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सांसदों ने वेतन वृद्धि पर चर्चा की योजना छोड़ी

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सांसदों ने वेतन वृद्धि पर चर्चा की योजना छोड़ी

फाइल फोटो

नई दिल्‍ली:

सांसदों के वेतन एवं भत्तों में भारी बढ़ोतरी की सिफारिश को लेकर आलोचना का सामना कर रही एक संसदीय समिति ने सोमवार को मुद्दे पर चर्चा की योजना छोड़ दी और इसके बजाय सरकार से कहा कि वह उसकी मांगों को सही परिप्रेक्ष्य में पेश करे।

भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सांसदों के वेतन एवं भत्तों पर संयुक्त समिति ने अपनी अगली बैठक मॉनसून सत्र के बाद ही आयोजित करने का निर्णय किया। समिति ने संकेत दिया कि वह पहले दिये अपने प्रस्तावों में से कई को वापस ले सकती है।

सूत्रों ने कहा कि यद्यपि बैठक का एजेंडा सांसदों के लिए कार ऋण पर चर्चा करने का था, बैठक के लगभग आधे समय सांसदों की ओर से उठायी गई चिंता ही छायी रही कि उनके वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी के मुद्दे को इस तरह से पेश किया जा रहा है कि उससे उनकी छवि को ‘नुकसान’ हो रहा है।

एक सूत्र ने कहा, ‘सांसदों के मामले को ठीक ढंग से नहीं रखा गया। सदस्यों ने इस बारे में बैठक में चिंता जतायी।’ सूत्र ने कहा कि सदस्यों का मानना था कि सरकार को मांगों को सही परिप्रेक्ष्य में पेश करना चाहिए।


संसदीय मामलों के मंत्रालय ने समिति की अधिकतर सिफारिशों को पहले ही खारिज कर दिया है। इसके साथ ही कांग्रेस और भाजपा जैसी प्रमुख पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं की ओर से असहमति की टिप्पणी आयी है।

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मॉनसून सत्र 21 जुलाई को शुरू होगा और 13 अगस्त को समाप्त होगा। संयोग से प्रमुख दलों के कुछ नेताओं जैसे अहमद पटेल (कांग्रेस) और शांता कुमार (भाजपा) ने सांसदों की मांग पर असहमति की टिप्पणी दी थी। समिति में शामिल विभिन्न दलों के सदस्यों में इस बात को लेकर लगभग आम सहमति थी कि उनके वेतन और भत्ते बढ़ने चाहिए।

सूत्रों ने बताया कि सदस्यों ने अध्यक्ष से कहा कि वह इस मुद्दे को संसदीय मामलों के मंत्री एम वेंकैया नायडू के समक्ष उठायें। सूत्रों ने बताया कि उनके बीच बैठक निकट समय में संभव नहीं है। ऐसी जानकारी मिली है कि अध्यक्ष ने इस बात को लेकर चिंता जतायी कि समिति की बैठक की गोपनीय जानकारी और सिफारिशें मीडिया में आयी हैं।



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