर आफ इंडिया) को बदलना चाहता है.भारत में ऐसा कोई दूसरा संगठन नहीं है जो देश के संस्थानों पर कब्जा जमाना चाहता हो." कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था, "हम जिससे जूझ रहे हैं वह एकदम नया विचार है. यह ऐसा विचार है जो अरब जगत में मुस्लिम ब्रदरहुड के रूप में पाया जाता है. और,  विचार यह है कि एक खास विचार को हर संस्थान को संचालित करना चाहिए, एक विचार को बाकी सभी विचारों को कुचल देना चाहिए."

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राहुल ने कुछ उदाहरणों के जरिए बात समझाते हुए कहा था, "आप सर्वोच्च न्यायालय के चार न्यायाधीशों की प्रतिक्रिया देखिए जो सामने आकर कहते हैं कि उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा है. आप रघुराम राजन (पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर) और नोटबंदी के झटके को देखिए. आप देख सकते हैं कि भारत के संस्थानों को कैसे एक-एक कर तोड़ा जा रहा है. इस सबका जवाब दिया जाना चाहिए. एक ऐसा जवाब जिसमें वे सब शामिल हों जो भारत ने जो कुछ हासिल किया है, उसका मूल्य समझते हों."