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गैर-इरादतन हत्या मामले में सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में रखा अपना पक्ष, सुनवाई जारी

सिद्धू ने कोर्ट को कहा कि दिल का दौरा पड़ना एक स्वतंत्र मोत की वजह है और इससे चोट लगने का कोई संबंध नहीं है.

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गैर-इरादतन हत्या मामले में सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में रखा अपना पक्ष, सुनवाई जारी

नवजोत सिंह सिद्धू की फाइल फोटो

नई दिल्ली:

पंजाब के मंत्री और कांग्रेसी नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने ऊपर चल रहे गैर-इरादतन हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा. सुप्रीम कोर्ट में नवजोत सिंह सिद्धू ने दलील दी कि उनकी और गुरनाम नाम के शख्स के बीच हुई कहासुनी में गुरनाम का दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई थी. सिद्धू ने कोर्ट को कहा कि दिल का दौरा पड़ना एक स्वतंत्र मोत की वजह है और इससे चोट लगने का कोई संबंध नहीं है. सिद्धू ने कोर्ट में मृतक गुरनाम के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि गुरनाम को शुरू से ही दिल की बीमारी थी. इसका जिक्र उसके पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी है.सिद्धू ने इस दौरान कहा कि उनके खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला सही नहीं. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी.

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गौरतलब है कि 27 दिसम्बर 1988 को सिद्धू अपने दोस्त रुपिंदर सिंह संधू के साथ पटियाला के शेरावाले गेट की मार्किट पहुंच स्टेट बैंक के सामने कार पार्किंग को लेकर उनकी गुरनाम सिंह नाम के बुजुर्ग के साथ कहासुनी हो गई. झगडे में गुरनाम की मौत हो गई. सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह संधू पर गैर इरादतन मर्डर का केस हो गया. सेशन कोर्ट में केस चला. पंजाब सरकार और पीड़ित परिवार की तरफ से मामला दर्ज करवाया गया. साल 1999 में सेशन कोर्ट से सिद्धू को राहत मिली और केस को खारिज कर दिया गया.

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कोर्ट का कहना था कि आरोपी के खिलाफ पक्के सबूत नहीं हैं और ऐसे में सिर्फ शक के आधार पर केस नहीं चलाया जा सकता. लेकिन साल 2002 में राज्य सरकार ने सिद्धू के खिलाफ पंजाब हाईकोर्ट में अपील की. 1 दिसम्बर 2006 को  हाई कोर्ट बेंच ने सिद्धू और उनके दोस्त को दोषी माना.  

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VIDEO: नवजोत सिंह सिद्धू का भाषण छाया.

6 दिसम्बर को सुनाए गए फैसले में सिद्धू और संधू को 3-3 साल की सज़ा सुनाई गई. एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगा. सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए 10 जनवरी 2007 तक का समय दिया गया.



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