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याकूब की फांसी पर मुंबई अलर्ट, पुलिस आयुक्त ने दिए सुरक्षा पुख्ता करने के आदेश

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याकूब की फांसी पर मुंबई अलर्ट, पुलिस आयुक्त ने दिए सुरक्षा पुख्ता करने के आदेश

याकूब मेमन की फाइल फोटो

मुंबई:

1993 धमाकों के दोषी याकूब मेमन की फांसी 30 जुलाई को तय मानी जा रही है। आशंका है कि अंडरवर्ल्‍ड कुछ गड़बड़ी कर सकता है। इसलिए मुंबई पुलिस अलर्ट पर है।

बुधवार 22 जुलाई को मुंबई पुलिस आयुक्त राकेश मारिया ने शहर के सभी पुलिस आयुक्त, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त और सहपुलिस आयुक्त के साथ बैठक लेकर शहर की सुरक्षा को पुख्ता करने का आदेश दिया। उसके लिए जरूरी नाकाबंदी, संवेदनशील इलाकों की तलाशी, नागपाड़ा, भिन्डी बाजार, गोवंडी, माहिम और जोगेश्वरी जैसे भीड़ भरे इलाकों में ज्यादा पुलिस की तैनाती, साथ ही सादे कपड़ों में भी कुछ पुलिसकर्मियों को मौजूद रहने की हिदायत दी गई है।

अंडरवर्ल्‍ड पर खास नज़र रखने का आदेश दिया गया है, खासकर डी कंपनी के गुर्गों पर। उनकी सूची भी बनाई जा रही है। जरूरत पड़ने पर धर पकड़ भी की जायेगी। पुलिस आयुक्त के आदेश के बाद मुंबई में जगह-जगह पर नाकेबंदी और चौकसी बढ़ा दी गई है। इधर शहर में याकूब की फांसी को लेकर अलग-अलग आवाजें आ रही हैं।

अमन कमिटी के सदर फरीद शेख का कहना है कि याकूब तक़रीबन 20 साल से जेल में है। लगभग 2 उम्र कैद काट चुका है। इतने सालों के बाद फांसी देना कहां से मुनासिब है। इस देश में कई लोगों की फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील किया गया है। याकूब को ही फांसी की जल्दी क्यों? जबकि भिन्डी बाजार की एक मस्जिद के ट्रस्टी शोएब खतीब का कहना है कि उसने समर्पण किया है तो उसके साथ रियायत बरतनी चाहिए थी। लेकिन अब जब सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुना दिया है तो एक हिंदुस्तानी होने के नाते फैसले का सम्मान करना हमारा फर्ज है।


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इस बीच कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया के जरिये याकूब की बेटी के नाम पर गलत सन्देश भेज कर शहर का अमन चैन ख़राब करने की फ़िराक में भी है। पुलिस की इनपर भी नजर है। मुंबई पुलिस के प्रवक्ता पुलिस उपायुक्त धनंजय कुलकर्णी के मुताबिक मुंबई पुलिस की सोशल मीडिया लैब और साइबर सेल इस तरंह के संदेशो पर नज़र रखे हुए हैं। जो भी इस तरह की हरकत करते हुए पकड़ा जायेगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी।

इस बीच नागपुर जेल में बंद याकूब से उसकी पत्नी और बेटी ने जेल में उससे मुलाकात की। खबर है कि फांसी की सजा की तारीख मुक़र्रर हो जाने के बाद से ही वो उदास रहने लगा है। हालांकि उसने अब भी उम्मीद नहीं छोड़ी है। सर्वोच्च न्यायालय में गुरुवार को फिर उसकी तरफ से एक अर्जी दी गई। इसके अलावा राज्यपाल को लिखी अर्जी पर भी अभी फैसला आना बाकी है।



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