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क्या इस बार पास होंगे ट्रिपल तलाक और हलाला संबंधी विधेयक? आज से मॉनसून सत्र की शुरुआत

संसद में आज से मॉनसून (मानसून) सत्र की शुरुआत हो रही है. एक ओर जहां मोदी सरकार को उम्मीद है इस सत्र में कई सारे विधेयक पास होंगे.

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क्या इस बार पास होंगे ट्रिपल तलाक और हलाला संबंधी विधेयक? आज से मॉनसून सत्र की शुरुआत

प्रतीकात्मक तस्वीर

खास बातें

  1. आज से शुरू हो रहा है मॉनसून सत्र.
  2. विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है.
  3. सरकार को कई बिलों के पास होने की उम्मीद है.
नई दिल्ली: संसद में आज से मॉनसून (मानसून) सत्र की शुरुआत हो रही है. एक ओर जहां मोदी सरकार को उम्मीद है इस सत्र में कई सारे विधेयक पास होंगे, वहीं कांग्रेस कई मोर्चों पर मोदी सरकार को घेरने की तैयारियों में जुटी है. दरअसल, आज यानी 18 जुलाई से संसद का मॉनसून सत्र शुरू हो रहा है, उम्मीद की जा रही है कि इस बार पिछली बार की तरह हंगामेदार नहीं होगा. हालांकि, इसके लिए लोकसभा स्पीकर ने भी अपनी ओर से पहल की है. महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने का प्रयास करते हुए सरकार ने महिला आरक्षण, एक बार में तीन तलाक और निकाह हलाला संबंधी विधेयकों को संसद से पारित करने में सहयोग करने की मुख्य विपक्षी दल से अपील की. 

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कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मॉनसून सत्र शुरू होने से एक दिन पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर कहा कि इन विधेयकों को पारित कराने के अलावा पिछडा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्ज प्रदान करने के लिए उनकी पार्टी को भाजपा के साथ हाथ मिलाना चाहिए. विधानमंडलों में आरक्षण और निजी कानून आदि उनके मंत्रालय से ही संबंधित हैं. वह राहुल द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे. राहुल ने इस पत्र में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए विधेयक लाए जाने की बात की थी..

रविशंकर प्रसाद ने महिला आरक्षण विधेयक की मियाद खत्म होने को लेकर भी पिछली संप्रग सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा, ‘...सरकार पूरी तरह से समझना चाहेगी कि संप्रग सरकार द्वारा तीन सालों तक लोकसभा में बिल क्यों नहीं लाया गया और क्यों इसकी मियाद समाप्त होने दी गई. उन्होंने कहा कि राज्यसभा में बाधाओं के बावजूद भाजपा और राजग विधेयक के समर्थन में खड़े थे.

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उन्होंने राहुल गांधी से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि क्या सभी संप्रग सहयोगी और अन्य विपक्षी दल, जो कांग्रेस के साथ समन्वय कर रहे हैं, विधेयक का समर्थन करेंगे और सदन की कार्यवाही बाधित नहीं करेंगे, जैसा उन्होंने विगत में विधेयक संसद में पेश किए जाने के दौरान किया था. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राष्ट्रीय दलों के रूप में ‘हम महिलाओं और उनके अधिकारों से निपटने के मानकों के दो सेट नहीं रख सकते.’ उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण को लेकर "गहरी चिंता" दिखायी है, ऐसे में वह प्रस्ताव करते हैं कि दोनों राष्ट्रीय दलों, भाजपा और कांग्रेस साथ साथ आएं तथा भारतीय महिलाओं के लिए समानता और पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की खातिर भारतीय महिलाओं को एक नयी पेशकश करें.

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रविशंकर प्रसाद ने कहा कि तीन तलाक और निकाह हलाला के चलन से न केवल मुस्लिम महिलाओं के साथ असमान व्यवहार हुआ बल्कि उनकी गरिमा से भी समझौता किया गया. राहुल गांधी ने कल प्रधानमंत्री से आग्रह किया था कि वह 18 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराएं. पत्र में उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस विधेयक को पारित कराने में सरकार का पूरा सहयोग करेगी.

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