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तीन तलाक- सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक, महिला सबलीकरण की ओर बड़ा कदम: पीएम नरेंद्र मोदी

कोर्ट के इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, 'इस के साथ ही मुस्लिम महिलाओं के लिए नए युग की शुरुआत होगी.'

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तीन तलाक- सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक, महिला सबलीकरण की ओर बड़ा कदम: पीएम नरेंद्र मोदी

सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत के फैसले से एक बार में तीन तलाक देने को असंवैधानिक करार दिया. (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत से तीन तलाक के खिलाफ फैसला दिया
  2. पीएम मोदी ने कहा कि कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक
  3. अमित शाह ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के लिए नए युग की शुरुआत
नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए एक बार में तीन तलाक देने को असंवैधानिक करार दिया है. इस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करते हुए इस फैसले का स्‍वागत किया है. उन्‍होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है. इससे मुस्लिम महिलाओं को बराबरी का हक मिलेगा. यह महिला सबलीकरण की ओर शक्तिशाली कदम है. कोर्ट के इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, 'इस के साथ ही मुस्लिम महिलाओं के लिए नए युग की शुरुआत होगी.'
   उल्‍लेखनीय है कि 22 अगस्‍त को सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर छह महीने के लिए रोक लगा दी है. कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह तीन तलाक पर कानून बनाए. सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई कि केंद्र जो कानून बनाएगा उसमें मुस्लिम संगठनों और शरिया कानून संबंधी चिंताओं का खयाल रखा जाएगा. केंद्र ने राजनीतिक दलों से अपने मतभेदों को दरकिनार रखने और तीन तलाक के संबंध में कानून बनाने में केंद्र की मदद करने को कहा है. कोर्ट ने कहा कि अगर छह महीने में कानून नहीं बनाया जाता है तो तीन तलाक पर शीर्ष अदालत का आदेश जारी रहेगा.

कोर्ट ने इस्लामिक देशों में तीन तलाक खत्म किए जाने का हवाला दिया और पूछा कि स्वतंत्र भारत इससे निजात क्यों नहीं पा सकता. कोर्ट में 3 जज इसे अंसवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे, वहीं 2 जज इसके पक्ष में नहीं थे.

इससे पूर्व 11 से 18 मई तक रोजाना सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए आज का दिन मुकर्रर किया था. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय में शादी तोड़ने के लिए यह सबसे खराब तरीका है. ये गैर-ज़रूरी है. कोर्ट ने सवाल किया कि क्या जो धर्म के मुताबिक ही घिनौना है वह कानून के तहत वैध ठहराया जा सकता है? सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि कैसे कोई पापी प्रथा आस्था का विषय हो सकती है.


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