NDTV Khabar

NEET का मुद्दा : संसद में भी गूंजने लगी प्रारूप में बदलाव की मांग, सभी भाषाओं में हो परीक्षा

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
NEET का मुद्दा : संसद में भी गूंजने लगी प्रारूप में बदलाव की मांग, सभी भाषाओं में हो परीक्षा

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली:

मेडिकल कालेजों में दाखिले के लिए तय NEET की रूपरेखा में बदलाव की मांग तेज हो रही है। पहले राज्यों ने कोर्ट के सामने अपने सवाल रखे, अब NEET के प्रारूप में बदलाव की आवाज संसद में गूंजने लगी है। मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए अगर पूरे देश में एक ही टेस्ट होता है, तो वह सभी भारतीय भाषाओं में होना चाहिए। तमाम राजनीतिक दलों ने यह मसला संसद और उसके बाहर उठाया है।

सभी भाषाओं को बराबरी का हक
कांग्रेस नेता और सांसद बीके हरिप्रसाद ने एनडीटीवी से कहा, "आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएं हैं। इन सभी भाषाओं को बराबरी का हक मिलना चाहिए।" यही मांग लोकसभा में सभी अहम दलों के सांसदों ने भी उठाई। तृणमूल कांग्रेस की काकोली घोष ने कहा, "कैसे क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई करने वाले अचानक हिंदी या अंग्रेजी में टेस्ट दे सकते हैं।" जबकि अकाली दल के प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने पंजाबी में भी NEET कराने की मांग की। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड्गे ने छात्रों को एक साल का वक्त देने का सुझाव दिया तो सीपीएम नेता मोहम्मद सलीम ने कहा, "अलग-अलग क्षेत्र के बच्चों का ध्यान रखकर परीक्षा ली जाए। "

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार
सरकार फिलहाल इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रही है। शहरी विकास मंत्री वैंकेया नायडू ने कहा, "सरकार सैद्धांतिक तौर पर नीट के समर्थन में है मगर वह चाहती है कि इसे अगले साल से लागू किया जाए। सुप्रीम कोर्ट को मनाने की कोशिश हो रही है।"


टिप्पणियां

परीक्षा सीबीएसई के हिसाब से तो आईसीएसई वाला क्या करेगा?
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग राज्यों के मेडिकल एंट्रेंस को खारिज करते हुए देश भर में एक ही टेस्ट कराने का आदेश दिया है। लेकिन सांसद याद दिला रहे हैं कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग सिलेबस के छात्रों को इसका खमियाजा भुगतना पड़ सकता है। एनसीपी नेता डीपी त्रिपाठी कहते हैं, "अगर परीक्षा सीबीएसई के हिसाब से होगी तो आईसीएसई वाला क्या करेगा?"  जबकि समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव कहते हैं, "हम हमेशा से अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं दोनों को साथ लेकर चलने की मांग करते रहे हैं, लेकिन क्षेत्रीय भाषाओं में मेडिकल एजुकेशन जब हम दे पाएंगे, तभी सबको लाभ मिलेगा।"

NEET परीक्षा अहम क्षेत्रीय भाषाओं में भी हो, इस अहम सवाल पर संसद में राजनीतिक सहमति साफ तौर पर दिखाई दे रही है। कुछ राजनीतिक दल यह भी मानते हैं कि सीबीएसई की पढ़ाई आईसीएसई और स्टेट बोर्ड की पढ़ाई से अलग है। NEET के प्रारूप को तय करने के दौरान इस अहम पहलू को भी ध्यान में रखना जरूरी होगा।



Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


Advertisement