मानसून सत्र : भारत के इतिहास में पहली बार संसद में होगा ऐसा, एंट्री के लिए सख्त नियम

देश में कोरोना (COVID-19) के बढ़ते मामलों के बीच सोमवार से शुरू हो रहा संसद का विशेष मानसून सत्र ऐतिहासिक होगा.

मानसून सत्र : भारत के इतिहास में पहली बार संसद में होगा ऐसा, एंट्री के लिए सख्त नियम

प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली:

देश में कोरोना (COVID-19) के बढ़ते मामलों के बीच सोमवार से शुरू हो रहा संसद का विशेष मानसून सत्र ऐतिहासिक होगा. पहली बार भारत के इतिहास में लोक सभा के सांसद राज्य सभा में और राज्य सभा के सांसद लोक सभा में बैठेंगे. सभी सांसदों, अधिकारियों और पत्रकारों का कोविद टेस्ट होगा और नेगेटिव रिपोर्ट आने के बाद ही वो संसद परिसर में एंट्री कर पाएंगे.

लोकसभा सचिवालय ने सोमवार से शुरू हो रहे संसद के विशेष मानसून सत्र की तैयारियां पूरी कर ली हैं. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (Om Birla) ने गुरुवार को तैयारियों का जायजा लिया. 

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257 सांसद लोकसभा के मैन चैम्बर में बैठेंगे, 172 सांसदों को दर्शक दीर्घा में बिठाया जायेगा जबकि 60 लोकसभा सांसद राज्य सभा के मैन चैम्बर में बैठेंगे और बाकी के 51 सांसदों को राज्य सभा के दर्शक दीर्घा में बिठाया जायेगा.

किस पार्टी को कहां कितनी सीट अलॉट होगी, ये उनकी संख्या पर आधारित होगा. मानसून सत्र के पहले दिन 14 सितम्बर को लोकसभा सुबह 9 बजे बैठेगी और 1 बजे तक चलेगी. अन्य दिनों में लोक सभा की सीटिंग 3 बजे से 7 बजे तक होगी. सभी सांसदों को कोरोना टेस्ट करने को कहा गया है, कोरोना नेगेटिव सर्टिफिकेट होने पर ही संसद में उनकी एंट्री होगी.

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लोक सभा के स्पीकर ओम बिरला ने कहा, ''सभी सांसदों का आरटी-पीसीआर टेस्ट होगा. सभी मीडिया पर्सन और अधिकारियों का भी आरटी-पीसीआर टेस्ट होगा. स्पीकर ने संसदीय दलों को नेताओं से गुज़ारिश की है कि 60 साल से अधिक उम्र वाले सांसदों को दर्शक दीर्घा की सीट न दें. सांसदों की सुरक्षा के लिए उनकी सीट पर सामने और बगल में ग्लास की शील्डस लगायी गयी है. सेंट्रल हॉल में सिर्फ सांसदों को जाने की इजाजत होगी.''

क्या इस सत्र के दौरान लोकसभा के डिप्टी स्पीकर का इलेक्शन होगा, इस सवाल पर लोक सभा स्पीकर ने सीधा जवाब नहीं दिया. लोक सभा के स्पीकर ओम बिरला ने कहा, ''लोकसभा अध्यक्ष को उपाध्यक्ष नहीं बनाना है. लोक सभा को इलेक्ट करना है. जब चुनाव की तारीख तय होगी, आपको तारीख बता दिया जाएगा.''

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आज़ादी के बाद यह पहले मौका है, जब लोक सभा के सांसद राज्य सभा में और राज्य सभा के सांसद लोक सभा में बैठेंगे. सांसदों की सुरक्षा के लिए सख्त मानक तय किए गए हैं. अब लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय के सामने बड़ी चुनौती सत्र के दौरान इन मानकों को सख्ती से लागू करने की होगी.