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मिलिट्री कैंटीन से नहीं खरीद पाएंगे सस्ती कार, नियम लागू होने से कुछ सप्ताह पहले ही नेवी चीफ ने खरीदी जीप कम्पास

कैंटीन विभाग में कीमत काफी कम होती है और इसके अलावा जीएसटी में भी 50 फीसद तक की छूट मिलती है. सशस्त्र बल कर्मियों को यह छूट मिलती है.

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मिलिट्री कैंटीन से नहीं खरीद पाएंगे सस्ती कार, नियम लागू होने से कुछ सप्ताह पहले ही नेवी चीफ ने खरीदी जीप कम्पास

निवर्तमान नेवी चीफ सुनील लांबा.

नई दिल्ली:

एक जून 2019 से 12 लाख रुपये की ज्यादा कीमत वाली कार अब सरकारी कैंटीन से रियायती दर पर नहीं खरीद पाएंगे. नया कानून लागू होने से कुछ दिन पहले ही निवर्तमान नेवी चीफ सुनील लांबा ने कैंटीन स्टोर डिपार्टमेंट (सीएसडी) से नई जीप कम्पास खरीदी है. अगर जीप कम्पास सीधे डीलर से खरीदी जाती है कि तो इसके बेस मॉडल की ऑन रोड कीमत 15 लाख से ज्यादा है, वहीं टॉप मॉडल की कीमत 20 लाख से ज्यादा पहुंच सकती है. कैंटीन से खरीदने पर इसकी कीमत काफी कम हो जाती है. कैंटीन विभाग में कीमत काफी कम होती है और इसके अलावा जीएसटी में भी 50 फीसद तक की छूट मिलती है. सशस्त्र बल कर्मियों को यह छूट मिलती है. जीप कम्पास, जो कैंटीन में सबसे महंगी कार थी, अब वहां उपलब्ध नहीं होगी.

24 मई को भेजे गए एक पत्र में, रक्षा मंत्रालय के एकीकृत मुख्यालय ने चार पहिया वाहनों के खरीदने की पात्रता को सीमित कर दिया. अब, अधिकारी और अन्य रैंक्स के सुरक्षाकर्मी हर आठ साल में केवल एक बार कार खरीद सकते हैं. वरिष्ठ अधिकारी 2,500 सीसी तक के इंजन क्षमता वाली एक कार खरीद सकते हैं. अन्य रैंक वाले अधिकारी 1,400 सीसी की इंजन क्षमता वाली कार खरीद सकते हैं. इनकी कीमत पांच लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.


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वन रैंक-वन पेंशन की लड़ाई लड़ने वाले संगठन इंडियन एक्स-सर्विसमैन मूवमेंट के चेयरमैन मेजर जनरल सतबीर सिंह ने बताया, 'नई नीति के लागू होने से रक्षा कर्मियों के मनोबल के साथ-साथ उनकी कार्यक्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.' सरकार को लिखे खत में जनरल सिंह ने कहा, 'वर्तमान वित्तीय स्थिति, कमाई और आकांक्षाओं को देखते हुए अधिकारी 15 से 20 लाख की रेंज में कार खरीदना चाहते हैं.' 

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बता दें, हर साल कैंटीन के लिए संसद द्वारा 17,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाते हैं. यह अलग से होता है, इसका रक्षा बजट से कोई लेना देना नहीं होता. पिछले साल कैंटीन के जरिए बिकी कारों पर 6 हजार करोड़ रुपये का खर्च आया था, जिसके चलते बजट काफी ऊपर चला गया. सरकार द्वारा कैंटीन नीति में लगाए गए नए प्रतिबंधों का शायद यह भी एक कारण हो सकता है.

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