किसान बिलों के समर्थन में बोले शिवराज सिंह चौहान- किसानों के भगवान हैं प्रधानमंत्री...

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'किसानों का भगवान' बताया और कहा कि संसद से पारित कृषि सुधार संबंधी विधेयकों से अन्नदाताओं की आय दोगुनी होगी.

किसान बिलों के समर्थन में बोले शिवराज सिंह चौहान- किसानों के भगवान हैं प्रधानमंत्री...

किसान विधेयकों के समर्थन में शिवराज सिंह चौहान ने दिया बयान. (फाइल फोटो)

इंदौर:

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को 'किसानों का भगवान' बताया और कहा कि संसद से पारित कृषि सुधार संबंधी विधेयकों (Farm Bills) से अन्नदाताओं की आय दोगुनी होगी. चौहान ने इन विधेयकों के विरोध में उतरे विपक्षी दलों को 'किसानद्रोही' करार दिया और आरोप लगाया कि वे बिचौलियों की पैरवी कर रहे हैं.

चौहान ने बुधवार को मीडिया के सामने किसान विधेयकों की तारीफ करते हुए कहा कि 'दूरदृष्टि से फैसले करने वाले प्रधानमंत्री किसानों के भगवान हैं. कृषि सुधारों से संबंधित तीनों विधेयक किसानों के लिए वरदान हैं जिनसे किसानों की आय दोगुनी होगी.' उन्होंने कहा, 'इन विधेयकों का विरोध कर रहे विपक्षी दल अन्नदाताओं के शुभचिंतक नहीं, बल्कि किसानद्रोही हैं. वे किसानों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं. लेकिन उनकी ये कोशिशें सफल नहीं होने दी जाएंगी.'

विपक्षी दलों पर हमला जारी रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, 'अगर कोई निर्यातक अच्छे दाम देकर सीधे किसानों से गेहूं और धान खरीदता है, तो किसी बिचौलिए की जरूरत क्या है? विपक्षी दल बिचौलियों का समर्थन क्यों कर रहे हैं.' उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दल कृषि विधेयकों को लेकर प्रधानमंत्री का नहीं, बल्कि किसानों के हितों का 'अंधविरोध' कर रहे हैं.

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बता दें कि मोदी सरकार के तीन किसान विधेयकों को लेकर संसद का मॉनसून सत्र हंगामा भरा रहा है. लगातार दो-तीन दिनों तक संसद के दोनों सदनों में जबरदस्त हंगामा हुआ था. विपक्ष ने मंगलवार को राज्यसभा का सदन का बहिष्कार कर दिया था, वहीं लोकसभा सदन का भी बहिष्कार करने की बात की थी.

विपक्ष ने तीन मांगें रखी थीं. उसकी पहली मांग थी कि सरकार एक नया बिल लाए जिसमें यह बात सुनिश्चित की जाए कि कोई भी प्राइवेट कंपनी MSP के नीचे किसानों से कोई उपज नहीं खरीद सकती हैं. उनकी दूसरी मांग थी कि स्वामीनाथन फॉर्मूला के तहत MSP देश में तय हो. और तीसरी मांग थी कि भारत सरकार राज्य सरकार या फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यह सुनिश्चित करें कि किसानों से निर्धारित MSP की रेट पर ही है उनकी उपज खरीदी जाए. बता दें कि बुधवार को संसद का मॉनसून सत्र कोविड-19 के चलते निर्धारित समय से आठ दिन पहले ही खत्म भी हो गया है.

Video: राज्यसभा में बिना विपक्ष के ताबड़तोड़ तरीके से विधेयक हुए पारित

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)