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सुप्रीम कोर्ट और लोगों की सेहत के हित से बड़े हो गए नरेंद्र मोदी सरकार के ये अधिकारी, किया यह ट्वीट

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सुप्रीम कोर्ट और लोगों की सेहत के हित से बड़े हो गए नरेंद्र मोदी सरकार के ये अधिकारी, किया यह ट्वीट

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत....

खास बातें

  1. नीति आयोग के सीईओ हैं अमिताभ कांत
  2. कांत ने सुप्रीम कोरट् के आदेश पर किया है विवादित ट्वीट
  3. सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे के किनारे शराब की बिक्री पर रोक लगाई है.
नई दिल्ली: जनहित में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले पर नरेंद्र मोदी सरकार में बनाए गए नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने प्रश्न चिह्न लगाया है. अमिताभ कांत ने एक ट्वीट कर कहा है कि पर्यटन से नौकरियों का सृजन होता है. उन्हें क्यों खत्म किया जाए. उन्होंने एक अखबार की खबर को शेयर करते हुए यह कहा है. इस खबर में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के हाइवे के 500 मीटर के दायरे में शराब की बिक्री को बंद करने से करीब 10 लाख नौकरियों पर असर पड़ेगा.

उल्लेखनीय है कि राष्‍ट्रीय राजमार्गों और स्‍टेट हाईवे से सटे 500 मीटर तक के इलाके में शनिवार से शराब की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रोक लग गई है. शराब की दुकानों पर एक अप्रैल से रोक के आदेश में संशोधन से सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इनकार कर दिया था. इस आदेश के बाद हाईवे के किनारे स्थित शराब दुकानों ही नहीं बार और रेस्तरां में भी शराब नहीं बेची जा सकेगी. हालांकि किसी स्थानीय निकाय क्षेत्र से गुजरने वाले हाईवे पर, जहां 20 हजार से कम जनसंख्या है, वहां यह सीमा 500 से घटाकर 220 मीटर की गई.
 
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने 15 दिसंबर के आदेश में कुछ संशोधन किए हैं. इसके मुताबिक जिन राज्यों में शराब के लाइसेंस 15 दिसंबर से पहले दिए गए और जिन दुकानों की अवधि 31 मार्च के बाद तक है, वे चल सकेंगी. लेकिन 30 सितंबर को यह दुकानें भी बंद करनी होंगी. यह व्यवस्था तेलंगाना और आंध्र प्रदेश आदि राज्यों के लिए है. मेघालय और सिक्किम को इस नियम में छूट दी गई है.

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राष्‍ट्रीय राजमार्गों और स्‍टेट हाईवे से 500 मीटर दूर तक शराब की दुकानों पर रोक जारी रहेगी या नहीं,  अप्रैल की डेडलाइन बढ़ेगी या नहीं? इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुरक्षित रखा था. सुप्रीम कोर्ट को यह भी तय करना था कि यह आदेश हाईवे के किनारे स्थित बार- रेस्तरां पर भी लागू होगा या नहीं. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की संशोधन करने की याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली थी.

मामले में जनहित याचिका पंजाब और तमिलनाडु के लिए दाखिल की गई थी लेकिन आदेश सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए दिए गए.


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