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नरोदा पाटिया दंगा: गुजरात हाईकोर्ट से माया कोडनानी बरी, बाबू बजरंगी की सजा बरकरार

गुजरात में 2002 के नरौदा पाटिया दंगा (नरोदा पाटिया दंगा) मामले में दायर अपीलों पर शुक्रवार को गुजरात हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया.

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नरोदा पाटिया दंगा: गुजरात हाईकोर्ट से माया कोडनानी बरी, बाबू बजरंगी की सजा बरकरार

माया कोडनानी (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. नरोदा पाटिया केस में गुजरात हाईकोर्ट का फैसला.
  2. माया कोडनानी को हाईकोर्ट ने बरी किया.
  3. बाबू बजरंगी की सजा हाईकोर्ट ने बरकरार रखी.
नई दिल्ली: गुजरात में 2002 के नरौदा पाटिया दंगा (नरोदा पाटिया दंगा) मामले में दायर अपीलों पर शुक्रवार को गुजरात हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया. हाईकोर्ट ने माया कोडनानी को बरी कर दिया है, वहीं बाबू बजरंगी की सजा को बरकरार रखा है. वहीं, नरोदा दंगा पीड़ित के लिए मुआवजे की मांग वाली याचिका को गुजरात हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है.  

इस मामले के 32 दोषियों में से गुजरात हाईकोर्ट ने माया कोडनानी सहित 17 लोगों को बरी कर दिया है. वहीं, 12 लोगों की सजा को बरकरार रखा है. साथ ही अभी दो के ऊपर फैसला आने का इंतजार है. बता दें कि इनमें से एक आरोपी की मौत हो गई है.

न्यायमूर्ति हर्षा देवानी और न्यायमूर्ति ए एस सुपेहिया की पीठ ने मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद पिछले साल अगस्त में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था.अगस्त 2012 में एसआईटी मामलों के लिये विशेष अदालत ने राज्य की पूर्व मंत्री और भाजपा नेता माया कोडनानी समेत 32 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. 

कोडनानी को 28 साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी. एक अन्य बहुचर्चित आरोपी बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी को मृत्यु पर्यंत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. सात अन्य को 21 साल के आजीवन कारावास और शेष अन्य को 14 साल के साधारण आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. 

निचली अदालत ने सबूतों के अभाव में 29 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था. जहां दोषियों ने निचली अदालत के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी, वहीं विशेष जांच दल ने 29 लोगों को बरी किये जाने के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी. 

28 फरवरी, 2002 को हुए नरसंहार के सिलसिले में यहां की एक विशेष अदालत ने कोडनानी तथा बजरंगी सहित 32 लोगों को बुधवार को दोषी करार दिया था.

उल्लेखनीय है कि नरोदा पाटिया में 28 फरवरी 2002 को एक भीड़ पर हमला कर सम्प्रदाय विशेष के 97 लोगों को जिंदा जला दिया गया था. विशेष अदालत ने बुधवार को इस जनसंहार के लिए कोडनानी और बजरंगी सहित 32 लोगों को दोषी करार दिया था. अहमदाबाद में विशेष अदालत ने इस मामले में 29 लोगों को बरी भी कर दिया था.

वर्ष 2009 में सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात दंगों से संबंधित इस मामले तथा ऐसे ही कई अन्य मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था. इन दंगों में 1,000 लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकांश एक जाति विशेष के लोग थे.

इस मामले के प्रारंभिक गवाह 60 वर्षीय दिलवर सैयद ने कहा, "उस खौफनाक मंजर के बारे में सोचते हुए मैंने 10 साल गुजार दिए. पाटिया में मैंने जो कुछ देखा उसे कभी भुला नहीं सकता। इस फैसले से मुझे पूरा तो नहीं, थोड़ा सुकून जरूर मिला है। उसने रुंधे हुए गले से कहा, "कम से कम 100 परिवार बर्बाद हो गए."

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इस मामले में 64 लोगों को आरोपी बनाया गया था जिनमें से तीन की मौत हो चुकी है. बाकी बचे 61 लोगों पर हत्या, आगजनी और दंगा भड़काने के आरोप थे। इनमें से अधिकांश को जमानत मिल गई थी. इस मामले में अदालत में कुल 327 गवाह और 2,500 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए थे.


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