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मुंबई में 13 साल की रेप पीड़ित के गर्भपात से जुड़े मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली

अब सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को मामले की सुनवाई करेगा.

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मुंबई में 13 साल की रेप पीड़ित के गर्भपात से जुड़े मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली

मुंबई में 13 साल की रेप पीड़ित के गर्भपात से जुड़े मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली... प्रतीकात्मक फोटो

खास बातें

  1. 13 साल की रेप पीडित के गर्भपात के मामले में मेडिकल रिपोर्ट नहीं आई है
  2. इसलिए मामले की कोर्ट में सुनवाई टल गई है
  3. सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को मामले की सुनवाई करेगा.
मुंबई: मुम्बई में 13 साल की रेप पीडित के गर्भपात के मामले में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट नहीं आई है. महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि अभी तक मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट नहीं आ पाई है. अब सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को मामले की सुनवाई करेगा.

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इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि मुम्बई में बरसात के चलते बच्ची का मेडिकल परीक्षण तय दिन में नही हो पाया था. इसके बाद 2 सितम्बर को पीड़ित का मेडिकल परीक्षण हुआ था. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई स्थित सर जेजे ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल के मेडिकल बोर्ड को गर्भपात के लिए परीक्षण कर पांच सितंबर को रिपोर्ट देने को कहा था. 30 अगस्त  को जस्टिस एस ए बोबडे और एल नागेश्वर राय की बेंच ने कहा था कि ये परीक्षण दो सितंबर को किया जाएगा बच्ची की मां की ओर से 30 हफ्ते के गर्भ का गर्भपात कराने की अर्जी दाखिल की है.

दरअसल 28 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने 13 वर्षीय रेप पीड़ित गर्भवती लड़की के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए सोमवार को एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया था. यह नाबालिग लड़की 30 सप्ताह की गर्भवती थी जो अब 31 वें सप्ताह में पहुंच चुका है. बेंच ने इस मामले की सुनवाई 31 अगस्त के लिए तय करते हुए कहा था कि यह बोर्ड याचिकाकर्ता की बेटी की स्थिति और गर्भपात के बारे में सलाह देगा.

इस बीच, कोर्ट ने बगैर खोपड़ी वाले 24 सप्ताह के भ्रूण के गर्भपात की अनुमति के लिए दायर याचिका पर उसके स्वास्थ्य की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया था.  साथ ही इसकी एक प्रति सॉलिसीटर जनरल के पास भेजने का भी निर्देश दिया. वहीं सुनवाई के दौरान SG रंजीत कुमार ने कोर्ट को बताया था कि केंद्र सरकार की ओर से सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र जारी कर कहा गया है कि वो ऐसे मामलों में फौरन फैसला लेने के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन करें जिसमें स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल विशेषज्ञ के अलावा रेडियोलॉजी, सोनोग्राफी समेत सभी मुख्य विभागों के विशेषज्ञ हों.


SG ने कोर्ट को इस एडवायजरी की प्रति भी दी और बताया कि चंडीगढ के एक ऐसे ही मामले की सुनवाई के दौरान तत्कालीन चीफ जस्टिस जे एस खेहर ने केंद्र से सभी राज्यों में मेडिकल बोर्ड के गठन के लिए कहा था. 


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