नरेंद्र मोदी की सरकार राजीव गांधी की सरकार की तरह घुटने नहीं टेकती : मुख्तार अब्बास नकवी

केंद्रीय मंत्री नकवी का दावा- पिछले एक साल में तुरंत तीन तलाक या तलाक ए बिद्दत के मामलों में पूरे देश में 80 प्रतिशत की कमी आई

नई दिल्ली:

अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी (Mukhtar Abbas Naqvi) का कहना है कि तुरंत तीन तलाक (Triple Talaq) को खत्म करने के लिए बनाया गया कानून न तो बदला जाएगा और न ही वापस होगा. उन्होंने कहा है कि ये नरेंद्र मोदी की सरकार है राजीव गांधी की नहीं और ये सरकार घुटने नहीं टेकती है. इस कानून के बनने का एक साल कल पूरा हो रहा है.  नकवी का दावा है कि इसके बाद पिछले एक साल में तुरंत तीन तलाक या तलाक ए बिद्दत के मामलों में पूरे देश में 80 प्रतिशत की कमी आई है. एनडीटीवी इंडिया से खास बातचीत में नकवी ने कहा कि इस कानून के बनने से मुस्लिम महिलाओं (Muslim Women) को ताकत मिली है. इससे तीन तलाक के अपराध कम हुए हैं. इसमें सामाजिक संस्थाओं का भी योगदान रहा है. नकवी के मुताबिक ये काम पहले होना चाहिए था. लेकिन देर आए दुरुस्त आए.

नकवी के मुताबिक तीन तलाक इंसानियत के खिलाफ है. ये कुरीति है जो भारत में जारी रही. यह पूछने पर कि जब सुप्रीम कोर्ट इसे अंसवैधानिक बता चुका था तो कानून बनाने की क्या जरूरत थी, नकवी ने तल्ख अंदाज में पूछा कि क्या क़त्ल संवैधानिक है? बलात्कार संवैधानिक है क्या? चोरी करना संवैधानिक है क्या? ये सब असंवैधानिक हैं, तभी इनकी सजा देने के लिए क़ानून बनाया गया. उन्होंने कहा कि लम्हों ने ख़ता की थी, दशकों ने पाई. नकवी के मुताबिक इसे मज़हब की नज़र से न देखा जाए. ये लैंगिक समानता से जुड़ा हुआ फैसला है. नकवी ने कहा कि कांग्रेस भी ये काम कर सकती थी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इसे प्रभावी बनाया.

नकवी के मुताबिक पिछले एक साल के आंकड़ों से पता चलता है कि जमीन पर इस कानून का असर हुआ है. हमने अल्पसंख्यक कमीशन से रिपोर्ट मांगी. पूरे देश में केवल तीन आपराधिक केस आए. हमने अलग-अलग राज्यों से रिपोर्ट ली. 80% से ज़्यादा केस कम हुए हैं. दुरुपयोग का कोई मामला सामने नहीं आया है. लोगों को एहसास है कि ये कुरीति है और ये काम पहले होना चाहिए था.

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यह पूछने पर कि कुछ मुस्लिम संगठनों ने तीन तलाक कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है और उनकी दलील है कि शौहर को जेल भेजकर इंसाफ नहीं मिल सकता, नकवी ने कहा कि ये देश संविधान से चलता है. कुछ लोगों ने मूर्खता का ठेका लिया और उनका इलाज नहीं किया जा सकता. नकवी ने कहा कि ये कुतर्क हैं. बेहतर तो यही है कि ऐसे काम मत करो कि जेल जाना पड़े. उन्होंने दो टूक कहा कि न तो ये कानून वापस होगा और न ही इसमें बदलाव किया जाएगा. ये संसद में चर्चा के साथ क़ानून आया है. नकवी ने कहा कि ये मोदी जी की सरकार है, राजीव गांधी की सरकार नहीं है. हम घुटने नहीं टेकते. पूरे देश में इस क़ानून का स्वागत किया गया है. सिर्फ़ मुट्ठी भर लोग इसके ख़िलाफ़ हैं. ये मोदी जी का विकास का मसौदा है और ये वोट का सौदा नहीं है. हम समाज के सुधार के लिए काम करते हैं. वोटों के उधार के लिए काम नहीं करते.

जब नकवी से इस आरोप पर पूछा गया कि क्या यह कानून एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने के लिए लाया गया, तो नकवी ने कहा कि कई इस्लामी देशों में तीन तलाक पर पाबंदी है. मिस्र ने किसे निशाना बनाया? पाकिस्तान ने किसे निशाना बनाया?  ये तो सब इस्लामिक देश हैं. इस्लामिक देश किसे निशाना बना रहे?

कल ईद के मौके पर उन्होंने कहा कि कोरोना संकटकाल में कई त्योहार आए हैं. महामारी में सबने संयम रखा है. कोरोना का क़हर कम नहीं हुआ है. दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा. हमें एहतियात बरतनी होगी. हिफ़ाज़त के साथ इबादत करें. उन्होंने बताया कि वे भी कल घर पर ही नमाज़ पढ़ेंगे. हज सीमित संख्या में हो रहा है. इस बार अमरनाथ यात्रा भी नहीं हो रही है. कांवड़ भी नहीं हुआ.

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जब नकवी से पूछा गया कि पांच अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमिपूजन हो रहा है जबकि अभी वहां एक पुजारी और कई लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं तो इस पर नकवी ने कहा कि अयोध्या में समझदार लोग हैं. अयोध्या पर विवाद की ज़रूरत नहीं.

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ओवैसी ने कहा है कि पीएम मोदी ने संविधान की शपथ ली है और उन्हें वहां नहीं जाना चाहिए. इस पर नकवी ने कहा कि विवाद की जरूरत नहीं है. अल्लामा इक़बाल ने कहा था भगवान राम इमाम-ए-हिंद हैं. राम जन्मभूमि पर फ़ैसला आना था उससे पहले मेरे घर पर सभी समुदाय के वरिष्ठ लोगों को बुलाया गया था. सबने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के सम्मान की बात कही थी. हमने फ़ैसले को स्वीकार किया और उसी फ़ैसले के हिसाब से राम मंदिर का निर्माण होने जा रहा है.