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नेशनल हेराल्ड केस: सोनिया-राहुल गांधी होंगे कोर्ट में पेश, पढ़ें- कानूनी प्रक्रिया और पूरा मामला

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नेशनल हेराल्ड केस: सोनिया-राहुल गांधी होंगे कोर्ट में पेश, पढ़ें- कानूनी प्रक्रिया और पूरा मामला

सोनिया गांधी और राहुल गांधी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

नेशनल हेराल्ड मामले में आज (शनिवार को) दिल्ली की अदालत में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी पेश होंगे। इस मामले से जुड़े प्रमुख तथ्य इस प्रकार हैं-

क्या है कानूनी प्रक्रिया
कोर्ट में पेशी होने के बाद दोनों को कोर्ट जमानत के लिए कह सकता है। इसमें फॉर्म 45 भरना होता है, जिसमें पर्सनल बांड यानी निजी मुचलका और जमानती यानी श्योरटी होती है। पर्सनल बांड में आरोपी को लिखकर देना होता है कि वह कोर्ट की शर्तों का पालन करेगा, जबकि श्योरटी के लिए किसी जमानती की जरूरत होती है जो आरोपी के लिए बांड भरेगा और कोर्ट के आदेशानुसार तय राशि के लिए दस्तावेज देगा। वैसे कोर्ट के पास अधिकार है कि वह निजी मुचलके पर जमानत देकर रिहा कर सकता है।

किन धाराओं मे हैं सोनिया और राहुल पर आरोप
पटियाला हाउस कोर्ट ने जो समन जारी किए हैं, उनमें भारतीय दंड विधान की तीन धाराएं शामिल हैं।

  • IPC 420, धोखाधड़ी (अधिकतम सजा सात साल)
  • IPC 403, बेईमानी से संपत्ति हथियाना (अधिकतम सजा दो साल)
  • IPC 406, अमानत में खयानत (अधिकतम सजा तीन साल)
  • IPC 120, आपराधिक साजिश (सजा अपराध के अनुसार)

कोर्ट की जमानत के लिए सामान्य शर्तें
  1. आरोपी जब भी अदालत कहेगी, कोर्ट में हाजिर रहेगा।
  2. वह बिना अनुमति के देश छोड़कर नहीं जाएगा।
  3. वह सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा।
  4. गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगा।
  5. कोर्ट को अंदेशा हो तो वह पासपोर्ट भी जब्त कर सकता है।

गौरतलब है कि 26 जून 2014 को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी के अलावा ऑस्कर फर्नांडिस, मोतीलाल वोरा, सुमन दुबे और सैम पित्रोदा को समन जारी कर पेश होने के आदेश दिए थे। बाद में अपील करने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने समन पर रोक लगा दी थी। चार दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रख लिया था। सात दिसंबर को हाईकोर्ट ने समन रद्द करने की याचिका खारिज कर दी और आठ दिसंबर की पेशी से छूट देने से इनकार कर दिया। हालांकि आठ दिसंबर को पटियाला हाउस कोर्ट ने 19 दिसंबर की तारीख दे दी।

क्या है मामला
बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कोर्ट में दाखिल अर्जी में आरोप लगाया था कि सोनिया और राहुल ने कांग्रेस पार्टी से लोन देने के नाम पर नेशनल हेराल्ड की 2000 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली। पहले नेशनल हेराल्ड की  कंपनी एसोसिएट जनरल लिमिटेड (AJL) को कांग्रेस ने 26 फरवरी, 2011 को 90 करोड़ का लोन दे दिया। इसके बाद 5 लाख रुपये से यंग इंडियन कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया और राहुल की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी है। शेष हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के पास है। इसके बाद 10-10 रुपये के नौ करोड़ शेयर यंग इंडियन को दे दिए गए और इसके बदले यंग इंडियन को कांग्रेस का लोन चुकाना था। 9 करोड़ शेयर के साथ यंग इंडियन को एजेएल के 99 फीसदी शेयर हासिल हो गए। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड़ का लोन भी माफ कर दिया। यानी यंग इंडियन को मुफ्त में स्वामित्व मिल गया। स्वामी ने इस 90 करोड़ रुपये के प्रकरण में हवाला कारोबार का शक जताया है।

हेराल्ड भवन पर कब्जे की कोशिश
स्वामी का यह भी आरोप है कि यह सब कुछ दिल्ली में बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस की 1,600 करोड़ रुपये की बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए किया गया। उनका आरोप है कि साजिश के तहत यंग इंडियन लिमिटेड को टीजेएल की संपत्ति का अधिकार दिया गया है। हेराल्ड हाउस को फिलहाल पासपोर्ट ऑफिस के लिए किराये पर दिया गया है। स्वामी का कहना है कि हेराल्ड हाउस को केंद्र सरकार ने समाचार पत्र चलाने के लिए जमीन दी थी, इस लिहाज से उसे व्यावसायिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

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सोनिया और राहुल की दलील
दिल्ली हाइकोर्ट में सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने नेशनल हेराल्ड की करोड़ों की संपत्ति हड़पने के आरोपों से इनकार किया है। सोनिया और राहुल ने हाईकोर्ट में कहा कि कांग्रेस की संपत्ति उनकी निजी संपत्ति नहीं है। कांग्रेस को मिला डोनेशन वह जैसे चाहे खर्च करें, यह बात उनकी ओर से हाईकोर्ट में वकील कपिल सिब्बल ने कही। सिब्बल ने कहा कि नब्बे करोड़ का ट्रांजैक्शन कामर्शियल काम  के लिए नहीं था बल्कि एक विचारधारा के लिए था। यह विचारधारा थी नेशनल हेराल्ड का रिवाइवल। इस बात का जिक्र कांग्रेस प्रवक्ता ने एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान भी किया था। उन्होंने कहा कि इस अखबार से कांग्रेस की भावनाएं जुड़ी हैं क्योंकि इसकी शुरुआत जवाहर लाल नेहरू ने की थी। किसी भी शेयरहोल्डर ने शिकायत नहीं की इसलिए यह केस नहीं बनता। यंग इंडिया के शेयर होल्डरों को किसी भी तरह का कोई फायदा नहीं मिला।

शिकायकर्ता हैं सुब्रमण्यम स्वामी
बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी से हाई कोर्ट ने पूछा कि इस केस में आपका लोकस क्या है। आप इस केस में न तो पीड़ित हैं और न ही किसी तरह से जुड़े हुए हैं। स्वामी इस केस में अनजान व्यक्ति हैं। आपके पास क्या सबूत है कि यंग इंडियन ने नेशनल हेराल्ड के शेयर ट्रांसफर किए? स्वामी सारे जवाब को लिखित में दें। स्वामी ने कोर्ट में कहा कानूनन वे शिकायतकर्ता बन सकते हैं। यह मामला पब्लिक इंटरेस्ट का है। जैसे 2जी केस में वे शिकायतकर्ता हैं।



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