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मुजफ्फरपुर कांड: सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिंग से बैन हटाया, कहा- मामले को सनसनीखेज न बनाएं

बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले (मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामला) में पटना हाईकोर्ट द्वारा मीडिया की रिपोर्टिंग पर लगाई गई रोक को सुप्रीम कोर्ट ने हटा दिया है.

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मुजफ्फरपुर कांड: सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिंग से बैन हटाया, कहा- मामले को सनसनीखेज न बनाएं

Muzaffarpur Shelter rape case: सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्टिंग पर से बैन हटाया

नई दिल्ली:

बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले (मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामला) में पटना हाईकोर्ट द्वारा मीडिया की रिपोर्टिंग पर लगाई गई रोक को सुप्रीम कोर्ट ने हटा दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान ही सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिंग पर पटना हाईकोर्ट के बैन को हटाया है. साथ ही मीडियो को मामले की सनसनीखेज रिपोर्टिंग न करने को भी कहा है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और NBA को नोटिस जारी कर ऐसे अपराधों में मीडिया रिपोर्टिंग के लिए गाइडलाइन बनाने में सहयोग मांगा है.  

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सुप्रीम कोर्ट ने एडिटर्स गिल्ड और ( इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन IBF) को भी नोटिस भेजा है. साथ ही कोर्ट ने कहा है कि हम मीडिया से आग्रह करते हैं कि वो ऐसे मामलों को सनसनीखेज ना बनाएं. पीडितों का इंटरव्यू ना करें. हम पहले ही पीडिताओं की तस्वीर किसी भी तरह चलाने से रोक चुके हैं. कोर्ट ने कहा कि अब मामले की सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी. 


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बच्चियों के साथ यौन अपराधों के मामले में मीडिया रिपोर्टिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल भी उठाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया आत्म चिंतन करें कि क्या हो रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये मीडिया ट्रायल नहीं बल्कि मीडिया जजमेंट है. मीडिया पहले की आरोपियों को दोषी करार दे चुका है. कोर्ट ने कहा कि ये तय है कि मीडिया रिपोर्टिंग पर ब्लैंकेट बैन नहीं लगाया जा सकता लेकिन कोई रेखा तो होनी चाहिए. 

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कोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा कि कैसे मीडिया के लिए रेखा तय की जा सकती है. इस पर बिहार की ओर ये कहा गया कि पुलिस भी ऐसे मामलों में मीडिया के खिलाफ मामला दर्ज नहीं करती. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस भी आपकी तरह है वो टीवी नहीं देखती. बिहार सरकार ने बताया कि PCI, NBA आदि संस्थाएं हैं. इस पर कोर्ट ने कहा कि ये तो एथिक्स वाली बात है, मैकेनिज्म कहां है ? 

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सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर NGO के मालिक और मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर पर सख्त सख्ती दिखाई है. कोर्ट ने कहा कि इनकम टैक्स उनकी संपत्ति की जांच करे. साथ ही कोर्ट ने पूछा का आखिर 4.5 करोड़ रुपये जो उन्हें मिले थे, वह कहां गये, उनका इस्तेमाल क्या हुआ. कोर्ट ने कहा कि चंद्रशेखर वर्मा और मंजू वर्मा के पास अवैध हथियार के मामले को बिहार पुलिस गंभीरता से देखे. 

कोर्ट ने कहा कि बृजेश ठाकुर और चंद्रशेखर वर्मा का इतना आतंक है कोई उनके खिलाफ बोलने को तैयार नही हैं (रिपोर्ट के मुताबिक). इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को कहा 20 मार्च 2018 को जिन लड़कियों को वेलफेयर विभाग से शेल्टर होम में भेजा गया, इस पर बिहार सरकार हलफ़नामा दायर करे. 

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पटना हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. इससे पहले पटना हाईकोर्ट ने मुजफरनगर शेल्टर होम मामले में मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाने का आदेश दिया गया था. 

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